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सामाजिक चिंतन समारोह में 100 ने ली दीक्षा
Updated Sun, 08 Oct 2017 11:27 PM IST
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लाटघाट। हरैया विकास खंड के झपरापुर बघावर गांव में रविवार को धम्म दीक्षा दिवस, संघ चीवरदान और सामाजिक चिंतन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में 100 लोगों ने दीक्षा ली।
कुशीनगर के भदंत शील प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व सांसद बलिहारी बाबू ने कहा कि धर्म की नींव सील होती है। मनुष्य को सील ग्रहण करना चाहिए। जब सील यानी चरित्र टूटता है तो अपराध होता है। इस अपराध को रोकने के लिए कानून काम करता है। कानून भी सील बढ़ाता है और धर्म भी पर दोनों में अंतर है। कानून सील टूटने के बाद यानी अपराध होने के बाद काम करता है। अगर सील काम करे तो अपराध नहीं होगा।
अध्यक्षता कर रहे भदंत शील प्रकाश ने कहा कि सम्राट अशोक ने धर्म को बढ़ाया। उनमें सील था। सील का मतलब आचरण होता है। जमीन को नापने के लिए जंजीर होती है और स्त्री, पुरुष को नापने के लिए सील होता है। धर्म का गुण है इंसानियत है। बालिकाओं द्वारा धम्म याचना किया गया। कार्यक्रम को परदेशी राम, रामजीत, रामपलट, लालमन, रामप्रवेश, भंते बोधानंद, भंते सुमन ने संबोधित किया। वहीं मुनीब, गुलाबी, समसेर, लालमती, चानमती, महेंद्र, बिमल सहित 100 लोगों ने दीक्षा लिया।
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कुशीनगर के भदंत शील प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व सांसद बलिहारी बाबू ने कहा कि धर्म की नींव सील होती है। मनुष्य को सील ग्रहण करना चाहिए। जब सील यानी चरित्र टूटता है तो अपराध होता है। इस अपराध को रोकने के लिए कानून काम करता है। कानून भी सील बढ़ाता है और धर्म भी पर दोनों में अंतर है। कानून सील टूटने के बाद यानी अपराध होने के बाद काम करता है। अगर सील काम करे तो अपराध नहीं होगा।
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अध्यक्षता कर रहे भदंत शील प्रकाश ने कहा कि सम्राट अशोक ने धर्म को बढ़ाया। उनमें सील था। सील का मतलब आचरण होता है। जमीन को नापने के लिए जंजीर होती है और स्त्री, पुरुष को नापने के लिए सील होता है। धर्म का गुण है इंसानियत है। बालिकाओं द्वारा धम्म याचना किया गया। कार्यक्रम को परदेशी राम, रामजीत, रामपलट, लालमन, रामप्रवेश, भंते बोधानंद, भंते सुमन ने संबोधित किया। वहीं मुनीब, गुलाबी, समसेर, लालमती, चानमती, महेंद्र, बिमल सहित 100 लोगों ने दीक्षा लिया।
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