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अटल के जाने से साहित्य जगत को लगा गहारा आघात
Updated Fri, 17 Aug 2018 11:48 PM IST
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आजमगढ़। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक राजनेता के साथ ही साहित्यकार ही थे। उनकी कविताएं आज भी लोगों की जुबान पर हैं। ऐसे में जनपद के साहित्यकारों में भी शोक की लहर है। प्रगतिशील लेखक संघ के जिलाध्यक्ष लालसा लाल तरंग ने कहा कि अटल जी महान नेता के साथ ही मंजे साहित्यकार थे। मैंने हमेशा अपने लेखों में उनकी कविताओं का उदाहरण दिया है। मुझे अच्छी तरह से याद है जब में बिहार के बरौनी में रेलवे विभाग की नौकरी करता था। तभी उनके मुजफ्फर आने की सूचना मिली। मैं उनकी कविताओं का दीवाना था, उन्हें सुनने के लिए पहुंच गया। अटल जी ने अपने संबोधन में कहा था कि जब मैं पटना एअरपोर्ट पर उतरा तो लोगों ने आगाह किया कि मुजफ्फरपुर जरा संभलकर जाइएगा। क्योंकि बिहार में जगह-जगह सिंचाई के लिए कुएं खोदे गए हैं। पांव कहीं किसी कुंए में न पड़े। लेकिन जब मैं यहां पहुंचा तो बहुत शांति मिली। मुझे ज्ञात हुआ कि सरकारी आंकड़ों में सिंचाई के नाम पर इतनी घपलेबाजी की गई है। इस प्रकार अटल जी ने व्यंग्य के जरिए तत्कालीन घोटाले को सबके सामने रखा। साहित्यकार जगदीश प्रसाद बर्नवाल ‘ कुंद’ ने कहा कि अटल देश के सबसे सफल प्रधानमंत्री थे। हिंदी के विकास में भी उनका बहुत बड़ा योगदान है। ‘ कैदी कविराय की कुंडलिया’ और ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ मैंने पढ़ी हैं। एक संपादक के रूप में उनका विशेष योगदान था। वह ‘पांचजन्य’ और ’ ‘राष्ट्रधर्म’ के संपादक भी रहे। संस्कार भारती का बनारस में कार्यक्रम आयोजित था। उस कार्यक्रम में मैं भी शामिल हुआ था। विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उसमें शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में एक मुस्लिम कवि थे जिन्होंने रामरमैया का कविता पाठ किया था। उन्होंने इस कार्यक्रम में बहुत ही ओजपूर्ण भाषण दिया था। उनके निधन से आज हर कोई मर्माहत है। साहित्यकार और शिक्षिका डा. गीता सिंह ने कहा कि अटल जी युगपुरुष थे। उन्होंने जिस तरह की राजनीति की ऐसा नेता मुझे नहीं दिखता। जिस समय इंदिरा गांधी का देहांत हुआ था वह एक बैठक में थे। सूचना मिलते ही बैठक को बीच में ही छोड़ वह उनके पास पहुंच गए। जनता की समस्याओं को वह अपना समझते थे। उन समस्याओं को लेकर सड़क से संसद तक आवाज उठाते थे। साहित्य के क्षेत्र में उनकी रचनाएं मील का पत्थर हैं। उन्होंने हर क्षेत्र और हर विषय पर कविताएं लिखी। उनका जाना राजनीति और साहित्य के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। आज उनके जैसा कोई नेता नहीं है।
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