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यहां तो जैसे ठहर सा गया है सबकुछ
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आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। चौबीसों घंटे गुलजार रहने वाला आजमगढ़ रेलवे स्टेशन वर्तमान में पूरी तरह से सूना पड़ा है। न तो सवारी ट्रेन आ जा रही है न ही कोई यात्री ही यहां पहुंच रहे है। कोरोना संक्रमण के चलते लगे लॉकडाउन का सही मायने में अनुपालन होता तो सिर्फ यहीं दिखाई दे रहा है। ट्रेनों के प्रेशर हार्न के साथ ही यात्री ट्रेनों के पहुंचने पर होने वाले चाय-चाय के शोर को तो सुनने को जैसे स्टेशन पर मौजूद अधिकारी, कर्मचारी व सफाई कर्मी तरस से गए है।
कोरोना संक्रमण के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च से देश में लॉकडाउन का एलान किया। इसी के बाद से ही आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर न तो कोई यात्री ट्रेन आई न ही यहां से कोई यात्री ट्रेन कहीं के लिए गई। लॉक डाउन को लगभग 44 दिन हो गए है और स्टेशन पर पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। चार-पांच दिनों से प्रतिदिन एक या दो मालगाड़ी इस स्टेशन से गुजर रही है, लेकिन ट्रनों के प्रेशर हार्न और प्लेटफार्म पर ट्रेन के पहुंचने के पूर्व ही शुरू होने वाला चाय-चाय, समोसे गरम आदि के शोर पूरी तरह से गायब है। प्लेटफार्म व वहां लगी कुर्सियां सूनी पड़ी है। प्लेटफार्म पर खान-पान के सामानों की दुकाने भी बंद है। शीशे के केबिन युक्त बनी दुकानें बाहर से खुली दिखाई दे रही है लेकिन वास्तव में वेंडर अपने शीशे के रैक में ताला बंद कर घर जा चुके है। लॉकडाउन के पूर्व इस स्टेशन पर हजारों की भीड़ रहती थी। प्लेटफार्म पर सिर्फ रेलवे के अधिकारियों व कुछ कर्मियों के साथ ही साफ-सफाई व्यवस्था देखने वाले कर्मचारी व सुपरवाइजर ही मौजूद थे। पूरा प्लेटफार्म लगातार हो रही सफाई के चलते चमकता नजर आ रहा था। स्टेशन अधीक्षक भी अपने कक्ष में मौजूद थे और दो अन्य कर्मचारियों के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। सफाई का कार्य देख रहे सुपरवाइजर सुबास यादव ने बताया कि ट्रेन न आने से पूरा स्टेशन सूना पड़ा है, लेकिन परिसर के साफ-सफाई की जिम्मेदारी वह अपने कर्मचारियों के माध्यम से करा रहा है। कुल 20 कर्मचारी तीन शिफ्ट में स्टेशन की सफाई कर रहे है।
स्टेशन पर आए बिना नहीं कटता समय
प्लेटफार्म पर ट्रेन नहीं आ रही है। जिसके चलते सभी कुली अपने-अपने घरों को चले गए है। ज्यादातर कुली रेलवे स्टेशन के आसपास के ग्रामों के ही है। जिसके चलते वे कभी कभार आ जाते है। इसमें भी पल्हनी गांव का रहने वाला कुली जत्तन बुधवार को भी प्लेटफार्म पर मौजूद था और एक टेबल के पास सो रहा था। जगाने पर उसने बताया कि ट्रेनों के न आने से काम नहीं मिल रहा है। शाम को घर चला जाता हूं और सुबह फिर यहां आ जाता हूं क्योंकि स्टेशन पर आए बिना समय ही नहीं कटता है। साथ ही यह उम्मीद भी रहती है कि हो सकता है कोई ट्रेन आ जाए और कुछ कमाई हो जाए।
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लॉक डाउन लगने के बाद से स्टेशन पर न तो कोई यात्री ट्रेन आई और न ही कोई गई। बीते पांच-छह दिनों में चार-छह माल गाड़ियां यहां से गुजरी जरूर है। जहां तक बाहर से श्रमिकों को लेकर ट्रेन यहां आने की बात है तो ऐसी कोई सूचना अभी नहीं मिली है। यदि कोई ट्रेन मजदूरों को लेकर आती है तो उसकी तैयारी हम कर रखे है।
