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Azamgarh News: ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरू, अब मशीनों से होगी कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच
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जिले में व्यावसायिक वाहन संचालकों के लिए राहत की खबर है। कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए इटौरा मोड़ पर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) शुरू हो गया है।
अब वाहन मालिकों को फिटनेस जांच के लिए गंभीरपुर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। इटौरा स्थित केंद्र पर ही वाहनों की फिटनेस जांच आधुनिक मशीनों और कंप्यूटर आधारित प्रणाली से की जाएगी।
एआरटीओ प्रशासन विष्णुदत्त मिश्रा ने बताया कि आजमगढ़-गाजीपुर मार्ग पर इटौरा जेल के पास स्थापित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच शुरू कर दी गई है। यहां वाहनों की तकनीकी स्थिति की जांच निर्धारित मानकों के अनुसार मशीनों से की जाएगी।
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एटीएस पर वाहनों के ब्रेक, स्टीयरिंग और सस्पेंशन की स्थिति के साथ प्रदूषण स्तर समेत अन्य जरूरी मानकों की जांच होगी। पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित होने के कारण जांच के दौरान मानवीय हस्तक्षेप कम होगा।
निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों को ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। परिवहन विभाग के अनुसार ऑटोमेटेड व्यवस्था लागू होने से फिटनेस जांच में पारदर्शिता आएगी और वाहनों की वास्तविक तकनीकी स्थिति का बेहतर आकलन हो सकेगा।
इससे सड़क पर चलने वाले व्यावसायिक वाहनों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। वाहन मालिकों का समय बचेगा और फिटनेस प्रमाणन प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय होगी।
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अब वाहन मालिकों को फिटनेस जांच के लिए गंभीरपुर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। इटौरा स्थित केंद्र पर ही वाहनों की फिटनेस जांच आधुनिक मशीनों और कंप्यूटर आधारित प्रणाली से की जाएगी।
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एआरटीओ प्रशासन विष्णुदत्त मिश्रा ने बताया कि आजमगढ़-गाजीपुर मार्ग पर इटौरा जेल के पास स्थापित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच शुरू कर दी गई है। यहां वाहनों की तकनीकी स्थिति की जांच निर्धारित मानकों के अनुसार मशीनों से की जाएगी।
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एटीएस पर वाहनों के ब्रेक, स्टीयरिंग और सस्पेंशन की स्थिति के साथ प्रदूषण स्तर समेत अन्य जरूरी मानकों की जांच होगी। पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित होने के कारण जांच के दौरान मानवीय हस्तक्षेप कम होगा।
निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों को ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। परिवहन विभाग के अनुसार ऑटोमेटेड व्यवस्था लागू होने से फिटनेस जांच में पारदर्शिता आएगी और वाहनों की वास्तविक तकनीकी स्थिति का बेहतर आकलन हो सकेगा।
इससे सड़क पर चलने वाले व्यावसायिक वाहनों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। वाहन मालिकों का समय बचेगा और फिटनेस प्रमाणन प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय होगी।