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सबकी जुबां पर किसान...कौन होगा लुभाने में कामयाब
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आजमगढ़ कृषि आधारित और सूबे के सबसे बड़े जनपदों में शुमार है। 50 लाख से ज्यादा आबादी वाले जनपद की दोनों लोकसभा सीटों पर लगभग 3497317 वोटर हैं। इसमें अधिकांश किसान परिवार है। किसानों को लुभाने के लिए सभी दलों ने उन्हें साधना शुरू कर दिया। भाजपा जहां आय दोगुना करने के लिए हुए प्रयास, कर्जमाफी और किसान सम्मान निधि को गिना रही है वहीं, सपा-बसपा देश में किसानों की आत्महत्या को मुद्दा बना रही हैं। कांग्रेस भी किसानों की बदहाली के मुद्दे को लेकर मुखर हैं।
जनपद में वर्ष 20111 की जनगणना के आधार पर सरकारी आंकड़ों में 606570 किसान परिवार हैं। इन किसानों को आधा हेक्टेयर से कम, आधे से एक हेक्टेयेर तक, एक से दो हेक्टेयर तक, दो से चार हेक्टेयर, चार से 10 हेक्टेयर और 10 हेक्टेयर से अधिक के किसानों की श्रेणी में बांटा गया है। सबसे ज्यादा 428146 किसान परिवार आधे हेक्टेयर से कम जोत वाले हैं। ये जनपद के लगभग 112280 हेक्टेर क्षेत्रफल पर खेती करते हैं। आधा से एक हेक्टेयर तक वाले किसान परिवारों की संख्या एक लाख के आसपास है। शहरी किसानों की संख्या चार हजार के आसपास है। जनपद में 150 किसान ऐसे हैं जिनके पास 10 हेक्टेयर से अधिक भूमि हैं। हेक्टेयर किसान शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को अलग-अलग रखा गया है। ऐसे में एक किसान परिवार में चार से छह सदस्य होंगे, जोकि लोकसभा चुनाव में निर्णायक की भूमिका अदा करेंगे। पिछली लोकसभा और प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का जीत का प्रमुख कारण किसानों को ही माना गया था। इस बार भी सत्ता की चाभी इन्हीं किसान परिवारों के हाथों में होगी। इनके मद्दे को उठाकर सभी दलों ने इन्हें पाले में करने के लिए लुभावनी घोषणाओं के साथ ही उन पर डोरे डालना शुरू कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में किसानों को केंद्र बिंदु के रूप में रखा है। वहीं, किसान अभी चुनाव के मुद्दे पर चुप्पी साधकर सभी दलों के बातों और वादों की सुन रही है।
किसानों मतदाताओं की संख्या को देखते हुए भाजपा की ओर से चुनाव से ठीक पहले किसान सम्मान निधि के रूप में प्रति वर्ष छह हजार रुपये तीन किस्तों में भेजने की घोषणा की थी। पहली किस्त के रूप में कई किसानों को धनराशि जारी कर दी गई है। जनपद में लगभग पांच लाख किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही पार्टी के वक्ताओं की ओर से सभाओं में प्रदेश में हुई कर्जमाफी, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हुए विभिन्न प्रयास की बात कह उन्हें लुभाया जा रहा है। गन्ना किसानों को समय से भुगतान कराने की भी बात कही जा रही है। कई मिलों को दोबारा चलाने की बात भी कही जा रही है।
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18 अप्रैल को नामांकन के दौरान सपा मुखिया अखिलेश यादव ने यूरिया की प्रति बोरी से पांच किलो यूरिया चोरी करने की बात कह प्रदेश और केंद्र सरकार को घेरने का काम किया। गन्ना मूल्य और भुगतान को भी गठबंधन की जनसभा में प्रमुख मुद्दे के रूप में रखा जा रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि किसानों के भुगतान की चिंता छोड़ सूबे की सरकार मिल कारोबारियों को रियायत दे रही है। सपाई और बसपाइयों की ओर से अपने कार्यकाल में गन्ना मूल्य वृद्धि की याद दिलाई जा रही है। जनपद की इकलौती सठियांव चीनी मिल को चलाने के श्रेय अपने पास रखा जा रहा है।
कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारी चुनाव से बदहाली के कारण पहले विभिन्न प्रदेशों में किसानों के आत्महत्या का आरोप लगाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। अपनी सभाओं में इसे लेकर लगातार मुद्दा बना रहे हैं। केंद्र सरकार की नीतियों को किसान विरोध बताकर किसानों को साधने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही गन्ना भुगतान और मूल्य वृद्ध भी उनका मुद्दा है।
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जनपद में वर्ष 20111 की जनगणना के आधार पर सरकारी आंकड़ों में 606570 किसान परिवार हैं। इन किसानों को आधा हेक्टेयर से कम, आधे से एक हेक्टेयेर तक, एक से दो हेक्टेयर तक, दो से चार हेक्टेयर, चार से 10 हेक्टेयर और 10 हेक्टेयर से अधिक के किसानों की श्रेणी में बांटा गया है। सबसे ज्यादा 428146 किसान परिवार आधे हेक्टेयर से कम जोत वाले हैं। ये जनपद के लगभग 112280 हेक्टेर क्षेत्रफल पर खेती करते हैं। आधा से एक हेक्टेयर तक वाले किसान परिवारों की संख्या एक लाख के आसपास है। शहरी किसानों की संख्या चार हजार के आसपास है। जनपद में 150 किसान ऐसे हैं जिनके पास 10 हेक्टेयर से अधिक भूमि हैं। हेक्टेयर किसान शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को अलग-अलग रखा गया है। ऐसे में एक किसान परिवार में चार से छह सदस्य होंगे, जोकि लोकसभा चुनाव में निर्णायक की भूमिका अदा करेंगे। पिछली लोकसभा और प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का जीत का प्रमुख कारण किसानों को ही माना गया था। इस बार भी सत्ता की चाभी इन्हीं किसान परिवारों के हाथों में होगी। इनके मद्दे को उठाकर सभी दलों ने इन्हें पाले में करने के लिए लुभावनी घोषणाओं के साथ ही उन पर डोरे डालना शुरू कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में किसानों को केंद्र बिंदु के रूप में रखा है। वहीं, किसान अभी चुनाव के मुद्दे पर चुप्पी साधकर सभी दलों के बातों और वादों की सुन रही है।
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किसानों मतदाताओं की संख्या को देखते हुए भाजपा की ओर से चुनाव से ठीक पहले किसान सम्मान निधि के रूप में प्रति वर्ष छह हजार रुपये तीन किस्तों में भेजने की घोषणा की थी। पहली किस्त के रूप में कई किसानों को धनराशि जारी कर दी गई है। जनपद में लगभग पांच लाख किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही पार्टी के वक्ताओं की ओर से सभाओं में प्रदेश में हुई कर्जमाफी, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हुए विभिन्न प्रयास की बात कह उन्हें लुभाया जा रहा है। गन्ना किसानों को समय से भुगतान कराने की भी बात कही जा रही है। कई मिलों को दोबारा चलाने की बात भी कही जा रही है।
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18 अप्रैल को नामांकन के दौरान सपा मुखिया अखिलेश यादव ने यूरिया की प्रति बोरी से पांच किलो यूरिया चोरी करने की बात कह प्रदेश और केंद्र सरकार को घेरने का काम किया। गन्ना मूल्य और भुगतान को भी गठबंधन की जनसभा में प्रमुख मुद्दे के रूप में रखा जा रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि किसानों के भुगतान की चिंता छोड़ सूबे की सरकार मिल कारोबारियों को रियायत दे रही है। सपाई और बसपाइयों की ओर से अपने कार्यकाल में गन्ना मूल्य वृद्धि की याद दिलाई जा रही है। जनपद की इकलौती सठियांव चीनी मिल को चलाने के श्रेय अपने पास रखा जा रहा है।
कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारी चुनाव से बदहाली के कारण पहले विभिन्न प्रदेशों में किसानों के आत्महत्या का आरोप लगाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। अपनी सभाओं में इसे लेकर लगातार मुद्दा बना रहे हैं। केंद्र सरकार की नीतियों को किसान विरोध बताकर किसानों को साधने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही गन्ना भुगतान और मूल्य वृद्ध भी उनका मुद्दा है।