{"_id":"67bb3aedc16ee11a520f5839","slug":"texture-creation-opens-the-door-to-new-possibilities-ayodhya-news-c-13-1-lko1045-1089518-2025-02-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: टेक्सचर क्रिएशन ने खोले नई संभावनाओं के द्वार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: टेक्सचर क्रिएशन ने खोले नई संभावनाओं के द्वार
विज्ञापन
अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने कहा कि टेक्सचर क्रिएशन एक महत्वपूर्ण कौशल है। यह कला, फैशन और इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। रचनात्मकता और नवाचार के माध्यम से छात्र इस तकनीक का उपयोग कर अपने कार्यों में अनूठापन जोड़ सकते हैं।
प्रो. पाठक फैशन डिजाइनिंग एवं गारमेंट टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम में टेक्सचर क्रिएशन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में बोल रही थीं। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने टेक्सचर निर्माण की विभिन्न तकनीकी पक्षों को जाना। उन्हें व्यावहारिक उपयोगिता के बारे में सिखाया गया और रचनात्मक प्रयोगों पर जोर दिया गया।
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. सुरेंद्र मिश्र ने कहा कि टेक्सचर केवल एक सजावटी तकनीक नहीं है, बल्कि यह किसी भी सतह को नया जीवन देने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने छात्रों को टेक्सचर निर्माण में स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने की भी सलाह दी।
विज्ञापन
कार्यशाला में डॉ. संगीता देवरिया ने टेक्सचर डिजाइन के समकालीन उपयोग और इसके औद्योगिक पहलुओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में डिजिटल टेक्सचर क्रिएशन भी बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, जो फैशन, आर्किटेक्चर और मल्टीमीडिया डिजाइन में क्रांति ला रहा है। छात्रों ने इस दौरान अपने प्रश्न पूछे और डिजिटल टेक्सचरिंग, 3-डी मॉडलिंग और सतही डिजाइनिंग के आधुनिक पहलुओं को समझा। संचालन विनीता पटेल और शालिनी पांडेय ने किया। इस दौरान रत्नेश यादव, डॉ. सुरेंद्र मिश्र, प्रतिभा त्रिपाठी व सरिता पाठक मौजूद रहीं।
विज्ञापन
प्रो. पाठक फैशन डिजाइनिंग एवं गारमेंट टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम में टेक्सचर क्रिएशन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र में बोल रही थीं। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने टेक्सचर निर्माण की विभिन्न तकनीकी पक्षों को जाना। उन्हें व्यावहारिक उपयोगिता के बारे में सिखाया गया और रचनात्मक प्रयोगों पर जोर दिया गया।
विज्ञापन
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. सुरेंद्र मिश्र ने कहा कि टेक्सचर केवल एक सजावटी तकनीक नहीं है, बल्कि यह किसी भी सतह को नया जीवन देने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने छात्रों को टेक्सचर निर्माण में स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने की भी सलाह दी।
विज्ञापन
कार्यशाला में डॉ. संगीता देवरिया ने टेक्सचर डिजाइन के समकालीन उपयोग और इसके औद्योगिक पहलुओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में डिजिटल टेक्सचर क्रिएशन भी बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, जो फैशन, आर्किटेक्चर और मल्टीमीडिया डिजाइन में क्रांति ला रहा है। छात्रों ने इस दौरान अपने प्रश्न पूछे और डिजिटल टेक्सचरिंग, 3-डी मॉडलिंग और सतही डिजाइनिंग के आधुनिक पहलुओं को समझा। संचालन विनीता पटेल और शालिनी पांडेय ने किया। इस दौरान रत्नेश यादव, डॉ. सुरेंद्र मिश्र, प्रतिभा त्रिपाठी व सरिता पाठक मौजूद रहीं।