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सीता जी को देख भगवान श्रीराम हुए मुग्ध
Updated Sun, 24 Sep 2017 12:23 AM IST
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आजमगढ़। नगर के पुरानी कोतवाली पर चल रही श्रीरामलीला में शुक्रवार की रात कलाकारों ने सीता जन्म, नगर दर्शन सहित फुलवारी का मंचन किया। इस दौरान कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बीच-बीच में लग रहे श्रीराम के जयकारों से वातावरण श्रीराममय हो गया था।
श्रीरामलीला के मंचन के क्रम में कलाकारों द्वारा सीता जन्म का मंचन किया गया। इसके बाद कलाकारों ने नगर दर्शन का मंचन किया। इसमें विश्वामित्र की आज्ञा लेकर श्रीराम, लक्ष्मण जनकपुर देखने पहुंचते हैं। दोनों भाई राजा जनक के महल के बागीचे में पहुंचते हैं। उस समय सीता जी बागीचे में पूजन को जा रही थी। लक्ष्मण के विशेष आग्रह पर दासियों ने एक शर्त पर बागीचे में प्रवेश की अनुमति दी कि आप दोनों भाई किसी पेड़ की आड़ में छिप जाइएगा। इस पर दोनों भाई पेड़ की आड़ में छिपकर सीता जी को देखते हैं। सीता जी को देखकर भगवान श्रीराम मुग्ध हो जाते हैं और जब इस बात का पता विश्वामित्र को होता है तो वे भगवान राम से सीता स्वयंवर में ले जाते हैं।
नारद मोह के मंचन से कलाकारों ने मोहा मन
अंबारी/फूलपुर। फूलपुर तहसील के ओरिल बाजार में युवक रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में शुक्रवार को पहले दिन कलाकारों द्वारा नारद मोह का मंचन किया गया। रामलीला मंचन से पूर्व कलाकारों ने भगवान गणेश की आकर्षक झांकी सजाई।
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नारद ऋषि को जब घमंड हो जाता है तो उसे दूर करने भगवान विश्वमोहिनी की लीला रचते हैं। विश्वमोहिनी को देखकर नारद ऋषि उस पर मोहित हो जाते हैं। वह विष्णु भगवान से उनके रूप की मांग करते हैं ताकि विश्वमोहिनी के स्वयंबर में वह भाग लें। लेकिन भगवान उन्हें बंदर का रूप दे देते हैं। जब सुंदरी जब उनका वरण नहीं करती है और लोग सभा में उनकी हंसी उड़ाते हैं। तो नारद ने कमंडल में अपना चेहरा देखा। चेहरा देखते ही उनका गुस्सा सातवें स्थान पर पहुंच जाता है। वह भगवान विष्णु को श्राप देते हैं।
वहीं फूलपुर में श्रीराम लीला सेवा समिति के तत्वाधान में नगर पंचायत फूलपुर स्थित श्रीराम लीला मैदान में चल रहे राम लीला मंचन के दूसरे दिन शुक्रवार की रात अयोध्या से आये कलाकारों ने रावण अत्याचार की प्रस्तुति किया। इस मौके पर राम लीला कमेटी के अध्यक्ष रामआशीष रावत, प्रदीप कुमार मौर्य, रितनेश, अमरनाथ, कृष्ण कुमार पांडेय, सोनू पांडेय, अकिंत जायसवाल, जेवी राय, देवेश, राजेश थे।
राम-लक्षमण की निकाली झांकी
मेजवां। दशहरा कमेटी की ओर से फू लपुर नगर में शुक्रवार की रात श्रीराम लक्ष्मण की झांकी निकाली गई। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता को रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया गया। भक्तों द्वारा जगह-जगह प्रभु श्रीराम की आरती उतारी गई।
वही शंकर तिराहा पर दर्शन करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। रथ के आगे भजन कीर्तन मंडल के कलाकार भजन गाते चल रहे थे। रात में सतरंगी छठा के बीच रथ को आक र्षक रूप दिया गया था। दशहरा मैदान में रथ पहुंचने पर राम लक्ष्मण के बीच संवाद हुआ। दशहरा कमेटी के अध्यक्ष प्रेम कुमार पांडेय ने बताया कि श्रीराम गद्दी तक रथ निकाला जायेगा। 30 सितम्बर को दशहरा मेला लगेगा। एक अक्टूबर की रात में भरत मिलाप का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने हो रहे कार्यक्रम के लिए पुलिस प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
सन्यासी के रूप में निकली राम, लक्ष्मण और सीता की झांकी
सरायमीर। श्रीराम लीला सेवा समिति सरायमीर के तत्वाधान में शुक्रवार को आशु मिश्रा के आवास से राम, लक्ष्मण और माता जानकी की झांकी निकाली गई। तपस्वी के भेष में निकली इस झांकी ने पूरे कस्बे का भ्रमण किया। इस दौरान श्रद्घालू उनके साथ भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे। उनके लिए लोगों द्वारा जगह-जगह जलपान की व्यवस्था की गई थी। रथ का संचालन समिति के सलाहकार सदस्य राजेंद्र मद्धेशिया कर रहे थे। कार्यक्रम का संचालन समिति के उपाध्यक्ष लालबहादुर सेठ, रामेश्वर बरनवाल, राजेश यादव, अमृतलाल, अवधेश, कृष्णकांत सेठ आदि कर रहे थे।