बाबूराम, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन आजमगढ़।
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कोरोना संक्रमण के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च से देश में लॉकडाउन का एलान किया। इसी के बाद से ही आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर न तो कोई यात्री ट्रेन आई न ही यहां से कोई यात्री ट्रेन कहीं के लिए गई। लॉक डाउन को लगभग 44 दिन हो गए है और स्टेशन पर पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। चार-पांच दिनों से प्रतिदिन एक या दो मालगाड़ी इस स्टेशन से गुजर रही है, लेकिन ट्रनों के प्रेशर हार्न और प्लेटफार्म पर ट्रेन के पहुंचने के पूर्व ही शुरू होने वाला चाय-चाय, समोसे गरम आदि के शोर पूरी तरह से गायब है। प्लेटफार्म व वहां लगी कुर्सियां सूनी पड़ी है। प्लेटफार्म पर खान-पान के सामानों की दुकाने भी बंद है। शीशे के केबिन युक्त बनी दुकानें बाहर से खुली दिखाई दे रही है लेकिन वास्तव में वेंडर अपने शीशे के रैक में ताला बंद कर घर जा चुके है। लॉकडाउन के पूर्व इस स्टेशन पर हजारों की भीड़ रहती थी। प्लेटफार्म पर सिर्फ रेलवे के अधिकारियों व कुछ कर्मियों के साथ ही साफ-सफाई व्यवस्था देखने वाले कर्मचारी व सुपरवाइजर ही मौजूद थे। पूरा प्लेटफार्म लगातार हो रही सफाई के चलते चमकता नजर आ रहा था। स्टेशन अधीक्षक भी अपने कक्ष में मौजूद थे और दो अन्य कर्मचारियों के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। सफाई का कार्य देख रहे सुपरवाइजर सुबास यादव ने बताया कि ट्रेन न आने से पूरा स्टेशन सूना पड़ा है, लेकिन परिसर के साफ-सफाई की जिम्मेदारी वह अपने कर्मचारियों के माध्यम से करा रहा है। कुल 20 कर्मचारी तीन शिफ्ट में स्टेशन की सफाई कर रहे है।
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स्टेशन पर आए बिना नहीं कटता समय
प्लेटफार्म पर ट्रेन नहीं आ रही है। जिसके चलते सभी कुली अपने-अपने घरों को चले गए है। ज्यादातर कुली रेलवे स्टेशन के आसपास के ग्रामों के ही है। जिसके चलते वे कभी कभार आ जाते है। इसमें भी पल्हनी गांव का रहने वाला कुली जत्तन बुधवार को भी प्लेटफार्म पर मौजूद था और एक टेबल के पास सो रहा था। जगाने पर उसने बताया कि ट्रेनों के न आने से काम नहीं मिल रहा है। शाम को घर चला जाता हूं और सुबह फिर यहां आ जाता हूं क्योंकि स्टेशन पर आए बिना समय ही नहीं कटता है। साथ ही यह उम्मीद भी रहती है कि हो सकता है कोई ट्रेन आ जाए और कुछ कमाई हो जाए।
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लॉक डाउन लगने के बाद से स्टेशन पर न तो कोई यात्री ट्रेन आई और न ही कोई गई। बीते पांच-छह दिनों में चार-छह माल गाड़ियां यहां से गुजरी जरूर है। जहां तक बाहर से श्रमिकों को लेकर ट्रेन यहां आने की बात है तो ऐसी कोई सूचना अभी नहीं मिली है। यदि कोई ट्रेन मजदूरों को लेकर आती है तो उसकी तैयारी हम कर रखे है।
बाबूराम, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन आजमगढ़।

आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर पसरा सन्नाटा।- फोटो : AZAMGARH

आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर में बैठी महिला सफाईकर्मी।- फोटो : AZAMGARH

काम न होने से प्लेटाफार्म पर आराम करता एक कुली।- फोटो : AZAMGARH

आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटर पर पसरा सन्नाटा।- फोटो : AZAMGARH