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Azamgarh News: रिबोर पर करोड़ों खर्च, फिर भी छोटे हैंडपंपों के भरोसे गांव
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ठेकमा के राजेपुर में पानी निकालता ग्रामीण। संवाद
25-30 करोड़ की मरम्मत के दावों के बीच दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, ठोठिया की घटना ने उठाए बड़े सवाल
फोटो : 23 से 27 तक
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। ग्राम पंचायतों में हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर पर हर वर्ष 25 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जिले के अधिकांश गांवों में लोग आज भी चार नंबर (छोटे) हैंडपंपों के पानी पर निर्भर हैं।
विडंबना यह है कि विभागीय स्तर पर इन हैंडपंपों के पानी को पहले ही गुणवत्ता के लिहाज से अनुपयुक्त मानते हुए इन्हें परित्यक्त करने की बात कही जा चुकी है, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही है।
बरसात के मौसम में भूजल स्तर ऊपर आने से छोटे हैंडपंपों से निकलने वाले पानी के दूषित होने का खतरा और बढ़ जाता है। इसके बावजूद कई गांवों में बड़े इंडिया मार्का हैंडपंप खराब पड़े हैं या उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है।
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ऐसे में ग्रामीण मजबूरी में छोटे हैंडपंपों का पानी पीने को विवश हैं। जिला पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले की 1810 ग्राम पंचायतों में 56,000 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं।
मेंहनगर विकास खंड के ठोठिया गांव की घटना ने इस समस्या को फिर उजागर कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, चार नंबर हैंडपंप का पानी पीने के बाद एक दर्जन से अधिक परिवारों के लोग बीमार पड़ गए।
इस दौरान एक युवती की मौत भी हो गई, जबकि कई अन्य लोगों का इलाज चल रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग बीमारी के कारणों की जांच कर रहा है, लेकिन घटना के बाद पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर खराब हैंडपंपों की मरम्मत, रिबोर और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
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ब्लॉक मुख्यालय की बाजार में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप नहीं, दूषित पानी दे रहे छोटे हैंडपंप
पवई। ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद पवई बाजार में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। बाजार में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप उपलब्ध नहीं होने से दुकानदारों, राहगीरों और क्षेत्र से प्रतिदिन आने वाले करीब 1500 लोगों को मजबूरी में छोटे हैंडपंपों का पानी पीना पड़ रहा है। पवई बाजार में नौ स्थानों पर छोटे हैंडपंप लगे हैं, जिनका पानी ही लोगों के लिए पेयजल का मुख्य साधन बना हुआ है। ब्लॉक क्षेत्र की कछरा, लग्गुपुर, जल्दीपुर, भीमलपुर, मिल्कीपुर, रामनगर, प्रतापपुर, जमुहट, अलीनगर, रामपुर, बस्ती आदि ग्राम पंचायतों का भी यही हाल है।
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छोटे हैंडपंप का पानी उबालकर पी रहे ग्रामीण
महाराजगंज। ब्लॉक की ग्राम पंचायत नेवादा गांव में इंडिया मार्का हैंडपंप से दूषित पानी आ रहा है। कई बार ग्राम पंचायत को सूचना दिए जाने के बावजूद अभी तक उसे बनवाया नहीं जा सका। गांव निवासी जब्बर सिंह ने बताया कि इंडिया मार्का हैंडपंप के दूषित पानी देने के कारण छोटे हैंडपंप का पानी उबालकर पीना पड़ता है। कंपोजिट विद्यालय नेवादा में तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, जिनमें एक खराब है। प्रधानाध्यापक सुरेंद्र यादव ने बताया कि सप्लाई का पानी नहीं आता है। विद्यालय में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। विद्यालय में 92 बच्चे पंजीकृत हैं। ग्राम प्रधान से कई बार शिकायत की गई, लेकिन आज तक हैंडपंप सही नहीं कराया गया। इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय नेवादा के प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में 112 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में दो इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, लेकिन दोनों एक साल से खराब हैं।
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50 की आबादी वाले मोहल्ले में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप नहीं
