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रंजिश में सिपाही को मारी थी गोली
Updated Tue, 23 Jan 2018 11:40 PM IST
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सिधारी थाना क्षेत्र के इटौरा मोड़ स्थित जेल परिसर में बने सरकारी आवास मेें घुसकर सोमवार की रात बाइक सवार बदमाशों ने जिस बंदी रक्षक मानसिंह यादव को गोली मारी थी। उसका मंगलवार को भी शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। उधर जांच पड़ताल में पता चला कि घटना को आपसी रंजिश के चलते अंजाम दिया गया है।
मानसिंह यादव आजमगढ़ जेल में बंदी रक्षक है। वह जेल परिसर में ही बने सरकारी आवास में परिवार के साथ रहता है। परिवार में मानसिंह के अलावा उसकी पत्नी, छोटा बच्चा और भतीजा रहता है। सोमवार को रात करीब साढ़े आठ बजे वह अपने आवास पर मौजूद था। तभी एक लाल रंग की बाइक से दो बदमाश पहुंचे। दरवाजा खुलवा कर सीने में सटाकर गोली मार दी। जेल स्टाफ ने मानसिंह यादव को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। उधर एसपी अजय कुमार साहनी, एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह, सीओसिटी, सीओसदर फोर्स लेकर जेल में पहुंचे। अब तक की जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि बंदी रक्षक अधिक रुपये लेकर बंदियों को जरूरत के सामान उपलब्ध कराते हैं। इसी विवाद में मानसिंह को गोली मरवाई गई है। जेल से छूटे एक बदमाश ने अपने साथी की मदद से यह काम करवाया।
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जेल से चार मोबाइल बरामद
आजमगढ़। सिधारी थाने के इटौरा मोड़ पर स्थित जेल परिसर में सरकारी आवास में घुसकर बंदीरक्षक को गोली मारने की घटना के बाद एसपी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में जेल में पहुंची भारी भरकम पुलिस ने जेल की सघन तलाशी ली। इस दौरान बैरकों से चार मोबाइल और पांच सिमकार्ड बरामद हुआ।
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कोट
जेल कर्मचारियों के आपसी विवाद से इस घटना को अंजाम दिलवाया गया है। आरोपियों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं। - अजय कुमार साहनी
सुरक्षा के प्रति लापरवाही जेल प्रशासन को पड़ी भारी
-बेरोकटोक धड़ल्ले से मोबाइल चला रहे हैं अपराधी
-अब तक नहीें चालू हो सका खराब हुआ कैमरा
अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। सुरक्षा के प्रति लापरवाही के चलते भले ही जेल प्रशासन की कई बार किरकिरी हो चुकी है, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं को लेकर जेल प्रशासन कभी गंभीर नहीं हुआ। लाख चेतावनी के बावजूद जहां अपराधी जेल के भीतर से धड़ल्ले से मोबाइल चला रहे हैं। वहीं मुर्गा, मीट, गुटखा आदि भी धड़ल्ले से भीतर जा रहा है। मोबाइलों पर बैन लगाने के लिए जेल में जैमर लगाने की मंजुरी मिल चुकी है, लेकिन जैमर लगाने का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका। सीसीटीवी कैमरे भी खराब पड़े हैं। यहीं सब लापरवाही सोमवार की रात पुन: जेलकर्मियों पर भारी पड़ गई। जिसका खामियाजा एक बंदी रक्षक को सीने में गोली खाकर चुकानी पड़ी। हालांकि अभी भी बंदी रक्षक का इलाज चल रहा है।
सिधारी थाना क्षेत्र के इटौरा मोड़ स्थित नए अत्याधुनिक जेल में बंदियों को शिफ्ट करने के बाद प्रशासन पूरी तरह से संतुष्ट हो गया कि अब जेल के भीतर से कोई भी गतिविधियां नहीं संचालित होगी। लेकिन इटौरा जेल जाने के बाद प्रशासन का पूरा दाव उल्टा पड़ गया। शहर से करीब छह किलोमीटर दूर इस जेल में निरुद्ध बंदियों की अभी भी जेल से सत्ता चल रही है। प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है। बंदियों को सह देने में जेल के कुछ अधिकारी और कर्मचारियों का भी हाथ है। शायद यही कारण है कि लोग नई जेल में सुरक्षा की दृष्टि से लगे 28 सीसीटीवी कैमरों में से शायद ही कोई चल रहा हो। इसी लापरवाही के चलते 18 अगस्त 2016 को जेल की 22 फुट ऊंची दीवार फांदकर तीन जघन्य हत्यारोपी अपराधी फरार हो गए। इनका अब तक कोई पता नहीं चला। जेल सूत्रों की मानें तो कर्मचारियों की मिली भगत से जेल के भीतर ना केवल मोबाइल का प्रयोग हो रहा। बल्कि मुर्गा, मीट, तंबाकू, गुटखा आदि भी आसानी से मिल जाता है। इसके एवज में कर्मचारी दाम अधिक लेते हैं। पुलिस जेल के भीतर मोबाइल का प्रयोग रोकने का प्रयास करते हुए बीच-बीच में छापेमारी कर बंदियों के पास से मोबाइल जरुर बरामद करती है, लेकिन बाद में अमुक अपराधी दूसरी मोबाइल मंगा लेता है। मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने के लिए करीब दो करोड़ रुपये की लागत से आठ जैमर लागने की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अब तक जैमर नहीं लग सका। यही लापरवाही जेल प्रशासन पर भारी पड़ रहा है। जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने दावा किया कि जेल में बंदियों को किसी भी प्रकार की सहुलियत नहीं दी जाती है। सुरक्षा व्यवस्थाओं को चाक चौबंद किया जा रहा।
