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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   A single School Management Committee will now oversee operations from Bal Vatika to Class 12; existing committees will be dissolved.

Azamgarh News: बाल वाटिका से कक्षा 12 तक अब एक ही विद्यालय प्रबंधन समिति, पुरानी होंगी भंग

Wed, 19 Aug 2026 12:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 12:20 AM IST
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A single School Management Committee will now oversee operations from Bal Vatika to Class 12; existing committees will be dissolved.
सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) का नए सिरे से गठन किया जाएगा।
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राज्य शिक्षा परियोजना के निर्देश के तहत स्कूलों में संचालित पुरानी एसएमसी को भंग कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 की गाइडलाइन के अनुसार नई समिति बनाई जाएगी। अब बाल वाटिका से कक्षा 12 तक के लिए अलग-अलग समितियों के बजाय एकीकृत एसएमसी गठित होगी।
नई एसएमसी का गठन ग्रामसभा के माध्यम से किया जाएगा। विद्यालय में छात्रों की संख्या के आधार पर समिति में 15, 20 या 25 सदस्य होंगे। पारदर्शिता के लिए एक परिवार से केवल एक सदस्य को समिति में शामिल किया जा सकेगा।
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कोई भी व्यक्ति लगातार दूसरी बार अध्यक्ष नहीं बन सकेगा। समिति का कार्यकाल भी तीन साल से घटाकर दो साल कर दिया गया है। नई व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समिति में कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं शामिल होंगी।
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वहीं, कुल सदस्यों में 75 प्रतिशत बच्चों के अभिभावक होंगे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद केवल अभिभावकों के लिए आरक्षित रहेगा। इससे विद्यालय प्रबंधन में अभिभावकों की भूमिका और भागीदारी बढ़ेगी।
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वित्तीय अधिकार भी बढ़ाए गए
नई एसएमसी को पहले की तुलना में अधिक प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। स्कूल को मिलने वाले सरकारी अनुदान और विकास राशि का संचालन प्रधानाध्यापक और एसएमसी अध्यक्ष के संयुक्त बैंक खाते से किया जाएगा। समिति को विद्यालय के बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्यों से जुड़े कार्य कराने के साथ तीन वर्षीय विद्यालय विकास योजना तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

---वर्जन
विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और बच्चों की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए हर महीने एसएमसी की बैठक करना अनिवार्य होगा। इससे स्कूलों में होने वाले विकास कार्यों, वित्तीय प्रबंधन और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी में अभिभावकों की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है। -राजीव कुमार पाठक, बीएसए आजमगढ़।
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