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Ayodhya News: दो तिहाई बहुमत से तय होगा चंपत राय व डॉ़ अनिल का भविष्य

Wed, 01 Jul 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Wed, 01 Jul 2026 11:16 PM IST
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The future of Champat Rai and Dr. Anil will be decided by a two-thirds majority
नितिन मिश्र
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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद पहली बार छह जुलाई को होने जा रही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर अंतिम फैसला ट्रस्ट के बायलॉज के तहत होगा और इसके लिए दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य होगा।
राम मंदिर ट्रस्ट के बायलॉज में किसी पदाधिकारी को केवल उसके पद एवं दायित्व से मुक्त किए जाने का प्रावधान है। यानी यदि महासचिव पद से चंपत राय को मुक्त भी किया जाता है, तब भी वे ट्रस्ट के आजीवन सदस्य बने रह सकते हैं। यही व्यवस्था अन्य पदाधिकारियों पर भी लागू होती है। अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक भी टिकी हैं। ट्रस्ट में वर्तमान में 14 सदस्य हैं। जिसमें से दो ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में बैठक में 12 सदस्यों की ही राय ली जाएगी। इसके लिए वोटिंग कराई जाएगी।
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पूर्व की बैठकों में आमंत्रित सदस्य के रूप में संघ के भैया जी जोशी, विहिप के दिनेश चंद्र भी शामिल होते रहे हैं। इस बैठक में भी इनके शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा इस बार बैठक में विहिप के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा और केंद्रीय संगठन मंत्री मिलिंद परांडे भी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में इनकी भी वोटिंग कराई जाएगी, जो निर्णायक साबित हो सकती है। यदि दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला तो दोनों के इस्तीफे स्वीकार नहीं होंगे और वे अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे।
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इनसेट
राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव की जरूरत नहीं- दिनेंद्र दास
बैठक में राम मंदिर के ट्रस्टियों का रुख अहम होगा। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्टी और निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने खामियां तो गिनाईं थीं लेकिन यह भी कहा था कि चंपत राय की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल नहीं है। वहीं ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास कहते हैं कि ट्रस्ट में बदलाव की जरूरत नहीं है, चंपत राय ने मंदिर निर्माण में अहम योगदान दिया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ, युगपुरुष परमानंद, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और कृष्ण मोहन की राय पर सबकी निगाहें होंगी। सूत्रों के अनुसार इनमें से कुछ चंपत राय के पक्ष में हैं तो कुछ परिवर्तन की बात कर सकते हैं।



वोटिंग से चयनित हुई थी रामलला की मूर्ति
रामलला की मूर्ति के चयन के समय भी वोटिंग प्रक्रिया का पालन किया गया था। उस समय ट्रस्ट में 15 सदस्य थे और 11 ट्रस्टियों ने कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज की प्रतिमा के पक्ष में मतदान किया था। दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद उसी प्रतिमा का चयन हुआ, जो आज राम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।
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