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Ayodhya News: तैनाती के बाद से ही विवादों से घिरा रहा प्राचार्य का कार्यकाल
Wed, 27 Nov 2024 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 27 Nov 2024 12:48 AM IST
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अयोध्या। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार का कार्यकाल तैनाती के बाद से ही विवादों से घिरा रहा है। तैनाती के कुछ ही समय बाद मेहदावल के विधायक की शिकायत पर भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार समेत अन्य मामलों की जांच बैठी। सिद्धार्थनगर के एक अन्य व्यक्ति की शिकायत पर लोकायुक्त की जांच भी शुरू हुई। इनके अलावा हंगामों, विरोध प्रदर्शनों आदि का दौर भी लगातार चला। इन सबके बीच अब विजिलेंस की जांच भी शुरू होने से कॉलेज में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि प्राचार्य इसे साजिश करार देते हुए किसी तरह के भ्रष्टाचार से इंकार कर रहे हैं।
मेहदावल के विधायक ने की थी शिकायत
सात फरवरी, 2024 को मेहदावल के विधायक और विधान मंडल दल के नेता अनिल कुमार त्रिपाठी ने महानिदेशक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पत्र देकर प्राचार्य के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। पत्र के जरिए भर्ती और दवा की निविदा में व्यापक भ्रष्टाचार और पीओसीटी से हो रही जांच को बंद कराकर अनाधिकृत रूप से क्लोज्ड सिस्टम रीजेंट वाली जांच मशीनें को दान कराकर उनके रीजेंट्स के माध्यम से सरकारी धन की लूट की योजना बनाने समेत अन्य आरोप लगाए गए थे। वहीं, वेंडरों से बिल भुगतान में अवैध वसूली के भी आरोप लगे थे। नौ फरवरी को महानिदेशक ने इसकी आख्या मांगी थी।
लोकायुक्त में भी हुई थी शिकायत
सिद्धार्थनगर निवासी सतीश चंद्र ने प्राचार्य के खिलाफ निजी अस्पतालों से मिलीभगत करके आईसीयू बंद करने, वार्ड बॉय की भर्ती में एक-एक लाख रुपये लेने समेत अन्य आरोप लगाकर लोकायुक्त में शिकायत की थी। लोकायुक्त प्रशासन ने प्रमुख सचिव को कमेटी बनाकर जांच का निर्देश दिया था। प्रमुख सचिव ने 24 मई तक जांच रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद हाई पावर कमेटी मेडिकल कॉलेज पहुंची और विभिन्न बिंदुओं पर जांच की।
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14 अगस्त को बैठी मजिस्ट्रेटी जांच
मेडिकल कॉलेज के संविदाकर्मी प्रभुनाथ मिश्रा की मौत के बाद परिजनों ने प्राचार्य पर उत्पीड़न करने, आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य आरोप लगाए थे। जिले के कई सामाजिक संगठनों ने भी घटना का विरोध करके प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की तो जिलाधिकारी ने 14 अगस्त को मजेस्ट्रेटी जांच बैठाई। रेजीडेंट मजिस्ट्रेट संदीप श्रीवास्तव को जांच सौंपी गई। हालांकि अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई।
मारपीट व हंगामों से बाधित रहीं सेवाएं
19 जून को एक मरीज की मौत के बाद ईसीजी करने को लेकर तीमारदारों ने डॉक्टर को थप्पड़ मारा तो हंगामा खड़ा हो गया। एक घंटे तक ओपीडी समेत अन्य सेवाएं बाधित रहीं। 29 जुलाई को एमबीबीएस छात्रा से कर्मचारी का विवाद हुआ। इसके बाद छात्रों ने लगभग तीन घंटे तक हंगामा काटा। सात अगस्त को लेबर रूम में एक तीमारदार ने महिला चिकित्सक को थप्पड़ जड़ दिया। अगले दिन वे लोग ओपीडी में एकत्रित हुए और धरना-प्रदर्शन करके हंगामा काटा। इस दौरान ओपीडी व अन्य सेवाएं बाधित रहीं और मरीजों को समस्याएं झेलनी पड़ीं।
