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Azamgarh News: रामेश्वर स्थापना के साथ शुरू हुआ सेतु निर्माण
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08 माहुल में रामलीला मंचन के क्रम में अपनी प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद
आजमगढ़। श्रीरामलीला समिति पुरानी कोतवाली के तत्वावधान में चल रही श्री राम लीला में मंगलवार की रात कलाकारों ने लंका दहन और रामेश्वर स्थापना का मंचन किया। लंका दहन प्रसंग में हनुमान जी जब सीता माता की खोज में लंका पहुंचे, तो सबसे पहले अशोक वाटिका में फल खाते हुए और पेड़ों को उखाड़ते हुए दिखाई दिए। इसकी सूचना पाकर मेघनाद वहां पहुंचा और दोनों के बीच युद्ध हुआ। मेघनाद ने हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण दरबार में प्रस्तुत किया। रावण ने उनकी पूछ में आग लगाने का आदेश दिया। आग लगते ही हनुमान जी आकाश में उड़कर पूरी लंका को जला देते हैं। इस प्रसंग के साथ ही जय श्रीराम के नारों से पूरा मैदान गूंज उठा। इसके बाद रामेश्वर स्थापना का मंचन हुआ। कथा के अनुसार भगवान श्रीराम समुद्र किनारे पहुंचकर मार्ग की प्रार्थना करते हैं।
शिव धनुष टूटते ही जय श्रीराम के लगे जयकारे
ठेकमा। रामलीला समिति गंभीरपुर में मंगलवार की रात आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और राम-सीता विवाह का जीवंत मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला मंचन के क्रम में राजा जनक ने यह शर्त रखी थी कि जो भी शिव धनुष पर प्रत्यांचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह कर सकेगा। अनेक राजा उपस्थित हुए, परंतु कोई भी शिव धनुष को भंग न कर सका। इस पर राजा जनक निराश होकर कह उठे कि शायद सीता का विवाह इस जन्म में संभव नहीं। उनकी बात सुनकर लक्ष्मण कुपित हो उठे और तीखे शब्द बोले। महर्षि विश्वामित्र ने लक्ष्मण को शांत किया और श्रीराम को आदेश दिया। श्रीराम ने सहजता से शिव धनुष तोड़ दिया। धनुष टूटते ही पूरा पंडाल जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके उपरांत सीता जी ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी।
सीता हरण और राम-सबरी संवाद ने जीता दर्शकों का दिल
मेजवां। फूलपुर रामलीला मैदान में मंगलवार की रात आयोजित श्री रामलीला के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में सीता हरण एवं राम-सबरी संवाद का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। राम-सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन किया गया। मंचन में दिखाया गया कि कैसे शूर्पणखा का नाक काटे जाने के बाद वह अपने भाई रावण के दरबार पहुंचती है और रावण आग-बबूला हो उठता है। साधु का वेश धारण कर रावण सीता जी का हरण करता है। इसके बाद रावण और जटायू के बीच युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। वहीं, राम एवं लक्ष्मण सीता जी की खोज में वन में भटकते हुए सबरी की कुटी तक पहुंचते हैं। श्रीराम को देखते ही सबरी हर्षित होकर उनका स्वागत करती हैं और आदर-सत्कार करती हैं। राम-सबरी संवाद ने दर्शकों के दिलों पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
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सीता की खोज में निकले हनुमानजी ने फूंकी सोने की लंका
अंबारी। फूलपुर तहसील क्षेत्र के ओरिल बाजार, माहुल और डीहपुर में रामलीला के मंचन में दर्शकों ने विभिन्न प्रसंगों का आनंद लिया। ओरिल बाजार में हनुमानजी द्वारा लंका दहन का दृश्य प्रस्तुत किया गया तो पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। माहुल में ताड़का के साथ सुबाहु और मारीच वध का मंचन हुआ, जबकि डीहपुर में राम वनगमन की लीला देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। ओरिल बाजार की रामलीला में कलाकारों ने राम-सुग्रीव मित्रता का प्रसंग जीवंत किया। सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमानजी ने अशोक वाटिका उजाड़ दी। इसी दौरान रावण का पुत्र अक्षय कुमार युद्ध में मारा गया। सूचना पाकर मेघनाद ने पहुंचकर हनुमानजी पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। हनुमानजी स्वेच्छा से इसे स्वीकार कर रावण के दरबार में प्रस्तुत हुए। रावण के आदेश पर हनुमानजी की पूंछ में आग लगा दी गई, जिसके बाद उन्होंने सोने की लंका को जला डाला। उधर, माहुल की रामलीला में गुरु विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए पहुंचे श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा ताड़का, सुबाहु और मारीच वध का रोमांचक मंचन किया गया।
