आजमगढ़। नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से शिब्ली इंटर कालेज में आयोजित 20वें आजमगढ़ पुस्तक के चौथे दिन ‘जिंदगी खुली किताब की तरह होनी चाहिए’ विषय पर विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि संपादक हरवीर सिंह ने कहा कि समाज की अभिव्यक्ति का माध्यम हर दौर में किताबें ही रही हैं। आज गांधी के स्मृति दिवस पर जिस परिसर में बात हो रही है उस परिसर का महात्मा गांधी से रिश्ता है। इस परिसर में न सिर्फ महात्मा गांधी आए थे बल्कि इस परिसर ने उनकी लिखी हुई पांडुलिपियों को संजो कर रखा है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी समाज की कुरीतियों को खत्म करना आजादी से भी बड़ा एवं जरूरी मानते थे। उन्होंने कहा कि आज का दौर नागरिक पत्रकारिता का दौर है। महात्मा गांधी एक सजग पत्रकार होने के साथ साथ एक प्रखर अधिवक्ता भी थे। गांधी असहमति के बाद भी प्रेमपूर्ण संबंधों को जीना जानते थे। डॉ. अरुण कुमार मिश्रा प्रधान वैज्ञानिक व विभागाध्यक्ष एनडीआरआई ने कहा कि कृषि विज्ञान का सामाजिक आयाम वैज्ञानिक अनुसंधान को विज्ञान के लैब से निकालकर खेत की मेड़ तक पहुंचाने का दायित्व है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का अनुसंधान बाजार के मुनाफे का नहीं किसान को राजा बनाने का नियामक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों को वृक्ष खेती के माध्यम से वृक्ष दूत की भूमिका निभानी होगी। अध्यक्षता करते हुए शिब्ली कालेज के प्राचार्य डा. मसूद अख्तर ने कहा कि तकनीकी युग में भी सामाजिक सशक्तिकरण की माध्यम किताबें ही हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट से आए पुस्तकालयाध्यक्ष आमिर जिलानी ने 31 जनवरी को 11 से तीन बजे तक बाल मन के सपनों का रंग और पुस्तक संस्कृति विषय पर कार्यशाला होगी। साहित्यकार डा. सुरेंद्र विक्रम और डा. शीला पांडेय विशेषज्ञ के रूप में शिरकत करेंगे। जगदीश चंद्र बर्नवाल ‘कुंद’ की पुस्तक का लोकार्पण डीएम एनपी सिंह करेंगे। डा. रविन्द्र नाथ राय, अनिल कुमार, सोनी पाण्डेय, विनय यादव, अभिमन्यु मौजूद रहे।