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गर्मी में करें खेत की गहरी जुताई, दूर करें खर-पतवार
Updated Mon, 30 Apr 2018 11:44 PM IST
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आजमगढ़। गेहूं की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। इस समय किसानों के खेत खाली पड़े हैं। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि गहरी जुताई कर लें। विशेषज्ञों का मानें तो गर्मी में खेत की गहरी जुताई खरीफ के लिए फायदेमंद है बशर्ते कि ये तय समय पर हो।
कोटवा स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डा. एलसी वर्मा ने बताया कि गर्मी की जुताई से रबी या जायद की फसलों पर लगे हुए हानिकारक कीटों के अंडे या लार्वा, जो दरारों में छिपे होते हैं, मई-जूून की तेज धूप से नष्ट हो जाते हैं। इससे खेत कीट-पतंगों से सुरक्षित हो जाता है एवं अगली फसल में कीटों के प्रकोप की संभावना कम हो जाती है। साथ ही साथ खर-पतवार के बीज अधिक गहराई में पहुंच नहीं पाते।
कीटनाशकों के प्रभाव से मुक्ति
रबी या खरीफ फसलों में प्रयोग किए गए कीट और खर-पतवार नाशकों का असर जमीन में गहराई तक हो जाता है। गर्मी में जुताई कर देने से खेत में उनका प्रभाव खत्म हो जाता है। तीव्र ऊर्जा और प्रकाश से उक्त जहरीले रसायन विघटित हो जाते हैं एवं उनका खेत में असर नहीं रह जाता है। इसी तरह प्रयुक्त किए गए रासायनिक उर्वरकों का 65 प्रतिशत अंश अघुलनशील अवस्था में खेत में अवशेष के रूप में पड़ा रह जाता है। ये धीरे-धीरे खेत को बंजर बनाता जाता है। गर्मी की जुताई से सूर्य की तेज धूप से यह रसायन विघटित होकर घुलनशील उर्वरकों में परिवर्तित हो जाते हैं, जो अगली फसल को पोषण देते हैं।
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मिट्टी में वायु संचार
बार-बार ट्रैक्टर जैसे भारी वाहनों से जुताई एवं सिंचाई करने से मिट्टी के कणों के बीच का खाली स्थान कम हो जाता है। खेेत की मिट्टी सख्त और कठोर हो जाती है। इससे मृदा में वायु का संचार अवरुद्ध हो जाता है, जिससे उसकी उर्वरता कम हो जाती है। गर्मी की जुताई से मिट्टी की नमी खत्म होने लगती है और कणों के बीच का खाली स्थान बढ़ जाता है, अर्थात जमीन पोली हो जाती है। इससे उसमें वायु का संचार होने लगता है, जो फसल के स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है।
जल धारण क्षमता का विकास
गर्मी की जुताई से खेत की नमी काफी गहराई तक सूख जाती है। मिट्टी के सुराख खुल जाने से वर्षा जल बहुतात से जमीन में सोख लिया जाता है। इससे मिट्टी में जल धारण क्षमता बढ़ जाती है। नमी पर्याप्त मात्रा में खेत में संचित रहती है। यह नमी खरीफ के फसल उत्पादन में काम आती है।
ढाल के विपरीत करें जुताई
आजमगढ़। गर्मी के समय में खेत की जुताई खेत के ढाल के विपरीत करें। इससे वर्षा का जल ज्यादा से ज्यादा खेत में अवशोषित होगा। भूमि का कटाव रोकने में भी मदद मिलेगी। हल्की और रेतीली भूमि में ज्यादा जुताई न करें। क्योंकि इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और हवा तथा बरसात से मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है। खेत में 15 अप्रैल से 15 मई तक गहरी जुताई करें। कम से कम 20 से 30 सेमी गहरा हल चलाएं। खेत में खरपतवार होने की स्थिति में 10 से 15 दिन के अंतराल पर जुताई को दोहराएं। खेत में कीट-पतंगे नष्ट करने के लिये सुबह 7 से 11 बजे तक और शाम चार से छह बजे तक जुताई करें। गहरी जुताई से आने वाली फसल की जड़े अंतिम समय तक खराब नहीं होगी और फसलों में पकाव भी अच्छा होगा।
