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22 जनवरी से शुरू हो चुका है रामराज्य : मोरारी बापू
Mon, 26 Feb 2024 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 26 Feb 2024 11:46 PM IST
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अयोध्या। रामराज्य की तिथि 22 जनवरी थी, रामराज्य की शुरुआत हो चुकी है। अयोध्या का माहौल देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि भले ही हम कलियुग में जी रहे हैं, लेकिन त्रेता का प्रारंभ हो चुका है। पूर देश में कथाएं चल रही हैं, यह रामराज्य नहीं तो और क्या है। पूरे देश में ऐसा कोई नगर नहीं जहां अयोध्या के राम का चित्र न लगा हो। वाल्मीकि और तुलसी न होते तो भारत, भारत नहीं होता।
उक्त बातें राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने तीर्थ क्षेत्र पुरम में राममंदिर ट्रस्ट की ओर से आयोजित मानस राममंदिर कथा में प्रवचन करते हुए कहीं। मोरारी बापू ने कहा कि आज सबके कान में कथा का कुंडल है। सबके मस्तक पर हिंदुत्व, सनातन धर्म, मर्यादा, शालीनता का मुकुट है। कथा सरकस नहीं है, कथा की दिव्यता कुछ और है। सबकुछ छोड़ना लेकिन जीवन में कथा नहीं छोड़ना। चाहे वह रामकथा, भागवत कथा, कृष्ण कथा, शिवकथा आदि हो, सुनते रहना।
रामनाम और रामकथा की महिमा बताते हुए कहा कि हमारे अंदर मोह नहीं है, महामोह है। मोह को राम मार सकते हैं, महामोह को रामकथा मार सकती है। बिना शिव स्मरण रामकथा में प्रवेश नहीं होता। शिवचरित से हम रामचरित का आगाज कर सकते हैं। हनुमान जी शिव जी के ही अवतार हैं। इसलिए राम को पकड़ना है तो शिव को पकड़ो। हनुमान जी स्वयं चलता-फिरता राममंदिर हैं, क्योंकि उनके सीने में सदा राम की अद्भुत छवि विराजती है। लव, कुश का अयोध्या जाकर रामकथा का गान करने के प्रसंग को सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जगद्गुरु श्रीधराचार्य, सतुआ बाबा समेत बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
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उक्त बातें राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने तीर्थ क्षेत्र पुरम में राममंदिर ट्रस्ट की ओर से आयोजित मानस राममंदिर कथा में प्रवचन करते हुए कहीं। मोरारी बापू ने कहा कि आज सबके कान में कथा का कुंडल है। सबके मस्तक पर हिंदुत्व, सनातन धर्म, मर्यादा, शालीनता का मुकुट है। कथा सरकस नहीं है, कथा की दिव्यता कुछ और है। सबकुछ छोड़ना लेकिन जीवन में कथा नहीं छोड़ना। चाहे वह रामकथा, भागवत कथा, कृष्ण कथा, शिवकथा आदि हो, सुनते रहना।
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रामनाम और रामकथा की महिमा बताते हुए कहा कि हमारे अंदर मोह नहीं है, महामोह है। मोह को राम मार सकते हैं, महामोह को रामकथा मार सकती है। बिना शिव स्मरण रामकथा में प्रवेश नहीं होता। शिवचरित से हम रामचरित का आगाज कर सकते हैं। हनुमान जी शिव जी के ही अवतार हैं। इसलिए राम को पकड़ना है तो शिव को पकड़ो। हनुमान जी स्वयं चलता-फिरता राममंदिर हैं, क्योंकि उनके सीने में सदा राम की अद्भुत छवि विराजती है। लव, कुश का अयोध्या जाकर रामकथा का गान करने के प्रसंग को सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जगद्गुरु श्रीधराचार्य, सतुआ बाबा समेत बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
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