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शिक्षा के नाम पर नहीं चलेगा व्यापार
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 11 Apr 2015 12:04 AM IST
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अभिभावकों की शिकायत पर डीएम ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में निजी स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ बैठक की। उन्होंने प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को उच्च न्यायालय द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन करने का निर्देश दिया और कहा कि हर वर्ष कक्षाओं में किताबें नहीं बदली जा सकती हैं।
डीएम ने कहा कि गाइड लाइन में निर्देशित किया गया है कि जिला स्तर पर कमेटी गठित की जाए। कमेटी जो निर्णय लेगी, सभी विद्यालयों को उसका पालन करना होगा। विद्यालयों द्वारा मनमाने तौर पर फीस बढ़ा दी जाती है जो गलत है। यदि विद्यालय द्वारा फीस बढ़ाई जाती है तो कमेटी के संज्ञान में देना जरूरी है।
निर्देश दिया कि स्कूल प्रबंधन को फीस की रसीद देनी जरूरी है। तीन माह और छह माह की फीस एक साथ लेना जरूरी नहीं। प्रत्येक माह फीस जमा की जानी चाहिए। डीएम ने बताया कि जब सीबीएसई बोर्ड किताबें बदले, तभी स्कूल किताब बदल सकता है। कापी, किताब और यूनिफार्म अभिभावक किसी भी दूकान से ले सकते हैं।
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उन्हें एक दूकान से लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। डीएम ने कहा कि स्कूलों द्वारा जो बसें चलाई जाती है, उसका फिटनेस होना जरूरी है। 15 साल पुरानी बसें स्कूल द्वारा नहीं चलाई जा सकती। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक केपी सिंह यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार आदि उपस्थित थे।
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डीएम ने कहा कि गाइड लाइन में निर्देशित किया गया है कि जिला स्तर पर कमेटी गठित की जाए। कमेटी जो निर्णय लेगी, सभी विद्यालयों को उसका पालन करना होगा। विद्यालयों द्वारा मनमाने तौर पर फीस बढ़ा दी जाती है जो गलत है। यदि विद्यालय द्वारा फीस बढ़ाई जाती है तो कमेटी के संज्ञान में देना जरूरी है।
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निर्देश दिया कि स्कूल प्रबंधन को फीस की रसीद देनी जरूरी है। तीन माह और छह माह की फीस एक साथ लेना जरूरी नहीं। प्रत्येक माह फीस जमा की जानी चाहिए। डीएम ने बताया कि जब सीबीएसई बोर्ड किताबें बदले, तभी स्कूल किताब बदल सकता है। कापी, किताब और यूनिफार्म अभिभावक किसी भी दूकान से ले सकते हैं।
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उन्हें एक दूकान से लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। डीएम ने कहा कि स्कूलों द्वारा जो बसें चलाई जाती है, उसका फिटनेस होना जरूरी है। 15 साल पुरानी बसें स्कूल द्वारा नहीं चलाई जा सकती। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक केपी सिंह यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार आदि उपस्थित थे।