ठेकमा। ब्लॉक के राजेपुर गांव के एक मोहल्ले में रहने वाले करीब 50 लोग आज भी पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। मोहल्ले में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप नहीं लगा है। इसके चलते ग्रामीण छोटे हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। मोहल्ले में तेज बहादुर, रामभरत, भुवन, सोनू-मोनू, पतरू और सिनोद सहित करीब 50 लोग निवास करते हैं। इतनी आबादी होने के बावजूद यहां आज तक इंडिया मार्का हैंडपंप की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने बताया कि छोटे हैंडपंप के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी उन्हें चिंता रहती है और गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और बढ़ जाती है।
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80 प्रतिशत आबादी छोटे हैंडपंपों के भरोसे, इंडिया मार्का हैंडपंप पड़े खराब
फरिहा। स्थानीय बाजार सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में आज भी करीब 80 प्रतिशत लोग पेयजल के लिए छोटे हैंडपंपों पर निर्भर हैं। इन हैंडपंपों की बोरिंग सामान्यतः 40 से 60 फीट तक होती है। बरसात के मौसम में भूजल स्तर ऊपर आने के कारण इनसे निकलने वाला पानी दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। फरिहा चौराहे पर लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंप ग्राम बघौरा-इनामपुर की सीमा में आते हैं। इनमें एक हैंडपंप लंबे समय से बंद पड़ा है, जबकि दूसरा पर्याप्त पानी नहीं दे रहा है। इसी प्रकार ग्राम सुराई स्थित रेलवे स्टेशन के पास लगा इंडिया मार्का हैंडपंप भी वर्षों से खराब पड़ा हुआ है। दक्षिण बस्ती में लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत लंबे समय से नहीं कराई गई है और उनसे दूषित पानी निकल रहा है। वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फरिहा परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहा है।
-- वर्जन
ग्राम पंचायतों में छोटे हैंडपंपों को परित्यक्त करते हुए पहले ही लाल निशान लगवा दिया गया है। छोटे हैंडपंपों का पानी दूषित है। लोग इंडिया मार्का टू हैंडपंप और पेयजल आपूर्ति के पानी का ही उपयोग करें। छोटे हैंडपंपों का पानी कपड़ा धोने आदि में प्रयोग कर सकते हैं। जिन ग्राम पंचायतों में इंडिया मार्का हैंडपंप खराब पड़े हैं, उन्हें बनवाया जाएगा। इसके लिए सभी एडीओ को निर्देश दिए गए हैं। -कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ
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फोटो : 23 से 27 तक
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। ग्राम पंचायतों में हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर पर हर वर्ष 25 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जिले के अधिकांश गांवों में लोग आज भी चार नंबर (छोटे) हैंडपंपों के पानी पर निर्भर हैं।
विडंबना यह है कि विभागीय स्तर पर इन हैंडपंपों के पानी को पहले ही गुणवत्ता के लिहाज से अनुपयुक्त मानते हुए इन्हें परित्यक्त करने की बात कही जा चुकी है, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही है।
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बरसात के मौसम में भूजल स्तर ऊपर आने से छोटे हैंडपंपों से निकलने वाले पानी के दूषित होने का खतरा और बढ़ जाता है। इसके बावजूद कई गांवों में बड़े इंडिया मार्का हैंडपंप खराब पड़े हैं या उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है।
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ऐसे में ग्रामीण मजबूरी में छोटे हैंडपंपों का पानी पीने को विवश हैं। जिला पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले की 1810 ग्राम पंचायतों में 56,000 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं।
मेंहनगर विकास खंड के ठोठिया गांव की घटना ने इस समस्या को फिर उजागर कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, चार नंबर हैंडपंप का पानी पीने के बाद एक दर्जन से अधिक परिवारों के लोग बीमार पड़ गए।
इस दौरान एक युवती की मौत भी हो गई, जबकि कई अन्य लोगों का इलाज चल रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग बीमारी के कारणों की जांच कर रहा है, लेकिन घटना के बाद पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर खराब हैंडपंपों की मरम्मत, रिबोर और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
