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युवाओं को सार्थक दिशा प्रदान करती हैं किताबें
Updated Tue, 11 Dec 2018 12:23 AM IST
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आजमगढ़। नेशनल बुक ट्रस्ट एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल पर शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज परिसर में सोमवार को 19वें आजमगढ़ पुस्तक मेले का उद्घाटन डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला समाज के सभी वर्गों का सृजन मंच है।
उन्होंने कहा कि आजमगढ़ साहित्यकारों की धरती है। जब किताबें आती हैं तो ऐसा महसूस होता है कि रचनाकार खुद जिंदा हो गया है। आजमगढ़ के लोगों ने 1857 से लेकर आजादी तक न सिर्फ संघर्ष किया बल्कि सृजन की नई ऊंचाइयों को छुआ है। प्रिय प्रवास, वोल्गा से गंगा जैसी सैकड़ों रचनाएं आजमगढ़ की विरासत हैं। वर्ष 1883 में शिब्ली नोमानी की ओर से स्थापित ये कैंपस आज के लोकतंत्र का जिंदा उदाहरण है। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय कहा कि किताबें भविष्य को बेहतर रास्ता दिखाती हैं। आईएफएस अधिकारी संजय विस्वाल ने कहा कि किताबें युवाओं को भटकाव की जगह सार्थक दिशा प्रदान करती हैं। प्रधानाचार्य डॉ. नसीम अहमद ने कहा कि बिना पढ़े कोई बेहतर मनुष्य नहीं बन सकता। शिब्ली नेशनल पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ग्यास असद खां ने कहा कि शिब्ली सोसायटी की ओर से संचालित यह मेला सभी विद्यार्थियों के लिए समस्त विचारधाराओं के साक्षात्कार का उत्सव है। डीआईओएस वीके शर्मा ने कहा कि जिले के सभी शिक्षकों के लिए यह मेला शैक्षणिक भ्रमण के लिए एक अवसर की तरह है। इस मौके पर समन्वयक राजीव रंजन, घनश्याम पटेल, जगदीशचन्द्र बरनवाल, उमेर सिद्दकी, डॉ. रविन्द्रनाथ राय, कन्हैयालाल, शेषनाथ राय आदि थे। मेले में करीब 20 प्रकाशकों शिब्ली एकेडमी, नेशनल बुक ट्रस्ट भारत सरकार, प्रकाशन संस्थान, नयी किताब, मेधा बुक्स, किताब घर, उर्दू अकादमी लखनऊ, ज्ञानपीठ, राजकमल, लोकभारती जैसे संस्थानों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा कि आजमगढ़ साहित्यकारों की धरती है। जब किताबें आती हैं तो ऐसा महसूस होता है कि रचनाकार खुद जिंदा हो गया है। आजमगढ़ के लोगों ने 1857 से लेकर आजादी तक न सिर्फ संघर्ष किया बल्कि सृजन की नई ऊंचाइयों को छुआ है। प्रिय प्रवास, वोल्गा से गंगा जैसी सैकड़ों रचनाएं आजमगढ़ की विरासत हैं। वर्ष 1883 में शिब्ली नोमानी की ओर से स्थापित ये कैंपस आज के लोकतंत्र का जिंदा उदाहरण है। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय कहा कि किताबें भविष्य को बेहतर रास्ता दिखाती हैं। आईएफएस अधिकारी संजय विस्वाल ने कहा कि किताबें युवाओं को भटकाव की जगह सार्थक दिशा प्रदान करती हैं। प्रधानाचार्य डॉ. नसीम अहमद ने कहा कि बिना पढ़े कोई बेहतर मनुष्य नहीं बन सकता। शिब्ली नेशनल पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ग्यास असद खां ने कहा कि शिब्ली सोसायटी की ओर से संचालित यह मेला सभी विद्यार्थियों के लिए समस्त विचारधाराओं के साक्षात्कार का उत्सव है। डीआईओएस वीके शर्मा ने कहा कि जिले के सभी शिक्षकों के लिए यह मेला शैक्षणिक भ्रमण के लिए एक अवसर की तरह है। इस मौके पर समन्वयक राजीव रंजन, घनश्याम पटेल, जगदीशचन्द्र बरनवाल, उमेर सिद्दकी, डॉ. रविन्द्रनाथ राय, कन्हैयालाल, शेषनाथ राय आदि थे। मेले में करीब 20 प्रकाशकों शिब्ली एकेडमी, नेशनल बुक ट्रस्ट भारत सरकार, प्रकाशन संस्थान, नयी किताब, मेधा बुक्स, किताब घर, उर्दू अकादमी लखनऊ, ज्ञानपीठ, राजकमल, लोकभारती जैसे संस्थानों ने हिस्सा लिया।
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