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सोशल साइटों से फैलाया जा रहा भय और दे रहे संदेश

Sat, 17 Feb 2018 12:20 AM IST
Updated Sat, 17 Feb 2018 12:20 AM IST
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सोशल साइटों से फैलाया जा रहा भय और दे रहे संदेश
आजमगढ़। देश की तमाम एजेंसियां भले ही आजमगढ़ के रहने वाले संदिग्धों को आतंकी घटनाओं में संलिप्त पाए जाने पर गिरफ्तार कर रही हैं। लेकिन उनके घर और क्षेत्र के लोग इन्हें आतंकी नहीं मान रहे, बल्कि उन्हें फंसाने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं देश विरोधी गतिधियों में शामिल कुछ लोग सोशल साइटों के जरिए आईएसआई जैसे खूंखार संगठनों द्वारा किए गए कृत्य का वीडियो वायरल कर लोगों में भय फैला रहे। जबकि कुछ अन्य मोबाइल पर सोशल साइटों के जरिए अपना संदेश देकर लोगों को बरगलाने में जुटे हैं। खुफिया एजेंसियों से मिले इस प्रकार के इनपुट के बाद पुलिस ऐसे लोगों पर नजर रख रही है।
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खुफिया एजेंसियों के मुताबिक सरायमीर कस्बे के रहने वाले अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम की वजह से जिले का नाम भले ही सुर्खियों में रहा, लेकिन वर्ष 2008 में दिल्ली के बटला एनकाउंटर के बाद देश के अन्य बड़े महानगरों में हुए सिलसिलेवार बम धमाके में सरायमीर थाने के संजरपुर, नंदाव, बिलरियागंज के नसीरपुर और आजमगढ़ शहर के कई युवकों का नाम आने पर जिला और सुर्खियों में आ गया। सुरक्षा एजेंसियां जहां इन्हें आतंकी मानते हुए तलाश कर रही, वहीं वर्ष 2009 में इनके बचाव में मौलाना आमिर रशादी ने राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल का गठन कर दिया। मौलानाओं के बचाव में हुंकार भरने पर राजनीति गरमाई और वोट बैंक के चक्कर में मामला दब गया। इसका फायदा उठाते हुए फरार संदिग्धों ने अपना दायरा बढ़ाते हुए देश के विरोध में काम करने वाले पाकिस्तान सहित अन्य देशों के आतंकी संगठनों से हाथ मिलाकर उनके लिए काम करने लगे। सुरक्षा एजेंसियों ने इसकी पहले ही पुष्टि कर दी थी, लेकिन सबूत के अभाव में मामला ठंडा पड़ा था। हालांकि पुलिस इन पर लगातार नजर रखते हुए बीच-बीच में सुराग मिलने पर गिरफ्तार करती रही। पहले तो आमिर रशादी अपने संगठन के जरिए इनका बचाव करते थे, लेकिन वर्ष 2017 के अंत में स्वयं आमिर रशादी अपनी बहू की हत्या के आरोप में फंस गए। ऐसे में इनकी आवाज बुलंद करने वाला कोई नहीं रहा। ऐसे में इन संदिग्धों के समर्थक सोशल साइटों के जरिए जहां आईएसआईएस, आईएस जैसे खुंखार संगठनों का खतरनाक वीडियो वायरल कर लोगों में भय और दहशत फैला रहे। वहीं अपने लोगों को इकट्ठा करने और उनका समर्थन हासिल करने के लिए संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
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खुफिया विभाग, सर्विलांस सेल सहित अन्य एजेंसियों के माध्यम से ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। कुछ भय फैलाने जैसे वीडियो मिले हैं। उसको वायरल करने वाले की तलाश की जा रही है।
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- अजय कुमार साहनी, एसपी
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