ब्लॉक मुख्यालय की बाजार में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप नहीं, दूषित पानी दे रहे छोटे हैंडपंप
पवई। ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद पवई बाजार में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। बाजार में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप उपलब्ध नहीं होने से दुकानदारों, राहगीरों और क्षेत्र से प्रतिदिन आने वाले करीब 1500 लोगों को मजबूरी में छोटे हैंडपंपों का पानी पीना पड़ रहा है। पवई बाजार में नौ स्थानों पर छोटे हैंडपंप लगे हैं, जिनका पानी ही लोगों के लिए पेयजल का मुख्य साधन बना हुआ है। ब्लॉक क्षेत्र की कछरा, लग्गुपुर, जल्दीपुर, भीमलपुर, मिल्कीपुर, रामनगर, प्रतापपुर, जमुहट, अलीनगर, रामपुर, बस्ती आदि ग्राम पंचायतों का भी यही हाल है।
छोटे हैंडपंप का पानी उबालकर पी रहे ग्रामीण
महाराजगंज। ब्लॉक की ग्राम पंचायत नेवादा गांव में इंडिया मार्का हैंडपंप से दूषित पानी आ रहा है। कई बार ग्राम पंचायत को सूचना दिए जाने के बावजूद अभी तक उसे बनवाया नहीं जा सका। गांव निवासी जब्बर सिंह ने बताया कि इंडिया मार्का हैंडपंप के दूषित पानी देने के कारण छोटे हैंडपंप का पानी उबालकर पीना पड़ता है। कंपोजिट विद्यालय नेवादा में तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, जिनमें एक खराब है। प्रधानाध्यापक सुरेंद्र यादव ने बताया कि सप्लाई का पानी नहीं आता है। विद्यालय में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। विद्यालय में 92 बच्चे पंजीकृत हैं। ग्राम प्रधान से कई बार शिकायत की गई, लेकिन आज तक हैंडपंप सही नहीं कराया गया। इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय नेवादा के प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में 112 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में दो इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, लेकिन दोनों एक साल से खराब हैं।
50 की आबादी वाले मोहल्ले में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप नहीं
ठेकमा। ब्लॉक के राजेपुर गांव के एक मोहल्ले में रहने वाले करीब 50 लोग आज भी पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। मोहल्ले में एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप नहीं लगा है। इसके चलते ग्रामीण छोटे हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। मोहल्ले में तेज बहादुर, रामभरत, भुवन, सोनू-मोनू, पतरू और सिनोद सहित करीब 50 लोग निवास करते हैं। इतनी आबादी होने के बावजूद यहां आज तक इंडिया मार्का हैंडपंप की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने बताया कि छोटे हैंडपंप के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी उन्हें चिंता रहती है और गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और बढ़ जाती है।
80 प्रतिशत आबादी छोटे हैंडपंपों के भरोसे, इंडिया मार्का हैंडपंप पड़े खराब
फरिहा। स्थानीय बाजार सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में आज भी करीब 80 प्रतिशत लोग पेयजल के लिए छोटे हैंडपंपों पर निर्भर हैं। इन हैंडपंपों की बोरिंग सामान्यतः 40 से 60 फीट तक होती है। बरसात के मौसम में भूजल स्तर ऊपर आने के कारण इनसे निकलने वाला पानी दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। फरिहा चौराहे पर लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंप ग्राम बघौरा-इनामपुर की सीमा में आते हैं। इनमें एक हैंडपंप लंबे समय से बंद पड़ा है, जबकि दूसरा पर्याप्त पानी नहीं दे रहा है। इसी प्रकार ग्राम सुराई स्थित रेलवे स्टेशन के पास लगा इंडिया मार्का हैंडपंप भी वर्षों से खराब पड़ा हुआ है। दक्षिण बस्ती में लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत लंबे समय से नहीं कराई गई है और उनसे दूषित पानी निकल रहा है। वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फरिहा परिसर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहा है।
ग्राम पंचायतों में छोटे हैंडपंपों को परित्यक्त करते हुए पहले ही लाल निशान लगवा दिया गया है। छोटे हैंडपंपों का पानी दूषित है। लोग इंडिया मार्का टू हैंडपंप और पेयजल आपूर्ति के पानी का ही उपयोग करें। छोटे हैंडपंपों का पानी कपड़ा धोने आदि में प्रयोग कर सकते हैं। जिन ग्राम पंचायतों में इंडिया मार्का हैंडपंप खराब पड़े हैं, उन्हें बनवाया जाएगा। इसके लिए सभी एडीओ को निर्देश दिए गए हैं। -कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