आशीष तिवारी
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मानसिंह यादव आजमगढ़ जेल में बंदी रक्षक है। वह जेल परिसर में ही बने सरकारी आवास में परिवार के साथ रहता है। परिवार में मानसिंह के अलावा उसकी पत्नी, छोटा बच्चा और भतीजा रहता है। सोमवार को रात करीब साढ़े आठ बजे वह अपने आवास पर मौजूद था। तभी एक लाल रंग की बाइक से दो बदमाश पहुंचे। दरवाजा खुलवा कर सीने में सटाकर गोली मार दी। जेल स्टाफ ने मानसिंह यादव को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। उधर एसपी अजय कुमार साहनी, एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह, सीओसिटी, सीओसदर फोर्स लेकर जेल में पहुंचे। अब तक की जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि बंदी रक्षक अधिक रुपये लेकर बंदियों को जरूरत के सामान उपलब्ध कराते हैं। इसी विवाद में मानसिंह को गोली मरवाई गई है। जेल से छूटे एक बदमाश ने अपने साथी की मदद से यह काम करवाया।
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जेल से चार मोबाइल बरामद
आजमगढ़। सिधारी थाने के इटौरा मोड़ पर स्थित जेल परिसर में सरकारी आवास में घुसकर बंदीरक्षक को गोली मारने की घटना के बाद एसपी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में जेल में पहुंची भारी भरकम पुलिस ने जेल की सघन तलाशी ली। इस दौरान बैरकों से चार मोबाइल और पांच सिमकार्ड बरामद हुआ।
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कोट
जेल कर्मचारियों के आपसी विवाद से इस घटना को अंजाम दिलवाया गया है। आरोपियों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं। - अजय कुमार साहनी
सुरक्षा के प्रति लापरवाही जेल प्रशासन को पड़ी भारी
-बेरोकटोक धड़ल्ले से मोबाइल चला रहे हैं अपराधी
-अब तक नहीें चालू हो सका खराब हुआ कैमरा
अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। सुरक्षा के प्रति लापरवाही के चलते भले ही जेल प्रशासन की कई बार किरकिरी हो चुकी है, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं को लेकर जेल प्रशासन कभी गंभीर नहीं हुआ। लाख चेतावनी के बावजूद जहां अपराधी जेल के भीतर से धड़ल्ले से मोबाइल चला रहे हैं। वहीं मुर्गा, मीट, गुटखा आदि भी धड़ल्ले से भीतर जा रहा है। मोबाइलों पर बैन लगाने के लिए जेल में जैमर लगाने की मंजुरी मिल चुकी है, लेकिन जैमर लगाने का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका। सीसीटीवी कैमरे भी खराब पड़े हैं। यहीं सब लापरवाही सोमवार की रात पुन: जेलकर्मियों पर भारी पड़ गई। जिसका खामियाजा एक बंदी रक्षक को सीने में गोली खाकर चुकानी पड़ी। हालांकि अभी भी बंदी रक्षक का इलाज चल रहा है।
सिधारी थाना क्षेत्र के इटौरा मोड़ स्थित नए अत्याधुनिक जेल में बंदियों को शिफ्ट करने के बाद प्रशासन पूरी तरह से संतुष्ट हो गया कि अब जेल के भीतर से कोई भी गतिविधियां नहीं संचालित होगी। लेकिन इटौरा जेल जाने के बाद प्रशासन का पूरा दाव उल्टा पड़ गया। शहर से करीब छह किलोमीटर दूर इस जेल में निरुद्ध बंदियों की अभी भी जेल से सत्ता चल रही है। प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है। बंदियों को सह देने में जेल के कुछ अधिकारी और कर्मचारियों का भी हाथ है। शायद यही कारण है कि लोग नई जेल में सुरक्षा की दृष्टि से लगे 28 सीसीटीवी कैमरों में से शायद ही कोई चल रहा हो। इसी लापरवाही के चलते 18 अगस्त 2016 को जेल की 22 फुट ऊंची दीवार फांदकर तीन जघन्य हत्यारोपी अपराधी फरार हो गए। इनका अब तक कोई पता नहीं चला। जेल सूत्रों की मानें तो कर्मचारियों की मिली भगत से जेल के भीतर ना केवल मोबाइल का प्रयोग हो रहा। बल्कि मुर्गा, मीट, तंबाकू, गुटखा आदि भी आसानी से मिल जाता है। इसके एवज में कर्मचारी दाम अधिक लेते हैं। पुलिस जेल के भीतर मोबाइल का प्रयोग रोकने का प्रयास करते हुए बीच-बीच में छापेमारी कर बंदियों के पास से मोबाइल जरुर बरामद करती है, लेकिन बाद में अमुक अपराधी दूसरी मोबाइल मंगा लेता है। मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने के लिए करीब दो करोड़ रुपये की लागत से आठ जैमर लागने की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अब तक जैमर नहीं लग सका। यही लापरवाही जेल प्रशासन पर भारी पड़ रहा है। जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने दावा किया कि जेल में बंदियों को किसी भी प्रकार की सहुलियत नहीं दी जाती है। सुरक्षा व्यवस्थाओं को चाक चौबंद किया जा रहा।
आशीष तिवारी