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Ayodhya News: ड्रैगन फ्रूट में छिपा है बीमारियों से लड़ने का राज

Mon, 07 Sep 2026 10:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 07 Sep 2026 10:54 PM IST
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The secret to fighting diseases lies hidden in dragon fruit.
दुकान में रखा ड्रैगन फ्रूट

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अयोध्या। बाहर से लाल-गुलाबी और भीतर से सफेद या लाल दिखने वाला ड्रैगन फ्रूट अब सिर्फ 300 रुपये किलो वाला महंगा फल नहीं रह गया है। अवध विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने इसमें ऐसे जैव सक्रिय तत्व पाए हैं, जो शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
शोध में सामने आया कि ड्रैगन फ्रूट का लाल रंग बेटालेन नामक तत्व की वजह से होता है। यह शरीर में सूजन पैदा करने वाली प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें क्वेरसेटिन, पॉलीफेनोल और कैरोटिनॉयड जैसे एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी पाए गए हैं। ये तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
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प्रो. नीलम पाठक ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट कोई दवा नहीं है और इसके सेवन से मधुमेह या हृदय रोग ठीक होने का दावा नहीं किया जा सकता। हालांकि, पहले हुए कुछ शोधों में मधुमेह के मरीजों में रक्त शर्करा के नियंत्रण और नसों के बेहतर कामकाज के संकेत मिले हैं।
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शोध का लाभ किसानों को भी मिल सकता है। इससे उन्हें ड्रैगन फ्रूट की बेहतर किस्म चुनने में मदद मिलेगी। साथ ही, भविष्य में इस फल से पाउडर, जूस और अन्य पोषण उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

यह शोध उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूपी-सीएसटी), लखनऊ के माध्यम से वित्तपोषित परियोजना ‘मार्फोलॉजीकल, बायोकेमिकल एंड मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग ऑफ ड्रैगन फ्रूट एंड इलुसिडेशन ऑफ बायोएक्टिव पोटेंशियल’ के अंतर्गत किया गया है। विश्वविद्यालय के जैव रसायन विभाग की प्रो. नीलम पाठक, डॉ. मणिकांत त्रिपाठी, डॉ. पंकज सिंह और शोध छात्रा तृप्ति शुक्ला की टीम ने दो साल तक इस पर काम किया।

इसे दवा समझकर न खाएं

शोधार्थियों के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट को दवा समझकर नहीं, बल्कि सामान्य फल की तरह खाना चाहिए। इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है। इसमें विटामिन और खनिज भी पाए जाते हैं। मधुमेह, मोटापे या हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए इसे संतुलित आहार के हिस्से के रूप में सप्ताह में दो-तीन बार शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि के लिए अभी बड़े स्तर पर मानव परीक्षण की आवश्यकता है।
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