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सलेम ने दिखाया अपराध से चकाचौंध का रास्ता

Thu, 07 Sep 2017 11:33 PM IST
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला Updated Thu, 07 Sep 2017 11:33 PM IST
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Salem shows the way from the crime to the glare
अबू सलेम - फोटो : अमर उजाला
    
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आजमगढ़। सरायमीर कस्बे के पठान टोला मुहल्ला निवासी अधिवक्ता अब्दुल कयूम के दूसरे नंबर के पुत्र अबू सलेम ने अपने कस्बे को हाईटेक बना दिया। आज भी वहां वे सभी विदेशी सामान मिलते हैं, जो अन्य किसी बड़े शहर में नहीं मिल पाएंगे। 1991 में उसकी मुलाकात दाउद इब्राहिम कास्कर से हुई।

दाउद से हाथ मिलाने के बाद सलेम न केवल फिल्म नगरी पर राज करने लगा, बल्कि रंगदारी वसूलने के लिए आजमगढ़ से लड़कों को मुंबई ले जाकर उनसे हत्या करवाने लगा। बदले में इन लड़कों को अच्छी खासी रकम मिलती थी। सलेम के संपर्क में एक दो नहीं बल्कि कइयों के नाम जुड़े हैं।  
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अबू सलेम के बड़े भाई अबू हाकिम अपने परिवार के साथ सरायमीर में ही रहते हैं। तीसरे नंबर का अबू जैश और छोटा एजाज लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलिंग करते हैं। दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। पिता के अधिवक्ता होने की वजह से सलेम को प्राथमिक स्तर पर अच्छी तालीम मिली।
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वह मदरसा मदरसतुस्लाह में पढ़ा है लेकिन कम उम्र में पिता की मौत होने के कारण 14 वर्ष की उम्र में ही सरायमीर में गैराज पर काम करने लगा। अधिक रुपये कमाने के लालच में 1984 में अपने मित्र मो. समी के साथ मुंबई चला गया। वहां जोगेश्वरी में एक रिश्तेदार के यहां रहने लगा।1986 में अंधेरी के एक शॉपिंग सेंटर में इलेक्ट्रानिक सामान की दूकान खोली।

यहीं से वह सोने-चांदी की स्मगलिंग करने लगा।
1991 में दाउद के ध्रुव विरोधी अरुण गवली ने दाउद के रिश्तेदार की हत्या कर दी। उसी के अंतिम संस्कार में अबू सलेम और दाऊद की मुलाकात हुई और दाऊद ने सलेम को फिल्म नगरी संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी। सलेम फिल्मों में काम करने वाले हीरो-हीरोइनों को धमकी देकर उनसे धन उगाही करता था।

जो रुपये देने में आनाकानी करते, आजमगढ़ से अधिक कमाई का ख्वाब दिखाकर मुंबई ले गए नए लड़कों से उनकी हत्या करवा देता था। नया शूटर होने की वजह से मुंबई पुलिस उन्हें पहचान नहीं पाती थी। युवक वहां वारदातों को अंजाम देकर घर चले आते और सरायमीर में मुंबई के जरिए खाड़ी देशों से लाए गए महंगे सामानों का दूकान शुरू कर देते थे।

गुलशन की हत्या के बाद खुला राज
सलेम का जरायम की दुनिया में नाम और शोहरत देखने के बाद कई युवक उसके नक्शेकदम पर चलने लगे। हालांकि सलेम के इस राज का खुलासा 1997 में टी-सीरीज कैसेट्स कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की हत्या में शामिल पकड़े गए शूटरों के बाद हुआ। दरअसल, शूटर के पास से जो तमंचा बरामद हुआ था, उस पर मेड इन बम्हौर लिखा था।

पहले तो सुरक्षा एजेंसी विश्व के नक्शे में इस देश का नाम खोजने में लगी रही। पता नहीं चलने शूटरों से पूछताछ पर पता चला कि बम्हौर आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र का एक गांव है, जहां अवैध शस्त्र बनाने की फैक्ट्री है। वहां से अपराधी हथियार खरीदकर घटनाओं को अंजाम देते हैं।  


चकाचौंध में फंस गए कई युवक
सलेम के नक्शे कदम पर चलते हुए समुदाय के कई लड़कों ने न केवल जरायम की दुनिया में कदम रख लिया, बल्कि देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल हो गए। यह सभी युवक गुपचुप तरीके से अपने मिशन को अंजाम दे रहे थे। 2007 में दिल्ली के बाटला एनकाउंटर में सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव निवासी कुछ संदिग्ध मारे जाने और कई के फरार हो जाने के बाद यह खुलासा हुआ कि सलेम का सरायमीर क्षेत्र कितना हाईटेक हो चुका है।
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