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Ayodhya News: अयोध्या में घर-घर मंदिर, अब हर मंदिर में गेस्ट हाउस

Fri, 23 May 2025 10:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Fri, 23 May 2025 10:33 PM IST
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There is a temple in every house in Ayodhya, now every temple has a guest house
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में मंदिरों की परंपरा और वेद पाठी ब्राह्मणों सहित छात्रों की उपस्थिति कभी आध्यात्मिक संस्कृति की आत्मा मानी जाती थी। हर मंदिर में वेद पाठ होता था और वेद पाठी विद्यार्थी वहीं रहकर धार्मिक शिक्षा प्राप्त करते थे, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अयोध्या में घर-घर मंदिर की परंपरा तो बनी रही, लेकिन इन मंदिरों के भीतर की आत्मा, यानी वेदपाठी अब गायब होते जा रहे हैं। अब वे मंदिरों के बाहर लगे गेस्ट हाउस बोर्डाें की परछाई में खो गए हैं।
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बदलते समय और बढ़ते धार्मिक पर्यटन की व्यवस्था ने रामनगरी के अधिकांश मंदिरों के कमरों को गेस्ट हाउस, होम स्टे में तब्दील कर दिया है। अयोध्या धाम में 1500 से अधिक होम स्टे पंजीकृत हैं। अधिकांश मठ-मंदिरों के कमरे अब एसी रूम में तब्दील हो गए हैं। हालांकि अयोध्या के कुछ मंदिर अभी भी पुरातन परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कुछ चुनिंदा मंदिरों में आज भी वेद पाठ करते हुए, वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए विद्यार्थी मिल जाएंगे। एक वेद पाठी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले मंदिर हमारा घर होता था। गुरु वहीं सिखाते थे, भोजन-निवास वहीं था। लेकिन अब हमें बाहर खोजना पड़ता है कि कहां रूकें। अब अयोध्या पहले की तुलना में महंगी हो गई है।
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संस्कृत के आचार्य श्रीनिवास शास्त्री कहते हैं कि जरूरत है कि मंदिर प्रबंधन, समाज और सरकार मिलकर वेद पाठी विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रावधान करे, ताकि अयोध्या की आत्मा फिर से वेदों की ध्वनि में गूंजे और मंदिर केवल पत्थरों के नहीं, परंपरा के भी वाहक बन सकें।
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इनसेेट
- विनोद पाठक कहते हैं कि बाबा, बंदर और विद्यार्थी की नगरी की वास्तविकता कहीं गुम सी हो गई है। पूर्व में जहां प्रयागराज के बाद अयोध्या दूसरे प्रमुख शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित हो रही थी और हजारों विद्यार्थी व उनके परिवार पढ़ाई के लिए यहां रहा करते थे। आज नवीन विकसित और महंगी अयोध्या से वो सभी नदारद हैं, क्योंकि अब उनके रहने के लिए यहां कमरे ही नहीं हैं। सभी गेस्ट हाउस बन चुके हैं ।

- जानकी महल के पुजारी पंकज मिश्र बताते हैं कि नव्य और भव्य अयोध्या के चकाचौंध में लोगों को न तो अपने गुरु का आश्रम मिल रहा है और न ही उन्हें वह अयोध्या ही दिखाई पड़ती है, जिसमें उनकी आत्मा तृप्ति का अनुभव करती थी। कहा जाता है कि अयोध्या के घर-घर में मंदिर है लेकिन आज अयोध्या के हर मंदिर में गेस्ट हाउस है।
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