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Ayodhya News: बीस साल बाद घूस लेने वाला दरोगा सबूत के अभाव में बरी

Fri, 24 Jul 2026 08:26 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 08:26 PM IST
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Twenty years later, the bribe-taking inspector was acquitted due to lack of evidence
अयोध्या। आपसी विवाद में दिए गए प्रार्थना पत्र पर गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की धमकी देकर तीन हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोपी दरोगा सुरेंद्र पाल को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया। यह फैसला विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट रजत वर्मा ने सुनाया है।
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न्यायाधीश ने अदालत में विरोधाभासी बयान दिए जाने के बाबत शिकायतकर्ता अमर बहादुर सिंह के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस भेजे जाने का निर्देश पारित किया है। अभियोजन के अनुसार जनपद बाराबंकी के थाना सतरिख क्षेत्र के नरौली गांव निवासी अमर बहादुर सिंह का विवाद जीत बहादुर सिंह से हो गया। बांस की कोठी पर कब्जा करने को लेकर हुए विवाद के बाबत जीत बहादुर ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया। सतरिख थाने पर तैनात दरोगा सुरेंद्र पाल को जांच मिलने पर अमर बहादुर के पिता गुरु प्रसाद को थाना पर ले जाया गया। रास्ते में दरोगा सुरेंद्र पाल ने तीन हजार रुपये की मांग की। रकम न मिलने पर जेल भेज देने की धमकी दी गई। थाने पर ले जाकर जेल भेज देने का भय दिखाकर तीन हजार रुपये देने का दबाव बनाया गया। एक हजार रुपये देने की बात तय होने पर गुरु प्रसाद को थाना से छोड़ा गया।
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अमर बहादुर की ओर से भ्रष्टाचार निवारण कार्यालय में प्रार्थना पत्र देने पर ट्रैक टीम का गठन किया गया। रश्मि सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने 9 सितंबर को शाम 6:30 बजे सतरिख रोड पर एक नाई की दुकान के सामने से एक हजार रुपये रिश्वत के नोट के साथ सुरेंद्र पाल को गिरफ्तार किया। मामले की विवेचना के बाद लखनऊ जिले के थाना गुड़ंबा क्षेत्र के सुभाष नगर निवासी सुरेंद्र पाल के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपों से पलटा

अदालत में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता अमर बहादुर सिंह दर्ज कराई गई रिपोर्ट व लगाए गए आरोपों से पलट गया। अदालत में बयान दर्ज कराया कि दरोगा सुरेंद्र पाल को ट्रैप टीम ने उसके सामने नहीं पकड़ा है और न ही जीत बहादुर से कोई विवाद हुआ था। अभियोजन पक्ष से ट्रैप टीम प्रभारी रश्मि सिंह, आईपीएस प्रशांत सिंह सहित छह गवाह परीक्षित कराए गए। न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद तथ्यों एवं शिकायतकर्ता के की ओर से विरोधाभासी बयान देने के आधार पर आरोपी दरोगा सुरेंद्र पाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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