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कोटवा स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डा. एलसी वर्मा ने बताया कि गर्मी की जुताई से रबी या जायद की फसलों पर लगे हुए हानिकारक कीटों के अंडे या लार्वा, जो दरारों में छिपे होते हैं, मई-जूून की तेज धूप से नष्ट हो जाते हैं। इससे खेत कीट-पतंगों से सुरक्षित हो जाता है एवं अगली फसल में कीटों के प्रकोप की संभावना कम हो जाती है। साथ ही साथ खर-पतवार के बीज अधिक गहराई में पहुंच नहीं पाते।
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कीटनाशकों के प्रभाव से मुक्ति
रबी या खरीफ फसलों में प्रयोग किए गए कीट और खर-पतवार नाशकों का असर जमीन में गहराई तक हो जाता है। गर्मी में जुताई कर देने से खेत में उनका प्रभाव खत्म हो जाता है। तीव्र ऊर्जा और प्रकाश से उक्त जहरीले रसायन विघटित हो जाते हैं एवं उनका खेत में असर नहीं रह जाता है। इसी तरह प्रयुक्त किए गए रासायनिक उर्वरकों का 65 प्रतिशत अंश अघुलनशील अवस्था में खेत में अवशेष के रूप में पड़ा रह जाता है। ये धीरे-धीरे खेत को बंजर बनाता जाता है। गर्मी की जुताई से सूर्य की तेज धूप से यह रसायन विघटित होकर घुलनशील उर्वरकों में परिवर्तित हो जाते हैं, जो अगली फसल को पोषण देते हैं।
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मिट्टी में वायु संचार
बार-बार ट्रैक्टर जैसे भारी वाहनों से जुताई एवं सिंचाई करने से मिट्टी के कणों के बीच का खाली स्थान कम हो जाता है। खेेत की मिट्टी सख्त और कठोर हो जाती है। इससे मृदा में वायु का संचार अवरुद्ध हो जाता है, जिससे उसकी उर्वरता कम हो जाती है। गर्मी की जुताई से मिट्टी की नमी खत्म होने लगती है और कणों के बीच का खाली स्थान बढ़ जाता है, अर्थात जमीन पोली हो जाती है। इससे उसमें वायु का संचार होने लगता है, जो फसल के स्वास्थ्य के लिये अच्छा होता है।
जल धारण क्षमता का विकास
गर्मी की जुताई से खेत की नमी काफी गहराई तक सूख जाती है। मिट्टी के सुराख खुल जाने से वर्षा जल बहुतात से जमीन में सोख लिया जाता है। इससे मिट्टी में जल धारण क्षमता बढ़ जाती है। नमी पर्याप्त मात्रा में खेत में संचित रहती है। यह नमी खरीफ के फसल उत्पादन में काम आती है।
ढाल के विपरीत करें जुताई
आजमगढ़। गर्मी के समय में खेत की जुताई खेत के ढाल के विपरीत करें। इससे वर्षा का जल ज्यादा से ज्यादा खेत में अवशोषित होगा। भूमि का कटाव रोकने में भी मदद मिलेगी। हल्की और रेतीली भूमि में ज्यादा जुताई न करें। क्योंकि इससे मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और हवा तथा बरसात से मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है। खेत में 15 अप्रैल से 15 मई तक गहरी जुताई करें। कम से कम 20 से 30 सेमी गहरा हल चलाएं। खेत में खरपतवार होने की स्थिति में 10 से 15 दिन के अंतराल पर जुताई को दोहराएं। खेत में कीट-पतंगे नष्ट करने के लिये सुबह 7 से 11 बजे तक और शाम चार से छह बजे तक जुताई करें। गहरी जुताई से आने वाली फसल की जड़े अंतिम समय तक खराब नहीं होगी और फसलों में पकाव भी अच्छा होगा।