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Azamgarh News: किसी केंद्र पर एक भी बच्चा नहीं तो कहीं इक्का-दुक्का ही पहुंच रहे

Sat, 02 Aug 2025 11:50 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Aug 2025 11:50 PM IST
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At some centres, there is not even a single child and at some places only a few are reaching
अजमतगढ़ ब्लाक के महुला आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों की संख्या मिली कम।  - फोटो : अजमतगढ़ ब्लाक के महुला आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों की संख्या मिली कम।
आजमगढ़। जिले के विभिन्न विकासखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल में कई खामियां मिलीं। महुला, पवई और फरिहा जैसे क्षेत्रों में कई केंद्रों पर न तो बच्चे उपस्थित मिले और न ही नियमित रूप से पुष्टाहार वितरित हो रहा है। वहीं कई केंद्रों पर इक्का-दुक्का बच्चे ही पहुंचे। वहीं फरिहा क्षेत्र में तो अधिकांश केंद्र अस्थायी भवनों में संचालित हो रहे हैं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सिर्फ जांच के समय ही उपस्थित होती हैं।
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जिले में कुल 5588 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसमें लगभग पांच लाख 70 हजार बच्चों का पंजीकरण है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकार की ओर से पुष्टाहार दिया जाता है। इसके बाद भी अगर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत काफी खस्ता है। शनिवार को जब आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल कराई गई तो इसमें कई बातें सामने आई। एक तो आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन जर्जर हालत में मिले। दूसरे आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष उनकी संख्या काफी कम मिली। विभाग की मानें तो जिले में मात्र 700 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास खुद का भवन है। इसके अलावा लगभग 3000 आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में संचालित होते हैं और शेष आंगनबाड़ी केंद्र पंचायत भवन आदि में संचालित होते हैं।
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पंजीकृत 40 और उपस्थित सिर्फ छह
लाटघाट। विकास खंड अजमतगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र महुला द्वितीय की पड़ताल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरिता सिंह व राधिका राय उपस्थिति मिलीं। केंद्र पर तीन से छह वर्ष के 40 नामांकित बच्चों में से मौके पर सिर्फ 6 ही उपस्थित थे। पूछा गया तो पता चला इतने ही बच्चे आज आए हुए हैं। बताया कि जुलाई का पुष्टाहार अब तक नहीं पहुंचा है।
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एक भी बच्चे नहीं मिले उपस्थित
लाटघाट। विकास खंड अजमतगढ़ के महुला सुरौली स्थित केंद्र पर 0 से 3 वर्ष के 50 और 3 से 6 वर्ष के 25 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन केंद्र पर एक भी बच्चा नहीं मिला। सहायिका कमलावती ने बताया कि राशन नहीं आया और टीकाकरण के चलते बच्चे नहीं आए।
सिर्फ आठ बच्चे पहुंचे
पवई। विकास खंड पवई के चकिया गांव में प्राथमिक विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में 48 पंजीकृत बच्चों में से सिर्फ 8 उपस्थित मिले। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रमिला ने बताया कि पुष्टाहार वितरण किया गया है।
एक भी बच्चे नहीं पहुंचे
फरिहा। दक्षिण बस्ती में सामुदायिक हाल में संचालित केंद्र पर कायकर्ता अनुपस्थित मिली और सहायिका अकेली बैठी थीं, जबकि एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी विभागीय जांच होती है, पहले से सूचना दे दी जाती है और फिर दिखावे के लिए बच्चों को बुलाया जाता है।
बोले ग्रामीण
फरिहा दक्षिण बस्ती के निवासी मिलन कुमार और रुची कुमारी ने बताया कि यहां पर सामुदायिक हाल में जो केंद्र बना है वह कभी कभार खुलता है। जब कोई जांच आती है तो बच्चे इकट्ठा करके लोग बैठ जाती हैं। रही बात पुष्टाहार की तो हमारे पास दो-तीन बच्चे हैं। 12 महीने में दो बार पुष्टाहार मिला है। उसके बाद से कभी नहीं दिया गया।


वर्तमान में जिले में कुल 5588 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 700 खुद के भवन और लगभग 3000 आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में संचालित होते हैं। शेष पंचायत और अन्य भवनों में चलते हैं। रही बात जर्जर केंद्रों की तो इसकी सूचना हमारे पास नहीं है। जहां तक रही बात खुलने और बंद होने की तो निरीक्षण कर कार्रवाई की जाती है। यदि ऐसा कुछ है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - हेमंत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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