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शिव धनुष टूटते ही जय श्रीराम के लगे जयकारे
ठेकमा। रामलीला समिति गंभीरपुर में मंगलवार की रात आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और राम-सीता विवाह का जीवंत मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला मंचन के क्रम में राजा जनक ने यह शर्त रखी थी कि जो भी शिव धनुष पर प्रत्यांचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह कर सकेगा। अनेक राजा उपस्थित हुए, परंतु कोई भी शिव धनुष को भंग न कर सका। इस पर राजा जनक निराश होकर कह उठे कि शायद सीता का विवाह इस जन्म में संभव नहीं। उनकी बात सुनकर लक्ष्मण कुपित हो उठे और तीखे शब्द बोले। महर्षि विश्वामित्र ने लक्ष्मण को शांत किया और श्रीराम को आदेश दिया। श्रीराम ने सहजता से शिव धनुष तोड़ दिया। धनुष टूटते ही पूरा पंडाल जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके उपरांत सीता जी ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी।
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सीता हरण और राम-सबरी संवाद ने जीता दर्शकों का दिल
मेजवां। फूलपुर रामलीला मैदान में मंगलवार की रात आयोजित श्री रामलीला के मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में सीता हरण एवं राम-सबरी संवाद का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। राम-सुग्रीव मित्रता की लीला का मंचन किया गया। मंचन में दिखाया गया कि कैसे शूर्पणखा का नाक काटे जाने के बाद वह अपने भाई रावण के दरबार पहुंचती है और रावण आग-बबूला हो उठता है। साधु का वेश धारण कर रावण सीता जी का हरण करता है। इसके बाद रावण और जटायू के बीच युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। वहीं, राम एवं लक्ष्मण सीता जी की खोज में वन में भटकते हुए सबरी की कुटी तक पहुंचते हैं। श्रीराम को देखते ही सबरी हर्षित होकर उनका स्वागत करती हैं और आदर-सत्कार करती हैं। राम-सबरी संवाद ने दर्शकों के दिलों पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
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सीता की खोज में निकले हनुमानजी ने फूंकी सोने की लंका
अंबारी। फूलपुर तहसील क्षेत्र के ओरिल बाजार, माहुल और डीहपुर में रामलीला के मंचन में दर्शकों ने विभिन्न प्रसंगों का आनंद लिया। ओरिल बाजार में हनुमानजी द्वारा लंका दहन का दृश्य प्रस्तुत किया गया तो पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। माहुल में ताड़का के साथ सुबाहु और मारीच वध का मंचन हुआ, जबकि डीहपुर में राम वनगमन की लीला देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। ओरिल बाजार की रामलीला में कलाकारों ने राम-सुग्रीव मित्रता का प्रसंग जीवंत किया। सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमानजी ने अशोक वाटिका उजाड़ दी। इसी दौरान रावण का पुत्र अक्षय कुमार युद्ध में मारा गया। सूचना पाकर मेघनाद ने पहुंचकर हनुमानजी पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। हनुमानजी स्वेच्छा से इसे स्वीकार कर रावण के दरबार में प्रस्तुत हुए। रावण के आदेश पर हनुमानजी की पूंछ में आग लगा दी गई, जिसके बाद उन्होंने सोने की लंका को जला डाला। उधर, माहुल की रामलीला में गुरु विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए पहुंचे श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा ताड़का, सुबाहु और मारीच वध का रोमांचक मंचन किया गया।