{"_id":"5be86586bdec2269b4446101","slug":"71541956998-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीओसिटी और जेलर को सौंपी गई जांच","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सीओसिटी और जेलर को सौंपी गई जांच
Updated Sun, 11 Nov 2018 11:01 PM IST
विज्ञापन
आजमगढ़। जेल में दीपावली का जश्न मनाने का फोटो वाट्सऐप के जरिए बाहर भेजने का मामला प्रकाश में आने से एक बात तो साबित हो गया कि तमाम कोशिशों के बावजूद जेल के भीतर मोबाइल चलाने पर रोक नहीं लग सकती। उधर, मामला संज्ञान में आने पर एसपी ने जहां बदमाश के ग्रुप में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीओसिटी को जांच सौंपी है। वहीं, जेल के भीतर मोबाइल के चलने की जांच जेलर को सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी है। दोनों अधिकारी रविवार को अपने-अपने स्तर से मामले की जांच करने में जुटे हुए हैं। हालांकि देर शाम तक जांच पूरी नहीं हो सकी थी।
वैसे तो जेल के भीतर मोबाइल चलने की परंपरा काफी पुरानी है। जेल सूत्रों के मुताबिक जेल के भीतर निरुद्ध कैदी बंदी रक्षकों की मिली भगत से मोबाइल चलाते हैं। जेल में मोबाइल चलाने पर रोक लगाने के लिए करोड़ो रुपये खर्च कर जैमर लगवाया गया। बावजूद इसके मोबाइल का चलन नहीं रुका। जबकि जेल प्रशासन भीतर एक भी मोबाइल न चलाने का दावा करता है। जेल अधिकारियों के दावों की पोल बीते वर्ष दिसंबर माह में उस समय खुल गई जब जेल के भीतर निरुद्ध बदमाश की मोबाइल छीनने पर बदमाश ने अपने गुर्गों को भेजकर बंदी रक्षक मानसिंह को गोली मरवा दिया। हालांकि सघन इलाज के बाद मानसिंह की जान बच सकी। जेल कर्मी पर हमला के बाद अधिकारियों ने जेल के भीतर मोबाइल चलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दिया था लेकिन बाद में पुन: मोबाइल चलने लगी। अब तक जेल के भीतर से कई बार बदमाशों द्वारा धमकी देने का मामला सामने आया लेकिन कोई पर्याप्त साक्ष्य और सबूत नहीं मिल सका। दीपावली के दिन जेल के भीतर जश्न का सच सामने आने पर पुलिस और जेल के अधिकारियों की आंखें खुल गई हैं। एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जेल में मोबाइल चलाने वाले अपराधी के ग्रुप में कौन-कौन से लोग शामिल हैं। इसकी जांच सीओसिटी को सौंपी गई है। साथ ही जेल के भीतर के गतिविधियों की जांच कर जेलर से रिपोर्ट मांगी गई है।
विज्ञापन
वैसे तो जेल के भीतर मोबाइल चलने की परंपरा काफी पुरानी है। जेल सूत्रों के मुताबिक जेल के भीतर निरुद्ध कैदी बंदी रक्षकों की मिली भगत से मोबाइल चलाते हैं। जेल में मोबाइल चलाने पर रोक लगाने के लिए करोड़ो रुपये खर्च कर जैमर लगवाया गया। बावजूद इसके मोबाइल का चलन नहीं रुका। जबकि जेल प्रशासन भीतर एक भी मोबाइल न चलाने का दावा करता है। जेल अधिकारियों के दावों की पोल बीते वर्ष दिसंबर माह में उस समय खुल गई जब जेल के भीतर निरुद्ध बदमाश की मोबाइल छीनने पर बदमाश ने अपने गुर्गों को भेजकर बंदी रक्षक मानसिंह को गोली मरवा दिया। हालांकि सघन इलाज के बाद मानसिंह की जान बच सकी। जेल कर्मी पर हमला के बाद अधिकारियों ने जेल के भीतर मोबाइल चलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दिया था लेकिन बाद में पुन: मोबाइल चलने लगी। अब तक जेल के भीतर से कई बार बदमाशों द्वारा धमकी देने का मामला सामने आया लेकिन कोई पर्याप्त साक्ष्य और सबूत नहीं मिल सका। दीपावली के दिन जेल के भीतर जश्न का सच सामने आने पर पुलिस और जेल के अधिकारियों की आंखें खुल गई हैं। एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जेल में मोबाइल चलाने वाले अपराधी के ग्रुप में कौन-कौन से लोग शामिल हैं। इसकी जांच सीओसिटी को सौंपी गई है। साथ ही जेल के भीतर के गतिविधियों की जांच कर जेलर से रिपोर्ट मांगी गई है।
विज्ञापन