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भूत पिशाचों की टोली के साथ निकली बाबा भोलेनाथ की बारात
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शहर के भंवरनाथ स्थित शिव मंदिर पर महाशिवरात्री के अवसर पर अभिषेक करते श्रद्घालु।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। नगर के भवरनाथ मंदिर में पूरे दिन श्रद्घालुओं के जलाभिषेक करने का सिलसिला जारी रहा। दोपहर बाद नगर के गौरी शंकर घाट से बाबा की बरात निकाली गई। बारात में शामिल भूत-पिशाचों की टोली लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। नगर क्षेत्र में जगह-जगह लोगों ने बरातियों का स्वागत ठंडई से किया। नाचते गाते यह बरात बाबा भंवरनाथ मंदिर पहुंची जहां शिव पार्वती का विवाह हुआ। जनपद के अन्य क्षेत्रों में भी शिव पार्वती विवाह का आयोजन किया गया।
महाशिवरात्रि की दोपहर बाद गौरीशंकर घाट से जब भगवान भोलेनाथ बरात लेकर निकले तो पूरा शहर बरात की अगवानी के लिए उमड़ पड़ा। बहुत से लोग बरात में शामिल होने के लिए इंतजार करते नजर आए। बरात में तरह-तरह के रूप धारण कर नाचते गाते चल रहे बराती लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। उनके द्वारा हर हर महादेव का जयकारा लगाया जा रहा था। नाचते गाते बारातियों द्वारा जमकर अबीर गुलाल उड़ाए जा रहे थे। यह टोली जिधर से भी गुजरी सड़कें अबीर गुलाल से सरोबार हो गई। जिसमें लोगों को फागुन के आने का एहसास कराया।
बरात गौरीशंकर घाट से निकलकर मुख्य चौक होते हुए पुरानी सब्जीमंडी चौक पहुंची। वहां से लाल डिग्गी, मातबरगंज, मुख्य चौक, पुरानी कोतवाली, तकिया, पहाड़पुर, ब्रह्मस्थान होते हुए भवरनाथ पहुंची। जगह-जगह लोगों द्वारा बरातियों के स्वागत की व्यवस्था की गई थी। बारात में शामिल लोगों को ठंडई पिलाई गई। बाराती इसे पीते हुए आगे बढ़ते गए। बरात के भवरनाथ पहुंचने पर शिव पार्वती का विवाह विधि विधान से संपन्न कराया गया है। इसके बाद बरात नाचते गाते वापस हुई।
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इनसेट
खानपुर बेलमा में शिवपार्वती विवाह का हुआ मंचन
फूलपुर। तहसील क्षेत्र के खानपुर बेलमा गांव स्थिति विशाल शंकरजी मंदिर परिसर में शिवरात्रि के अवसर पर शिव पार्वती विवाह का मंचन किया गया। पात्रों ने अपनी प्रतिभा से उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। लीला के मंचन की कड़ी में देवऋषि नारद माता पार्वती के पिता हिमाचल के यहां पहुंचते हैं और हिमाचल से पुत्री पार्वती की हस्तरेखा दिखाकर भविष्य बताने की प्रार्थना करते हैं। इसके बाद शिव पार्वती के विवाह की लीला के मंचन में भगवान विष्णु, ब्रह्मा, इंद्र आदि देवताओं के अनुरोध पर शंकरजी दूल्हा बनकर दिगपाल, भूत, प्रेत, पिशाच व देवताओं के साथ बारात लेकर राजा हिमाचल के यहां पहुंचते हैं। इस दौरान बाजे गाजे के साथ शिव बारात निकाली गई। माता मैना वर व बारातियों का रूप देख कर भयभीत हो जाती हैं लेकिन पुत्री पार्वती द्वारा धैर्य धारण कराने पर वर का स्वागत करती हैं। शिवजी का पार्वती के साथ पाणिग्रहण संस्कार संपन्न होता है। संयोजक राजबहादुर द्वारा प्रसाद वितरण किया गया।
उसूरकुढ़वा से निकली शिव बरात
