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इंदारा में तेल भंडार मिलने की संभावना धूमिल हुई
Azamgarh
Updated Sun, 27 Oct 2013 05:40 AM IST
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मऊ। जिले के इंदारा गांव में तेल की खोज में जोरशोर से शुरू हुआ ओएनजीसी का अभियान बीच में ही रोकना पड़ा। 2100 मीटर पर मिली चट्टान से कंपनी की ड्रिल मशीनें पार नहीं पा सकीं। इसी के साथ ही माना जा रहा है कि इंदारा गांव में पेट्रो पदार्थ मिलने की संभावना खत्म हो गई है। कंपनी अपना सामान समेटने में लगी है। हालांकि कंपनी के अधिकारी पूरी तरह से मऊ से विमुख होने की बात से इंकार करते हैं। संभावना है कि भविष्य में इस प्रोजेक्ट पर कंपनी फिर से काम शुरू कर सकती है। इसीलिए खुदाई के लिए अधिग्रहित दो एकड़ क्षेत्रफल को सील कर दिया गया है।
मऊ के इंदारा गांव की रहने वाले प्रमोद सिंह के खेत में बारिश के जमे पानी से पेट्रो पदार्थ की गंध आने लगी। इसपर 2011 में ओएनजीसी ने सर्वे कराया। खेत में तेल मिलने की संभावना पर कंपनी ने प्रमोद सिंह का खेत अधिग्रहित कर लिया। लगभग दो साल बाद जुलाई 2013 से कंपनी ने यहां पर साजोसामान के साथ खुदाई शुरू की। खुदाई के लिए 3100 मीटर लक्ष्य रखा गया। मऊ वासियों को इस बात की प्रसन्नता थी कि यदि यहां पेट्रो भंडार मिला तो उनका जिला भारत के मानचित्र पर चमकेगा। कंपनी ने खुदाई के क्रम में एक हजार, दो हजार तक सफलतापूर्वक काम आगे बढ़ाया। लेकिन 2100 मीटर पर मिली चट्टान को कंपनी की ड्रिल मशीनें तोड़ नहीं सकीं। भारीभरकम धन खर्च करने के बाद भी सफलता मिलते न देख कंपनी ने भी आगे खुदाई जारी रखने का काम रोक दिया। ओएनजीसी के 45 अधिकारियों/कर्मचारियों की टीम का करीब चार माह की मशक्कत का परिणाम सिफर रहा। कंपनी अब अपना साजोसामान समेटने में जुटी है। कंपनी एचआर एक्जीक्यूटिव सर्वेश्वर सिंह ने बताया कि तय लक्ष्य से एक हजार मीटर पहले ही मिली चट्टान को तोड़ा नहीं जा सका। चट्टान काफी सख्त है, जिसे तोड़ने में परेशानी आ रही है। इसलिए कंपनी ने काम रोकने का निर्णय लिया है। खोज के इस अभियान में 30 करोड़ से अधिक का खर्च हुआ है। कंपनी यहां से साजोसामान समेटकर अपने अगले साइट पर जाने की तैयारी में है। हालांकि यहां फिर से काम शुरू होने की पूरी संभावना है। यहां से ओएनजीसी की टीम एमपी के दमोह रवाना होने की तैयारी में है।
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मऊ के इंदारा गांव की रहने वाले प्रमोद सिंह के खेत में बारिश के जमे पानी से पेट्रो पदार्थ की गंध आने लगी। इसपर 2011 में ओएनजीसी ने सर्वे कराया। खेत में तेल मिलने की संभावना पर कंपनी ने प्रमोद सिंह का खेत अधिग्रहित कर लिया। लगभग दो साल बाद जुलाई 2013 से कंपनी ने यहां पर साजोसामान के साथ खुदाई शुरू की। खुदाई के लिए 3100 मीटर लक्ष्य रखा गया। मऊ वासियों को इस बात की प्रसन्नता थी कि यदि यहां पेट्रो भंडार मिला तो उनका जिला भारत के मानचित्र पर चमकेगा। कंपनी ने खुदाई के क्रम में एक हजार, दो हजार तक सफलतापूर्वक काम आगे बढ़ाया। लेकिन 2100 मीटर पर मिली चट्टान को कंपनी की ड्रिल मशीनें तोड़ नहीं सकीं। भारीभरकम धन खर्च करने के बाद भी सफलता मिलते न देख कंपनी ने भी आगे खुदाई जारी रखने का काम रोक दिया। ओएनजीसी के 45 अधिकारियों/कर्मचारियों की टीम का करीब चार माह की मशक्कत का परिणाम सिफर रहा। कंपनी अब अपना साजोसामान समेटने में जुटी है। कंपनी एचआर एक्जीक्यूटिव सर्वेश्वर सिंह ने बताया कि तय लक्ष्य से एक हजार मीटर पहले ही मिली चट्टान को तोड़ा नहीं जा सका। चट्टान काफी सख्त है, जिसे तोड़ने में परेशानी आ रही है। इसलिए कंपनी ने काम रोकने का निर्णय लिया है। खोज के इस अभियान में 30 करोड़ से अधिक का खर्च हुआ है। कंपनी यहां से साजोसामान समेटकर अपने अगले साइट पर जाने की तैयारी में है। हालांकि यहां फिर से काम शुरू होने की पूरी संभावना है। यहां से ओएनजीसी की टीम एमपी के दमोह रवाना होने की तैयारी में है।
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