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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Ram Mandir Offering Theft: Accused Jailed; No Increase in Visits or Phone Calls

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: जेल में बंद आरोपी, न बढ़ रहीं मुलाकातें न फोन पर हो रही बात, दूरी बना रहे परिजन

Tue, 30 Jun 2026 07:34 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya सतीश पाठक, अमर उजाला, अयोध्या
सतीश पाठक, अमर उजाला, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 30 Jun 2026 07:34 PM IST
सार

जेल में बंद आरोपियों से सप्ताह में तीन मुलाकात का नियम है पर अब तक सिर्फ एक बार ही परिजन पहुंचे हैं। यहां तक कि सत्यापन के लिए भी नंबर नहीं उपलब्ध करवाए गए हैं।

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Ram Mandir Offering Theft: Accused Jailed; No Increase in Visits or Phone Calls
अयोध्या का राम मंदिर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से उनके परिवार और करीबी भी दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। अब तक सभी आरोपियों से उनके परिजनों ने केवल एक बार मुलाकात की है। फोन पर बात की भी किसी ने पहल नहीं की है।

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राम मंदिर की दान पेटिकाओं से चढ़ावा चोरी के आठ आरोपियों रामशंकर यादव टिन्नू, मनीष यादव, अवनीश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रमाशंकर मिश्रा और करुणेश पांडेय को बीते शुक्रवार को पुलिस ने जेल भेजा है। जेल नियमों के अनुसार विचाराधीन बंदियों से सप्ताह में तीन बार मुलाकात की जा सकती है लेकिन परिजनों ने सिर्फ एक बार ही मुलाकात की है। उस दौरान कपड़े और जरूरी सामान तो दिया गया लेकिन उसके बाद दोबारा कोई मिलने नहीं पहुंचा।
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एक ही मुलाकात के बाद परिजनों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। चूंकि मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और आरोपियों के संपर्कों, लेन-देन व अन्य पहलुओं की पड़ताल हो रही है। चर्चा है कि कहीं परिवार और करीबी बार-बार जेल आने से इसीलिए तो नहीं बच रहे कि पुलिस की जांच की आंच उन तक न पहुंच जाए। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

मोबाइल से बात करने की भी नहीं जताई इच्छा
जेल प्रशासन के अनुसार प्रत्येक बंदी सत्यापन के बाद दो मोबाइल नंबरों पर बात कर सकता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आठों आरोपियों में से किसी ने भी अब तक फोन पर बातचीत के लिए कोई मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं कराया है। न किसी ने आवेदन किया और न ही कॉल सुविधा लेने की प्रक्रिया शुरू की। जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। ऐसे में जेल के भीतर आरोपियों की खामोशी और जेल के बाहर परिजनों की दूरी, दोनों ही इस चर्चित मामले में नई चर्चा का विषय बन गए हैं।

सामाजिक बदनामी के पहलू की भी चर्चा
दूसरी ओर सामाजिक बदनामी का पहलू भी चर्चा में है। देशभर में सुर्खियां बने इस मामले के बाद आरोपी परिवारों पर भी लोगों की निगाहें हैं। ऐसे में कुछ लोग सार्वजनिक रूप से आरोपियों से जुड़ाव दिखाने से भी बच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

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