{"_id":"5c34ece4bdec2256af3f5b85","slug":"171546972388-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई वजहों से गिर रही थी पुलिस की साख","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। शासन की तरफ से जारी ट्रांसफर लिस्ट में एसपी रविशंकर छवि के स्थानांतरण की सूचना मिलते ही जिले में चर्चाओं का बाजार गरमा गया। कई वजहों से बेहतर काम करने के बावजूद पुलिस की साख गिर रही थी। इससे विभाग और सरकार दोनों की किरकिरी हो रही थी। यदि थोड़े ही बेहतर ढंग से इन घटनाओं को समय रहते सुलझा लिया जाता तो शायद इस प्रकार का धब्बा नहीं लगता। राजनीति दवाब के चलते पुलिस की साख गिरती जा रही थी। वर्ष 2013-14 में बदमाश पुलिस पर हावी थे। जिसका साफ उदाहरण सीओ सिटी के गनर को गोली मारने की घटना से लगाया जा सकता है। सत्ता परिवर्तन के साथ ही कानून व्यवस्था में सुधार पर जोर दिया गया। जिसका परिणाम रहा कि वर्ष 2017 में पुलिस ने ताबड़तोड़ एनकाउंटर कर कइयों को ढेर कर दिया, जबकि कई गोली से घायल हो गए। पुलिस के कामों में भी दिन-ब-दिन सुधार दिखने लगा था। इसी बीच 12 नवंबर को अहरौला थाने की पुलिस ने निर्दोष मो. मकसूद का पशु तस्करी में चालान कर दिया। हालांकि सघन जांच पड़ताल के बाद 13 दिन बाद मकसूद जेल से रिहा हो गया। यह क्रम चल ही रहा था कि रानी की सराय थाना क्षेत्र में फर्जी गैंगरेप की घटना को तूल देते हुए राजनीतिक रूप दे दिया गया। पुलिस की लापरवाही के चलते यह मामला तिल का ताड़ बनता गया। इससे सरकार की भी खूब किरकिरी हुई। इसके अलावा तमाम कोशिशों के बावजूद जेल के भीतर अपराधियों के मोबाइल चलाने पर रोक लगाने में भी पुलिस नाकाम रही। जबकि जेल के भीतर से अपराधी देवगांव और अहरौला बाजार में हत्या की दो घटनाओं को अंजाम दे दिया गया। सूत्रों के मुताबिक रानी की सराय की घटना के खुलासे के बाद हंगामा करने वालों पर सख्त कार्रवाई कर दी गई होती तो शायद पुलिस की साख बच सकती थी। इस हड़ताल में सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ ही प्राइवेट, ग्रामीण व कोऑपरेटिव बैंक कर्मचारी भी शामिल रह
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की ब्रेकिंग अपडेट।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।