महाराजगंज। शिवरात्रि के अवसर पर क्षेत्र के उसूरकुढ़वा से शिव बारात निकाली गई। बारात में हाथी, घोड़ा, बैंड बाजा, डीजे की धुन पर बाबा के बाराती भूत पिशाच नाचते गाते हुए चल रहे थे। बारात बेकाबू चौक, बजरंग चौक, सहदेव गंज होते हुए महराजगंज थाने पहुची। जहां प्रभारी निरीक्षक गजानंद चौबे द्वारा भोले शंकर की आरती उतारी गई। इसके बाद बारात भैरव बाबा स्थान पर पहुंची। जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिव पार्वती का विवाह संपन्न कराय गया।
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महाशिवरात्रि की दोपहर बाद गौरीशंकर घाट से जब भगवान भोलेनाथ बरात लेकर निकले तो पूरा शहर बरात की अगवानी के लिए उमड़ पड़ा। बहुत से लोग बरात में शामिल होने के लिए इंतजार करते नजर आए। बरात में तरह-तरह के रूप धारण कर नाचते गाते चल रहे बराती लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। उनके द्वारा हर हर महादेव का जयकारा लगाया जा रहा था। नाचते गाते बारातियों द्वारा जमकर अबीर गुलाल उड़ाए जा रहे थे। यह टोली जिधर से भी गुजरी सड़कें अबीर गुलाल से सरोबार हो गई। जिसमें लोगों को फागुन के आने का एहसास कराया।
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बरात गौरीशंकर घाट से निकलकर मुख्य चौक होते हुए पुरानी सब्जीमंडी चौक पहुंची। वहां से लाल डिग्गी, मातबरगंज, मुख्य चौक, पुरानी कोतवाली, तकिया, पहाड़पुर, ब्रह्मस्थान होते हुए भवरनाथ पहुंची। जगह-जगह लोगों द्वारा बरातियों के स्वागत की व्यवस्था की गई थी। बारात में शामिल लोगों को ठंडई पिलाई गई। बाराती इसे पीते हुए आगे बढ़ते गए। बरात के भवरनाथ पहुंचने पर शिव पार्वती का विवाह विधि विधान से संपन्न कराया गया है। इसके बाद बरात नाचते गाते वापस हुई।
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खानपुर बेलमा में शिवपार्वती विवाह का हुआ मंचन
फूलपुर। तहसील क्षेत्र के खानपुर बेलमा गांव स्थिति विशाल शंकरजी मंदिर परिसर में शिवरात्रि के अवसर पर शिव पार्वती विवाह का मंचन किया गया। पात्रों ने अपनी प्रतिभा से उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। लीला के मंचन की कड़ी में देवऋषि नारद माता पार्वती के पिता हिमाचल के यहां पहुंचते हैं और हिमाचल से पुत्री पार्वती की हस्तरेखा दिखाकर भविष्य बताने की प्रार्थना करते हैं। इसके बाद शिव पार्वती के विवाह की लीला के मंचन में भगवान विष्णु, ब्रह्मा, इंद्र आदि देवताओं के अनुरोध पर शंकरजी दूल्हा बनकर दिगपाल, भूत, प्रेत, पिशाच व देवताओं के साथ बारात लेकर राजा हिमाचल के यहां पहुंचते हैं। इस दौरान बाजे गाजे के साथ शिव बारात निकाली गई। माता मैना वर व बारातियों का रूप देख कर भयभीत हो जाती हैं लेकिन पुत्री पार्वती द्वारा धैर्य धारण कराने पर वर का स्वागत करती हैं। शिवजी का पार्वती के साथ पाणिग्रहण संस्कार संपन्न होता है। संयोजक राजबहादुर द्वारा प्रसाद वितरण किया गया।
उसूरकुढ़वा से निकली शिव बरात
महाराजगंज। शिवरात्रि के अवसर पर क्षेत्र के उसूरकुढ़वा से शिव बारात निकाली गई। बारात में हाथी, घोड़ा, बैंड बाजा, डीजे की धुन पर बाबा के बाराती भूत पिशाच नाचते गाते हुए चल रहे थे। बारात बेकाबू चौक, बजरंग चौक, सहदेव गंज होते हुए महराजगंज थाने पहुची। जहां प्रभारी निरीक्षक गजानंद चौबे द्वारा भोले शंकर की आरती उतारी गई। इसके बाद बारात भैरव बाबा स्थान पर पहुंची। जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिव पार्वती का विवाह संपन्न कराय गया।