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नहर में पानी नहीं, सिंचाई और बुआई दोनों प्रभावित

Tue, 18 Dec 2018 12:57 AM IST
Updated Tue, 18 Dec 2018 12:57 AM IST
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नहर में पानी नहीं, सिंचाई और बुआई दोनों प्रभावित
आजमगढ़। नहरों में पानी न होने से किसानों की रवी फसल की बुआई और सिंचाई दोनों बाधित हैं। कुछ किसान इंजन या ट्यूबवेल के सहारे बोई गई फसल की सिंचाई और खेतों में पानी भर रहे हैं। लेकिन इससे उन पर आर्थिक बोझ ज्यादा पड़ रहा है।
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मेंहनगर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के शारदा सहायक खंड 23 में पिछले दो महीने से पानी नहीं आया है। जिसमें कारण क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के किसानों की बुवाई और सीचांई दोनों प्रभावित है। नहर पर निर्भर किसान जिनके पास पानी का कोई संसाधन न होने से बुआई नहीं कर पा रहे हैँ। 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक गेहूं की बुआई को वैज्ञानिक अच्छा मानते हैं। जबकि तिलहन और दलहन की बुवाई किसान 15 अक्टूबर से शुरू कर देते हैं। लेकिन नहर में पानी नहीं होने से किसानों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। इस बात को लेकर किसानों में रोष व्याप्त है। शारदा सहायक खंड 23 के सहायक अभियंता सत्यदेव राम ने बताया कि अभी नहर में सिल्ट की खुदाई के बाद ही पानी छोड़ा जाना है, जबकि पिछले बार अक्टूबर में पानी छोड़ा गया था। सिल्ट सफाई में मनमानी की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। मेजवां प्रतिनिधि के अनुसार फूलपुर तहसील के अहिरीपुर शारदा सहायक खंड 32 माइनर में पानी न आने से किसान रबी की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। जिसके चलते उनकी खेती पिछड़ रही है। माइनर में कुछ दिन पूर्व सफाई का कार्य शुरू किया गया जो बंद कर दिया गया है। अब तक सिर्फ दो किमी की ही सफाई हो सकी है। पूर्व प्रधान महेंद्र यादव ने बताया कि अभी नहर की दो किमी सफाई होना बाकी है। पानी के लिए कई बार संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। फरिहा प्रतिनिधि के अनुसार शारदा सहायक खंड 32 की उपशाखा असीलपुर बाजार से गुजरी हुई है इस नहर से सैकड़ों गांव के किसानों द्वारा फसल की सिंचाई की जाती है। जिसकी सफाई हुए लगभग महीना बीतने जा रहा है लेकिन नहर में अभी तक पानी नहीं आया है। किसी तरह से किसान गेहूं की बुवाई तो कर लिए लेकिन सिंचाई होना असंभव माना जा रहा है। किसान दयाराम यादव का कहना है कि विभाग ठेकेदारों के माध्यम से नहर की आधी अधूरी सफाई कराकर किसानों को मारने का कार्य कर रहा है। विभागीय अधिकारी इस संबंध में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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