साजिश के तहत की जा रहीं शिकायतें
कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही सेवाएं और सुविधाएं बढ़ाने के लिए कई परिवर्तन किए गए। इससे कुछ लोगों का व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध नहीं हुआ तो वह साजिश करके शिकायतें कर रहे हैं। लेकिन सांच को आंच नहीं। हर जांच से बेदाग बरी होंगे।
-डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेहदावल के विधायक ने की थी शिकायत
सात फरवरी, 2024 को मेहदावल के विधायक और विधान मंडल दल के नेता अनिल कुमार त्रिपाठी ने महानिदेशक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पत्र देकर प्राचार्य के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। पत्र के जरिए भर्ती और दवा की निविदा में व्यापक भ्रष्टाचार और पीओसीटी से हो रही जांच को बंद कराकर अनाधिकृत रूप से क्लोज्ड सिस्टम रीजेंट वाली जांच मशीनें को दान कराकर उनके रीजेंट्स के माध्यम से सरकारी धन की लूट की योजना बनाने समेत अन्य आरोप लगाए गए थे। वहीं, वेंडरों से बिल भुगतान में अवैध वसूली के भी आरोप लगे थे। नौ फरवरी को महानिदेशक ने इसकी आख्या मांगी थी।
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लोकायुक्त में भी हुई थी शिकायत
सिद्धार्थनगर निवासी सतीश चंद्र ने प्राचार्य के खिलाफ निजी अस्पतालों से मिलीभगत करके आईसीयू बंद करने, वार्ड बॉय की भर्ती में एक-एक लाख रुपये लेने समेत अन्य आरोप लगाकर लोकायुक्त में शिकायत की थी। लोकायुक्त प्रशासन ने प्रमुख सचिव को कमेटी बनाकर जांच का निर्देश दिया था। प्रमुख सचिव ने 24 मई तक जांच रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद हाई पावर कमेटी मेडिकल कॉलेज पहुंची और विभिन्न बिंदुओं पर जांच की।
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14 अगस्त को बैठी मजिस्ट्रेटी जांच
मेडिकल कॉलेज के संविदाकर्मी प्रभुनाथ मिश्रा की मौत के बाद परिजनों ने प्राचार्य पर उत्पीड़न करने, आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य आरोप लगाए थे। जिले के कई सामाजिक संगठनों ने भी घटना का विरोध करके प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की तो जिलाधिकारी ने 14 अगस्त को मजेस्ट्रेटी जांच बैठाई। रेजीडेंट मजिस्ट्रेट संदीप श्रीवास्तव को जांच सौंपी गई। हालांकि अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई।
मारपीट व हंगामों से बाधित रहीं सेवाएं
19 जून को एक मरीज की मौत के बाद ईसीजी करने को लेकर तीमारदारों ने डॉक्टर को थप्पड़ मारा तो हंगामा खड़ा हो गया। एक घंटे तक ओपीडी समेत अन्य सेवाएं बाधित रहीं। 29 जुलाई को एमबीबीएस छात्रा से कर्मचारी का विवाद हुआ। इसके बाद छात्रों ने लगभग तीन घंटे तक हंगामा काटा। सात अगस्त को लेबर रूम में एक तीमारदार ने महिला चिकित्सक को थप्पड़ जड़ दिया। अगले दिन वे लोग ओपीडी में एकत्रित हुए और धरना-प्रदर्शन करके हंगामा काटा। इस दौरान ओपीडी व अन्य सेवाएं बाधित रहीं और मरीजों को समस्याएं झेलनी पड़ीं।
साजिश के तहत की जा रहीं शिकायतें
कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही सेवाएं और सुविधाएं बढ़ाने के लिए कई परिवर्तन किए गए। इससे कुछ लोगों का व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध नहीं हुआ तो वह साजिश करके शिकायतें कर रहे हैं। लेकिन सांच को आंच नहीं। हर जांच से बेदाग बरी होंगे।
-डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज