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डूडा ही करेगा अफोर्डेबल आवास के लाभार्थियों की जांच
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आजमगढ़। विभिन्न प्राधिकरण की ओर से प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत बनने वाले रियायती आवास के लिए आए आवेदनों की जांच स्वयं करने की मांग की गई थी। जिस पर प्रमुख सचिव ने इससे इंकार करते हुए डूडा से ही इसकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर जिलाधिकारी से मैन पावर बढ़वाने के निर्देश जारी किए हैं। जनपद में 432 आवासों के सापेक्ष लगभग 500 आवेदन आए हैं जिसकी जांच होनी है।
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए अफोर्डेबल आवास योजना शुरू की गई है। योजना के तहत 432 आवास बनाने के लिए विकास प्राधिकरण को सिधारी में जमीन आदि उपलब्ध कराई जा चुकी है। प्रस्ताव भी मंजूर हो चुके हैं। इन आवासों के सापेक्ष लगभग 500 आवेदन आए थे। शासनादेश के अनुसार इसे जांच के लिए डूडा को भेजा गया है। काफी समय बीतने के बाद भी आवेदनों की जांच एवं सत्यापन नहीं हो पाया है। इस बीच प्राधिकरणों की ओर से आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को सुझाव दिया गया था कि जांच और सत्यापन में हो रही देरी के मद्देनजर जांच और सत्यापन का कार्य भी स्वयं किया जाए। प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन नितिन रमेश गोकर्ण ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। कहा कि आवेदनों का सत्यापन डूडा की ओर से ही किया जाएगा। यदि डूडा में कार्मिक कम हैं तो कार्मिक बढ़ा कर इसे शीघ्र पूरा कराया जाए। इस बारे में जिलाधिकारी को निर्देशित किया है कि शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन का कार्य पूर्ण कराएं ।
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अफोर्डेबल (रियायती) आवासों के लिए आए आवेदनों की जांच डूडा ही करेगा। शासन की ओर से जल्द सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बाबू सिंह, सचिव एडीए
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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए अफोर्डेबल आवास योजना शुरू की गई है। योजना के तहत 432 आवास बनाने के लिए विकास प्राधिकरण को सिधारी में जमीन आदि उपलब्ध कराई जा चुकी है। प्रस्ताव भी मंजूर हो चुके हैं। इन आवासों के सापेक्ष लगभग 500 आवेदन आए थे। शासनादेश के अनुसार इसे जांच के लिए डूडा को भेजा गया है। काफी समय बीतने के बाद भी आवेदनों की जांच एवं सत्यापन नहीं हो पाया है। इस बीच प्राधिकरणों की ओर से आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को सुझाव दिया गया था कि जांच और सत्यापन में हो रही देरी के मद्देनजर जांच और सत्यापन का कार्य भी स्वयं किया जाए। प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन नितिन रमेश गोकर्ण ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। कहा कि आवेदनों का सत्यापन डूडा की ओर से ही किया जाएगा। यदि डूडा में कार्मिक कम हैं तो कार्मिक बढ़ा कर इसे शीघ्र पूरा कराया जाए। इस बारे में जिलाधिकारी को निर्देशित किया है कि शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन का कार्य पूर्ण कराएं ।
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अफोर्डेबल (रियायती) आवासों के लिए आए आवेदनों की जांच डूडा ही करेगा। शासन की ओर से जल्द सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बाबू सिंह, सचिव एडीए