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तीसरे दिन मंदिरों में मां चंद्रघंटा की आराधना को उमड़े भक्त
Updated Sun, 24 Sep 2017 12:23 AM IST
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आजमगढ़। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को मंदिरों में मां के भक्तों ने मां के तीसरे रुप चंद्रघंटा की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। उधर जहानागंज ब्लाक के टाड़ी गांव में स्थित मां परमज्योति धाम पर भी दर्शन पूजन को भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। मान्यता है कि मां के दरबार में मांगी गई सारी मुरादे पूरी होती हैं।
शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटों का पूजन-अर्चन किया गया। मां के दर्शन को मुख्य चौक स्थित दक्षिणमुखी सहित अन्य देवी मंदिरों में भक्त उमड़ पड़े। इस दौरान लग रहे मां के जयकारे, घंटा-घडिय़ाल के आवाज और हवन-पूजन वातावरण मां मय हो गया था। मेहनगर संवाददाता के अनुसार मौली गांव में मां चंडकेश्वरी मंदिर पर सामूहिक नवरात्र पूजा का आयोजन किया गया है। यहां 150 परिवार एक साथ मां की आराधना में जुटे हैं। इस अवसर पर देवराज सिंह, डा. अजयप्रताप सिंह आदि उपस्थित थे। जहानागंज संवाददाता के अनुसार ब्लाक के टाड़ी गांव में स्थित मां परमज्योति के धाम के मान्यता है कि इस स्थान पर मां दुर्गा ने भैंसासुर राक्षस का वध किया था। भैंसासुर के खून की धारा के रूप में बही नदी का जो वर्तमान में भैंसही नदी के नाम से जानी जाती है। वहीं जिस स्थान पर भैंसासुर राक्षस का खून गिरा वह स्थान आज भैंसहा ताल के नाम से जाना जाता है। यह नदी टाड़ी गांव से निकलकर गाजीपुर तक जाती है और वहां बहादुरगंज बाजार के पास तमसा में मिलती है। सैकड़ों वर्षो पूर्व यहां स्थित एक नीम के पेड़ के नीचे भक्त मां की आराधना किया करते थे। बाद में भक्तों ने यहां मां का भव्य मंदिर के निर्माण कराया। निर्माण के दौरान जब खुदाई हो रही थी तो मां की एक प्रतिमा लोगों को दिखाई पड़ी। तब से यह स्थान भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटों का पूजन-अर्चन किया गया। मां के दर्शन को मुख्य चौक स्थित दक्षिणमुखी सहित अन्य देवी मंदिरों में भक्त उमड़ पड़े। इस दौरान लग रहे मां के जयकारे, घंटा-घडिय़ाल के आवाज और हवन-पूजन वातावरण मां मय हो गया था। मेहनगर संवाददाता के अनुसार मौली गांव में मां चंडकेश्वरी मंदिर पर सामूहिक नवरात्र पूजा का आयोजन किया गया है। यहां 150 परिवार एक साथ मां की आराधना में जुटे हैं। इस अवसर पर देवराज सिंह, डा. अजयप्रताप सिंह आदि उपस्थित थे। जहानागंज संवाददाता के अनुसार ब्लाक के टाड़ी गांव में स्थित मां परमज्योति के धाम के मान्यता है कि इस स्थान पर मां दुर्गा ने भैंसासुर राक्षस का वध किया था। भैंसासुर के खून की धारा के रूप में बही नदी का जो वर्तमान में भैंसही नदी के नाम से जानी जाती है। वहीं जिस स्थान पर भैंसासुर राक्षस का खून गिरा वह स्थान आज भैंसहा ताल के नाम से जाना जाता है। यह नदी टाड़ी गांव से निकलकर गाजीपुर तक जाती है और वहां बहादुरगंज बाजार के पास तमसा में मिलती है। सैकड़ों वर्षो पूर्व यहां स्थित एक नीम के पेड़ के नीचे भक्त मां की आराधना किया करते थे। बाद में भक्तों ने यहां मां का भव्य मंदिर के निर्माण कराया। निर्माण के दौरान जब खुदाई हो रही थी तो मां की एक प्रतिमा लोगों को दिखाई पड़ी। तब से यह स्थान भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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