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भीड़ ने तोड़ी बैरिकेडिंग और कुर्सियां, अव्यवस्था
Updated Wed, 30 Aug 2017 11:27 PM IST
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आजमगढ़। आयोजकों की ओर से शहीद मेला कार्यक्रम को लेकर काफी पहले से तैयारियां की जा रही थी। लेकिन कार्यक्रम में काफी दुर्व्यवस्था दिखीं। भीड़ के दबाव से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग टूट गया । सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ी। हालांकि उनके लिए अलग से व्यवस्था की गई थी लेकिन वहां तक भी लोग घुस गए थे। पूरे पंडाल में पुलिस का कहीं पता नहीं था। पुलिस और प्रशासन हेलीपैड से लेकर मंच तक पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगा रहा।
शहादत दिवस कार्यक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आने वाली भीड़ की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने पंडाल में 20 हजार कुर्सियां लगवाईं थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया पंडाल छोटा पड़ता गया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जौनपुर, बलिया, मऊ और अंबेडकर नगर आदि से भी समर्थक पहुंचे थे। हर कोई मंच तक पहुंचना चाहता था। लोगों को संभालने के लिए पंडाल में न तो पुलिस की व्यवस्था थी और ना ही सपा का कोई नेता या कार्यकर्ता ही था। परिणाम यह हुआ कि पंडाल में की गई बैरिकेडिंग धराशाई हो गई। पंडाल में लोग एक दूसरे के ऊपर लदे हुए थे। सबसे बुरी हालत कार्यक्रम में शरीक होने पहुंची महिलाओं की थी। हालांकि उनके लिए अलग से बैठने के लिए जगह बनाई गई थी। लेकिन लोग महिलाओं के बैठने के लिए बनाई गई जगह पर भी घुसे हुए थे। वहीं पुलिस प्रशासन को आम लोगों की कोई फिक्र नहीं थी। इसलिए पुलिस प्रशासन पंडाल को छोड़कर सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगा था। कार्यक्रम स्थल पर पानी की व्यवस्था भी नहीं थी जिसके कारण उमस भरी गर्मी में लोग प्यास से व्याकुल दिखे। कई महिलाएं अपने बच्चों को लेकर पहुंची। प्यासे बच्चे रो रहे थे।
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शहादत दिवस कार्यक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आने वाली भीड़ की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने पंडाल में 20 हजार कुर्सियां लगवाईं थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया पंडाल छोटा पड़ता गया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जौनपुर, बलिया, मऊ और अंबेडकर नगर आदि से भी समर्थक पहुंचे थे। हर कोई मंच तक पहुंचना चाहता था। लोगों को संभालने के लिए पंडाल में न तो पुलिस की व्यवस्था थी और ना ही सपा का कोई नेता या कार्यकर्ता ही था। परिणाम यह हुआ कि पंडाल में की गई बैरिकेडिंग धराशाई हो गई। पंडाल में लोग एक दूसरे के ऊपर लदे हुए थे। सबसे बुरी हालत कार्यक्रम में शरीक होने पहुंची महिलाओं की थी। हालांकि उनके लिए अलग से बैठने के लिए जगह बनाई गई थी। लेकिन लोग महिलाओं के बैठने के लिए बनाई गई जगह पर भी घुसे हुए थे। वहीं पुलिस प्रशासन को आम लोगों की कोई फिक्र नहीं थी। इसलिए पुलिस प्रशासन पंडाल को छोड़कर सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगा था। कार्यक्रम स्थल पर पानी की व्यवस्था भी नहीं थी जिसके कारण उमस भरी गर्मी में लोग प्यास से व्याकुल दिखे। कई महिलाएं अपने बच्चों को लेकर पहुंची। प्यासे बच्चे रो रहे थे।
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