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Ayodhya News: जनजातियों से जुड़े सुदूर व पर्वतीय क्षेत्रों के धर्माचार्य भी आमंत्रित
Mon, 15 Jan 2024 01:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 15 Jan 2024 01:36 AM IST
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- प्राण प्रतिष्ठा से सामाजिक समरसता की परिकल्पना साकार करेगा संघ
-महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास व कबीर दास की परंपरा के संत भी होंगे खास मेहमान
अमर उजाला ब्यूरो
अयोध्या। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक समरसता की परिकल्पना साकार होगी। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद ने इसका विशेष ध्यान रखा है। इसीलिए महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास और कबीर दास की परंपरा के संत भी खास मेहमान होंगे। ट्रस्ट ने संघ की पहल पर विभिन्न जनजातियों से जुड़े सुदूर व पर्वतीय क्षेत्रों के धर्माचार्यों को भी आमंत्रित किया है।
ट्रस्ट के आमंत्रण पर देशभर से करीब 4500 संत आ रहे हैं। इनमें सभी मत, पंथ और संप्रदायों का प्रतिनिधित्व रहेगा। विशेष रूप से 150 की संख्या में ऐसे संतों को सूचीबद्ध किया गया है जो जनजातियों के साथ वाल्मीकि, रविदास और कबीर की परंपरा से जुड़े हैं। इन सभी को देश के प्रतिष्ठित धर्माचार्यों के साथ ही समारोह में विराजित किया जाएगा। ऐसा भी प्रयास है कि संतों के आमंत्रण में प्रत्येक जिले की भागीदारी हो सके।
इस बारे में ट्रस्ट के वरिष्ठ न्यासी कामेश्वर चौपाल ने बताया कि समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आध्यात्मिक तौर पर संपूर्ण भारत और सभी पंथों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। प्रभु राम के सभी गुरुओं और उनकी धर्मयात्रा के सहयोगियों के अनुयायी समारोह के साक्षी बनेंगे। इसी कड़ी में देशभर की जनजातीय और दलित बस्तियों के देवालयों में विहिप के प्रकल्पों के माध्यम से समारोह के लाइव प्रसारण के भी प्रबंध किए गए हैं। इसके माध्यम से यहां रहने वाले वंचित समाज के लोग सीधे प्रभु राम के प्रतिष्ठित होने के कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे।
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-महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास व कबीर दास की परंपरा के संत भी होंगे खास मेहमान
अमर उजाला ब्यूरो
अयोध्या। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक समरसता की परिकल्पना साकार होगी। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद ने इसका विशेष ध्यान रखा है। इसीलिए महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास और कबीर दास की परंपरा के संत भी खास मेहमान होंगे। ट्रस्ट ने संघ की पहल पर विभिन्न जनजातियों से जुड़े सुदूर व पर्वतीय क्षेत्रों के धर्माचार्यों को भी आमंत्रित किया है।
ट्रस्ट के आमंत्रण पर देशभर से करीब 4500 संत आ रहे हैं। इनमें सभी मत, पंथ और संप्रदायों का प्रतिनिधित्व रहेगा। विशेष रूप से 150 की संख्या में ऐसे संतों को सूचीबद्ध किया गया है जो जनजातियों के साथ वाल्मीकि, रविदास और कबीर की परंपरा से जुड़े हैं। इन सभी को देश के प्रतिष्ठित धर्माचार्यों के साथ ही समारोह में विराजित किया जाएगा। ऐसा भी प्रयास है कि संतों के आमंत्रण में प्रत्येक जिले की भागीदारी हो सके।
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इस बारे में ट्रस्ट के वरिष्ठ न्यासी कामेश्वर चौपाल ने बताया कि समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आध्यात्मिक तौर पर संपूर्ण भारत और सभी पंथों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। प्रभु राम के सभी गुरुओं और उनकी धर्मयात्रा के सहयोगियों के अनुयायी समारोह के साक्षी बनेंगे। इसी कड़ी में देशभर की जनजातीय और दलित बस्तियों के देवालयों में विहिप के प्रकल्पों के माध्यम से समारोह के लाइव प्रसारण के भी प्रबंध किए गए हैं। इसके माध्यम से यहां रहने वाले वंचित समाज के लोग सीधे प्रभु राम के प्रतिष्ठित होने के कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे।
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