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जालसाजी कर हड़प ली जमीन, केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो, आजमगढ़
Updated Tue, 23 May 2017 11:37 PM IST
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जालसाजी कर दूसरे के भूखंड को किसी और के नाम दर्ज कराने के मामले का खुलासा हुआ है। ऐसा करने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ अपर आयुक्त प्रशासन उमाकांत त्रिपाठी ने सिधारी थाने में केस दर्ज कराया है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने मंडलायुक्त कार्यालय के रजिस्टर के पन्ने को फाड़ने उसकी जगह कूटरचित पन्ना लगाकर जालसाजी की गई है। सिधारी थाना पुलिस ने अपर आयुक्त की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया। इस संबंध में अपर आयुक्त प्रशासन उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा तहसीलों में फर्जी परवाना लगाकर अमल दरामद कराई गई थी। पहले दो मामले एक आजमगढ़ और एक मऊ जनपद में सामने आया।
संदेह होने पर जब मामले की जांच कराई गई तो दोनों मामलों में जिन लोगों की जमीन दूसरे के नाम पर अमल दरामद कराई गई थी, उन लोगों ने बताया कि उनकी जमीन पर कोई मुकदमा नहीं चल रहा है। इसके बाद जब संदेह सही साबित हुआ तो इसकी और जांच की गई। जांच में कुल 22 मामले प्रकाश में आए। जिसमें 10 मामले आजमगढ़ और 12 मामले मऊ में जनपद के थे।
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मिसिलबंद रजिस्टर की जांच में पाया गया कि 2006-2007 में इसके पन्नों को फाड़कर दूसरे पन्ने जोड़े गए हैं। इसमें किसी जमीन को मुकदमे में दिखाकर उसे निस्तारित दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय लोगों की मिलीभगत से ही कुछ लोगों द्वारा यह कार्य किया गया है। जिसकी जांच होनी जरूरी है।
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उन्होंने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने मंडलायुक्त कार्यालय के रजिस्टर के पन्ने को फाड़ने उसकी जगह कूटरचित पन्ना लगाकर जालसाजी की गई है। सिधारी थाना पुलिस ने अपर आयुक्त की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया। इस संबंध में अपर आयुक्त प्रशासन उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा तहसीलों में फर्जी परवाना लगाकर अमल दरामद कराई गई थी। पहले दो मामले एक आजमगढ़ और एक मऊ जनपद में सामने आया।
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संदेह होने पर जब मामले की जांच कराई गई तो दोनों मामलों में जिन लोगों की जमीन दूसरे के नाम पर अमल दरामद कराई गई थी, उन लोगों ने बताया कि उनकी जमीन पर कोई मुकदमा नहीं चल रहा है। इसके बाद जब संदेह सही साबित हुआ तो इसकी और जांच की गई। जांच में कुल 22 मामले प्रकाश में आए। जिसमें 10 मामले आजमगढ़ और 12 मामले मऊ में जनपद के थे।
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मिसिलबंद रजिस्टर की जांच में पाया गया कि 2006-2007 में इसके पन्नों को फाड़कर दूसरे पन्ने जोड़े गए हैं। इसमें किसी जमीन को मुकदमे में दिखाकर उसे निस्तारित दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय लोगों की मिलीभगत से ही कुछ लोगों द्वारा यह कार्य किया गया है। जिसकी जांच होनी जरूरी है।