{"_id":"5b0858234f1c1bf16e8b496f","slug":"101527273507-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं चेते तो तरसेंगे बूंद-बूंद के लिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं चेते तो तरसेंगे बूंद-बूंद के लिए
Updated Sat, 26 May 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
आजमगढ़। पतित पावनी तमसा नदी आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। यहां के लोगों के लिए जीवन दायिनी तमसा अपना अस्तित्व खोकर नाले में तब्दील हो गई है। अगर तमसा विलुप्त हुई तो नगर के लोगों को पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना होगा।
गर्मी के मौसम में पशु-पक्षी, आम जनमानस उमस भरी गर्मी से बेहाल है। हर किसी को प्यास बुझाने के लिए पानी की जरूरत है। लेकिन नगर की जीवनदायिनी कही जाने वाली तमसा आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। इस नदी को बचाने के लिए आज किसी के द्वारा भी आवाज नहीं उठाई जा रही है। नदी को बचाने की बजाए इसके किनारे तक लोगों ने आवास बना लिए हैं। जिसके कारण नदी का स्वरूप बदलता जा रहा है। रही सही कसर नगर पालिका प्रशासन पूरा कर रहा है। नगर पालिका द्वारा नगर से निकलने वाले 22 नालों से गंदे पानी को इसमें छोड़कर इसके जल को प्रदूषित किया जा रहा है। समय-समय पर भारत रक्षा दल, तमसा बचाओ आंदोलन, आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति, जागो युवा संस्थान आदि के द्वारा नदी को बचाने के लिए आंदोलन शुरू किए गए। इनके द्वारा नदी की साफ-सफाई भी की गई। लेकिन शासन और प्रशासन द्वारा इसमें दिलचस्पी न लेने के कारण यह आंदोलन परवान नहीं चढ़ सका। जिसका परिणाम हुआ कि सामाजिक संगठनों ने भी आवाज उठानी बंद कर दी। केंद्र सरकार ने नदियों को आपस में जोड़ने की योजना बनाई लेकिन तमसा को जोड़ने की कोई योजना है इसका कहीं पता नहीं है। वर्तमान में इस गर्मी के मौसम में नरौली पुल से नदी की तलहटी को आसानी से देखा जा सकता है। अगर यही हाल रहा तो कुछ वर्षों में इसका हाल भी पुरानी सरयू के समान हो जाए तो इसमें कोई संदेह नहीं। आज जरूरत है फिर एक प्रयास की, क्योंकि अगर तमसा विलुप्त हुई तो नगर की जीवनरेखा समाप्त हो जाएगी। क्योंकि शहरी क्षेत्र के ज्यादातर तालाब और पोखरे अतिक्रमण का शिकार हो चुके हैं। कुएं पट चुके हैं, जो बचे हैं उनमें पानी ही नहीं है। वैसे भी जनपद के दो ब्लॉक पल्हनी और सठियांव विगत कई सालों से डार्क जोन में चल रहे हैं। अगर समय रहते नहीं चेते तो फिर पानी के लिए जद्दोजहद करनी होगी।
विज्ञापन
00000000000000
हमने अपने संगठन के माध्यम से कई बार तमसा को बचाने के लिए आवाज उठाई। हमने अधिकारियों को और अधिकारियों के माध्यम से शासन को पत्रक भी भेजा। लेकिन उनके द्वारा इस मामले में कोई रूचि नहीं ली गई जिसके कारण हमने इस बारे में सोचना बंद कर दिया। लेकिन अगर जल्द ही नदी के उद्घार के लिए कुछ नहीं किया गया तो इसे विलुप्त होने में भी ज्यादा समय नहीं लगेगा।
विज्ञापन
एसके सत्येन, संयोजक आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति।
000000000000
आज नदी की जो स्थिति है उससे कुछ दिन बाद तमसा का पता नहीं चलेगा। क्योंकि इसको साफ करने वाले कम और गंदा करने वाले ज्यादा हैं। सबसे ज्यादा गंदगी का कारण नगरपालिका है। वह नगर से निकलने वाले कूड़े को इसके किनारे गिराती है और नगर के गंदे पानी को नालों के माध्यम से बिना ट्रीटमेंट के ही नदी में छोड़ती है। इसके लिए राजनीतिक, बुद्धिजीवी और प्रशासन सभी को साथ मिलकर प्रयास करना होगा।
वैभव वर्मा, गीतकार।
000000000000000
नदी की जो हालत है उसके लिए नागरिक ही जिम्मेदार हैं। क्योंकि वह घर से निकलने वाले कूड़े को नदी में फेंकना अपनी शान समझते हैं। नगरपालिका की इसमें सबसे बड़ी भूमिका है। अगर प्रशासन इसमें दिलचस्पी दिखाए तो नदी को फिर से पुराने रूप में लौटाया जा सकता है। इसकी सफाई सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके लिए आइए एक बार हम सब मिलकर प्रयास करें।
रज्जन वर्मा, समाजसेवी।
000000000000000000
सबसे पहले प्रशासन से अनुरोध है कि वह नगरपालिका को नदी के किनारे कूड़ा गिराने से रोके। इसमें गिरने वाले नालों के गंदे पानी के ट्रीटमेंट की व्यवस्था करे। तमसा नगर की जीवनरेखा है लेकिन लोग खुद ही इसे मिटाने पर लगे हैं। लोगों ने इसके किनारे तक बिल्डिंगें बना ली हैं। लेकिन अगर तमसा अवरुद्घ हुई या विलुप्त हुई तो इसका खामियाजा सबको भुगतना होगा। इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है कि तमसा को बचाने के लिए एक प्रयास करें।
अतुल, प्रयास संस्था।