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सीबीआई की सीलबंद चार्जशीट से बढ़ी हलचल
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Wed, 06 Apr 2016 12:11 AM IST
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सीपू हत्याकांड
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पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई टीम की ओर से सोमवार को गैंगस्टर कोर्ट में दाखिल चार्जशीट से असमंजस की स्थिति है। क्योंकि चार्जशीट सील पैक है, इस कारण यह बता पाना असंभव है कि इसमें किसका नाम बढ़ा या घटा है। जिला शासकीय अधिवक्ता की मानें तो कोर्ट ने आरोपपत्र ले लिया है लेकिन उसे अलग से संज्ञान में नहीं लेगी। पुलिस के आरोप पत्र में इसे जोड़कर ट्रायल की कार्रवाई की जाएगी। सीबीआई की चार्जशीट से हलचल बढ़ गई है।
बताते चलें 19 जुलाई, 2013 को बाइक सवार बदमाशों ने पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की गोली मार कर हत्या कर दी थी। मामले में उनके भाई संतोष सिंह टीपू ने जीयनपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीबीआई से जांच की मांग करते हुए सीपू के घरवाले और समर्थक आंदोलित हो गए थे। इस पर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति की। जिस समय सीबीआई मामले को हाथ में ली, उस समय तक पुलिस की विवेचना लगभग पूरी हो चुकी थी।
पुलिस कुंटू सिंह सहित 11 लोगों को आरोपी बनाते हुए 23 अक्तूबर 2013 को आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत कर चुकी थी। सीबीआई केस को हाथ में लेने के बाद पुलिस पकड़े गए प्रकाश उर्फ शिवप्रकाश को आरोपी बनाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल क्री।
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इसके बाद लगातार 29 माह विवेचना के बाद सोमवार को गैंगस्टर कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित की। बताया जाता है तीन सदस्यों की टीम में अधिवक्ता सीबीआई, एक इंस्पेक्टर और एक उपनिरीक्षक रैंक के अधिकारी चार्जशीट लेकर आए थे। आरोप पत्र को पहले सीजेएम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया लेकिन उन्होंने मामले को सक्षम न्यायालय में दाखिल करने की टिप्पणी कर खारिज कर दिया। इस पर टीम ने गैंगस्टर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
जहां मामले का ट्रायल पहले से चल रहा है। पूर्व विधायक के मामले की पैरवी करने वाले अधिवक्ता वंशगोपाल सिंह ने बताया की सीबीआई अधिवक्ता ने कोर्ट नंबर आठ के सत्र न्यायाधीश को आरोप पत्र के बारे में बताया। इसके बाद कोर्ट ने मामले को स्वीकार तो किया, लेकिन इस पर सुनवाई 28 अप्रैल को होने की संभावना है। ऐसे में बताना मुश्किल है कि सीबीआई की चार्जशीट में किसी का नाम बढ़ा है या नहीं। अनुमान लगाया जा रहा है सीबीआई ने पुलिस के द्वारा बनाए गए आरोपियों को ही आरोपित किया है। दो नाम शरण दाताओं के रूप में बढ़ सकते हैं।
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बताते चलें 19 जुलाई, 2013 को बाइक सवार बदमाशों ने पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की गोली मार कर हत्या कर दी थी। मामले में उनके भाई संतोष सिंह टीपू ने जीयनपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीबीआई से जांच की मांग करते हुए सीपू के घरवाले और समर्थक आंदोलित हो गए थे। इस पर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति की। जिस समय सीबीआई मामले को हाथ में ली, उस समय तक पुलिस की विवेचना लगभग पूरी हो चुकी थी।
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पुलिस कुंटू सिंह सहित 11 लोगों को आरोपी बनाते हुए 23 अक्तूबर 2013 को आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत कर चुकी थी। सीबीआई केस को हाथ में लेने के बाद पुलिस पकड़े गए प्रकाश उर्फ शिवप्रकाश को आरोपी बनाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल क्री।
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इसके बाद लगातार 29 माह विवेचना के बाद सोमवार को गैंगस्टर कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित की। बताया जाता है तीन सदस्यों की टीम में अधिवक्ता सीबीआई, एक इंस्पेक्टर और एक उपनिरीक्षक रैंक के अधिकारी चार्जशीट लेकर आए थे। आरोप पत्र को पहले सीजेएम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया लेकिन उन्होंने मामले को सक्षम न्यायालय में दाखिल करने की टिप्पणी कर खारिज कर दिया। इस पर टीम ने गैंगस्टर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
जहां मामले का ट्रायल पहले से चल रहा है। पूर्व विधायक के मामले की पैरवी करने वाले अधिवक्ता वंशगोपाल सिंह ने बताया की सीबीआई अधिवक्ता ने कोर्ट नंबर आठ के सत्र न्यायाधीश को आरोप पत्र के बारे में बताया। इसके बाद कोर्ट ने मामले को स्वीकार तो किया, लेकिन इस पर सुनवाई 28 अप्रैल को होने की संभावना है। ऐसे में बताना मुश्किल है कि सीबीआई की चार्जशीट में किसी का नाम बढ़ा है या नहीं। अनुमान लगाया जा रहा है सीबीआई ने पुलिस के द्वारा बनाए गए आरोपियों को ही आरोपित किया है। दो नाम शरण दाताओं के रूप में बढ़ सकते हैं।