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Azamgarh News: अपमान से उपजा संकल्प, 41 साल से गांव में हो रही रामलीला
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छितौनी गांव में चल रही श्रीरामलीला का दृश्य। संवाद
दूसरे गांव में रामलीला देखने के दौरान बैठने को लेकर हुए विवाद ने स्वर्गीय विश्वनाथ श्रीवास्तव को अपने गांव में रामलीला शुरू कराने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
ग्रामीणों के सहयोग से वर्ष 1985 में शुरू हुई छितौनी की रामलीला आज 41 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही है। खास बात यह है कि राम, लक्ष्मण, सीता समेत सभी पात्रों की भूमिका गांव के कलाकार ही निभाते हैं। संगीत मंडली बाहर से बुलाई जाती है।
श्री आदर्श रामलीला समिति छितौनी के तत्वावधान में होने वाला यह आयोजन गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, दूसरे गांव में बैठने को लेकर हुई नोकझोंक से आहत विश्वनाथ श्रीवास्तव ने अपने गांव में ही रामलीला कराने का निर्णय लिया था।
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उनके आह्वान पर ग्रामीणों ने खुद पात्रों की भूमिका निभाने और मंचन का अभ्यास शुरू किया। तब से यह परंपरा बिना किसी साल के अंतराल के जारी है। रामलीला का शुभारंभ नारद मोह और रावण जन्म के प्रसंगों से होता है।
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धनुष यज्ञ और राम विवाह का मंचन
रामलीला के चौथे दिन बुधवार रात धनुष यज्ञ, राम विवाह, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और रावण-बाणासुर संवाद का मंचन किया गया। कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को बांधे रखा। संगीत मंडली की धुनों से मंचन जीवंत हो उठा और देर रात तक दर्शक जमे रहे। वरिष्ठ कलाकार सुरेंद्र यादव ने बताया कि वह वर्षों से अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं। प्रधान प्रतिनिधि नरसिंह के अनुसार, प्रतिदिन करीब एक हजार लोग रामलीला देखने पहुंचते हैं।
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20 अक्टूबर को होगा समापन
समिति की ओर से 20 अक्टूबर को भरत मिलाप, राम राज्याभिषेक और रावण दहन के साथ रामलीला का समापन किया जाएगा। इस अवसर पर मेले का भी आयोजन होगा। स्थानीय पुलिस प्रशासन आयोजन में सहयोग करता है।
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ग्रामीणों के सहयोग से वर्ष 1985 में शुरू हुई छितौनी की रामलीला आज 41 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही है। खास बात यह है कि राम, लक्ष्मण, सीता समेत सभी पात्रों की भूमिका गांव के कलाकार ही निभाते हैं। संगीत मंडली बाहर से बुलाई जाती है।
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श्री आदर्श रामलीला समिति छितौनी के तत्वावधान में होने वाला यह आयोजन गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, दूसरे गांव में बैठने को लेकर हुई नोकझोंक से आहत विश्वनाथ श्रीवास्तव ने अपने गांव में ही रामलीला कराने का निर्णय लिया था।
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उनके आह्वान पर ग्रामीणों ने खुद पात्रों की भूमिका निभाने और मंचन का अभ्यास शुरू किया। तब से यह परंपरा बिना किसी साल के अंतराल के जारी है। रामलीला का शुभारंभ नारद मोह और रावण जन्म के प्रसंगों से होता है।
धनुष यज्ञ और राम विवाह का मंचन
रामलीला के चौथे दिन बुधवार रात धनुष यज्ञ, राम विवाह, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और रावण-बाणासुर संवाद का मंचन किया गया। कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को बांधे रखा। संगीत मंडली की धुनों से मंचन जीवंत हो उठा और देर रात तक दर्शक जमे रहे। वरिष्ठ कलाकार सुरेंद्र यादव ने बताया कि वह वर्षों से अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं। प्रधान प्रतिनिधि नरसिंह के अनुसार, प्रतिदिन करीब एक हजार लोग रामलीला देखने पहुंचते हैं।
20 अक्टूबर को होगा समापन
समिति की ओर से 20 अक्टूबर को भरत मिलाप, राम राज्याभिषेक और रावण दहन के साथ रामलीला का समापन किया जाएगा। इस अवसर पर मेले का भी आयोजन होगा। स्थानीय पुलिस प्रशासन आयोजन में सहयोग करता है।