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श्रीरामलीला के मंचन के क्रम में कलाकारों द्वारा सीता जन्म का मंचन किया गया। इसके बाद कलाकारों ने नगर दर्शन का मंचन किया। इसमें विश्वामित्र की आज्ञा लेकर श्रीराम, लक्ष्मण जनकपुर देखने पहुंचते हैं। दोनों भाई राजा जनक के महल के बागीचे में पहुंचते हैं। उस समय सीता जी बागीचे में पूजन को जा रही थी। लक्ष्मण के विशेष आग्रह पर दासियों ने एक शर्त पर बागीचे में प्रवेश की अनुमति दी कि आप दोनों भाई किसी पेड़ की आड़ में छिप जाइएगा। इस पर दोनों भाई पेड़ की आड़ में छिपकर सीता जी को देखते हैं। सीता जी को देखकर भगवान श्रीराम मुग्ध हो जाते हैं और जब इस बात का पता विश्वामित्र को होता है तो वे भगवान राम से सीता स्वयंवर में ले जाते हैं।
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नारद मोह के मंचन से कलाकारों ने मोहा मन
अंबारी/फूलपुर। फूलपुर तहसील के ओरिल बाजार में युवक रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में शुक्रवार को पहले दिन कलाकारों द्वारा नारद मोह का मंचन किया गया। रामलीला मंचन से पूर्व कलाकारों ने भगवान गणेश की आकर्षक झांकी सजाई।
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नारद ऋषि को जब घमंड हो जाता है तो उसे दूर करने भगवान विश्वमोहिनी की लीला रचते हैं। विश्वमोहिनी को देखकर नारद ऋषि उस पर मोहित हो जाते हैं। वह विष्णु भगवान से उनके रूप की मांग करते हैं ताकि विश्वमोहिनी के स्वयंबर में वह भाग लें। लेकिन भगवान उन्हें बंदर का रूप दे देते हैं। जब सुंदरी जब उनका वरण नहीं करती है और लोग सभा में उनकी हंसी उड़ाते हैं। तो नारद ने कमंडल में अपना चेहरा देखा। चेहरा देखते ही उनका गुस्सा सातवें स्थान पर पहुंच जाता है। वह भगवान विष्णु को श्राप देते हैं।
वहीं फूलपुर में श्रीराम लीला सेवा समिति के तत्वाधान में नगर पंचायत फूलपुर स्थित श्रीराम लीला मैदान में चल रहे राम लीला मंचन के दूसरे दिन शुक्रवार की रात अयोध्या से आये कलाकारों ने रावण अत्याचार की प्रस्तुति किया। इस मौके पर राम लीला कमेटी के अध्यक्ष रामआशीष रावत, प्रदीप कुमार मौर्य, रितनेश, अमरनाथ, कृष्ण कुमार पांडेय, सोनू पांडेय, अकिंत जायसवाल, जेवी राय, देवेश, राजेश थे।
राम-लक्षमण की निकाली झांकी
मेजवां। दशहरा कमेटी की ओर से फू लपुर नगर में शुक्रवार की रात श्रीराम लक्ष्मण की झांकी निकाली गई। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता को रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया गया। भक्तों द्वारा जगह-जगह प्रभु श्रीराम की आरती उतारी गई।
वही शंकर तिराहा पर दर्शन करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। रथ के आगे भजन कीर्तन मंडल के कलाकार भजन गाते चल रहे थे। रात में सतरंगी छठा के बीच रथ को आक र्षक रूप दिया गया था। दशहरा मैदान में रथ पहुंचने पर राम लक्ष्मण के बीच संवाद हुआ। दशहरा कमेटी के अध्यक्ष प्रेम कुमार पांडेय ने बताया कि श्रीराम गद्दी तक रथ निकाला जायेगा। 30 सितम्बर को दशहरा मेला लगेगा। एक अक्टूबर की रात में भरत मिलाप का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने हो रहे कार्यक्रम के लिए पुलिस प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
सन्यासी के रूप में निकली राम, लक्ष्मण और सीता की झांकी
सरायमीर। श्रीराम लीला सेवा समिति सरायमीर के तत्वाधान में शुक्रवार को आशु मिश्रा के आवास से राम, लक्ष्मण और माता जानकी की झांकी निकाली गई। तपस्वी के भेष में निकली इस झांकी ने पूरे कस्बे का भ्रमण किया। इस दौरान श्रद्घालू उनके साथ भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे। उनके लिए लोगों द्वारा जगह-जगह जलपान की व्यवस्था की गई थी। रथ का संचालन समिति के सलाहकार सदस्य राजेंद्र मद्धेशिया कर रहे थे। कार्यक्रम का संचालन समिति के उपाध्यक्ष लालबहादुर सेठ, रामेश्वर बरनवाल, राजेश यादव, अमृतलाल, अवधेश, कृष्णकांत सेठ आदि कर रहे थे।