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28 लाख किताबों की दरकार, मिलीं सिर्फ 2.86 लाख
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आजमगढ़। जिले में 2702 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1720 प्राथमिक, 528 उच्च प्राथमिक एवं 454 कंपोजिट विद्यालय हैं। इसके अलावा 21 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लगभग सवा चार लाख बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें दी जानी है। जिले में कुल 28 लाख 85 हजार 976 पुस्तकें जिले को उपलब्ध कराई जानी है।नए शिक्षा सत्र की शुरुआत अप्रैल महीने में हो गई थी। उस दौरान करीब डेढ़ महीने स्कूल खुले रहे और बच्चों ने बिना नई किताब के पुरानी पुस्तकों से ही पढ़ाई की। इसके बाद गर्मी की छुट्टियां हो गई। गर्मी की छुट्टियों के बाद बीते सोलह जून को विद्यालय खुल गए। स्कूल खुले सवा महीने का समय बीत गया है लेकिन अभी तक जिले को पूरी पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी है। जबकि विभाग के निर्देश के क्रम में नई किताबों की आपूर्ति के लिए क्रयादेश संबंधित प्रकाशकों को बीते जून माह के मध्य में ही जारी किया जा चुका है। हालांकि अब पुस्तकें मिलना शुरू हो गई है। हाल ही में कक्षा-तीन एक लाख 96 हजार 181 पुस्तकें यहां आई है। वहीं दूसरी खेप में 90 हजार 420 पुस्तकें आईं। विभाग की ओर से भले ही इस माह में किताबें मिल जाने का दावा किया जा रहा है लेकिन बीते वर्ष की तरह इस बार भी बच्चों को किताबें देर से ही मिलने की संभावना नजर आ रही है।
प्रधानाध्यापक अवधेश यादव ने कहा कि अप्रैल माह से नए सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक बच्चों को पुस्तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। वहीं हर विषय के पुस्तकों में समय सारणी में दर्शाई गई है कि किस माह में कितने पाठ तक बच्चों को पढ़ाई पूर्ण करनी है। ऐसे में समय सारणी के अनुसार पढ़ाई होना संभव नहीं दिख रहा है। वहीं प्रधानाध्यापक जसवंत कुमार का कहना है कि पुस्तकें न मिलने के कारण बच्चों को पढ़ाने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पढ़ रहा है। आए दिन बच्चे, अभिभावक पुस्तक के बारे में पूछ रहे हैं, पुस्तक कब मिलेगी। जिसका जवाब शिक्षकों के पास कुछ नहीं है। प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार ने कहा कि जूनियर विद्यालय के बच्चों को भी अभी तक किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई है। साढ़े तीन माह से ऊपर का समय बीत चुका है। बच्चे, अभिभावक, शिक्षक पुस्तक ना आने से परेशान है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उधर, तारा प्रसाद ने कहा कि पुस्तक न उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पढ़ रहा है। पुस्तक में समय सारणी बनाई गई है, किस माह में कितने पाठ तक बच्चों के पढाई का कोर्स पूरा होना हो जाना चाहिए। ऐसे में बच्चों का कोर्स बढ़ता जा रहा है।
इस मामले में अतुल कुमार सिंह, बेसिक शिक्षाधिकारी अतुल कुमार ने कहा कि पुस्तकें जिले को मिलनी शुरू हो गई है। आगामी दिनों में और पुस्तकें उपलब्ध हो जाएगी। इनका सत्यापन कराने के बाद जल्द से जल्द बच्चों में इनका वितरण करा दिया जाएगा।
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प्रधानाध्यापक अवधेश यादव ने कहा कि अप्रैल माह से नए सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक बच्चों को पुस्तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। वहीं हर विषय के पुस्तकों में समय सारणी में दर्शाई गई है कि किस माह में कितने पाठ तक बच्चों को पढ़ाई पूर्ण करनी है। ऐसे में समय सारणी के अनुसार पढ़ाई होना संभव नहीं दिख रहा है। वहीं प्रधानाध्यापक जसवंत कुमार का कहना है कि पुस्तकें न मिलने के कारण बच्चों को पढ़ाने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पढ़ रहा है। आए दिन बच्चे, अभिभावक पुस्तक के बारे में पूछ रहे हैं, पुस्तक कब मिलेगी। जिसका जवाब शिक्षकों के पास कुछ नहीं है। प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार ने कहा कि जूनियर विद्यालय के बच्चों को भी अभी तक किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई है। साढ़े तीन माह से ऊपर का समय बीत चुका है। बच्चे, अभिभावक, शिक्षक पुस्तक ना आने से परेशान है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उधर, तारा प्रसाद ने कहा कि पुस्तक न उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पढ़ रहा है। पुस्तक में समय सारणी बनाई गई है, किस माह में कितने पाठ तक बच्चों के पढाई का कोर्स पूरा होना हो जाना चाहिए। ऐसे में बच्चों का कोर्स बढ़ता जा रहा है।
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इस मामले में अतुल कुमार सिंह, बेसिक शिक्षाधिकारी अतुल कुमार ने कहा कि पुस्तकें जिले को मिलनी शुरू हो गई है। आगामी दिनों में और पुस्तकें उपलब्ध हो जाएगी। इनका सत्यापन कराने के बाद जल्द से जल्द बच्चों में इनका वितरण करा दिया जाएगा।
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