फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Questions have also been raised regarding scripturally sanctioned traditions

Ayodhya News: शास्त्रसम्मत परंपराओं पर भी उठ चुके हैं सवाल

Mon, 20 Jul 2026 09:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 20 Jul 2026 09:44 PM IST
विज्ञापन
Questions have also been raised regarding scripturally sanctioned traditions
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी विवादों के साथ-साथ मंदिर की कुछ धार्मिक प्रक्रियाओं पर समय-समय पर शास्त्रसम्मत परंपराओं के आधार पर प्रश्न उठाए गए थे। देश के कुछ प्रमुख शंकराचार्यों और संतों ने सार्वजनिक रूप से यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि मंदिर का पूर्ण निर्माण और शिखर सहित समूचा देवालय तैयार होने से पहले प्राण-प्रतिष्ठा करना आगम शास्त्रों और पारंपरिक मंदिर निर्माण की स्थापित मान्यताओं के अनुरूप नहीं है।
विज्ञापन


इन आपत्तियों को प्रमुख रूप से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सार्वजनिक मंचों पर उठाया था। इसके अलावा पुरी गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी मंदिर निर्माण पूर्ण होने से पहले प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर अपनी असहमति व्यक्त की थी। कई अन्य संतों और वैदिक विद्वानों ने भी इस विषय पर शास्त्रीय चर्चा की आवश्यकता बताई थी। इन संतों का तर्क था कि सनातन परंपरा में सामान्यतः मंदिर के गर्भगृह, शिखर और आवश्यक धार्मिक संरचनाओं के पूर्ण होने के बाद ही विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। उनका कहना था कि अपूर्ण मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर शास्त्रीय मतभेद हैं और इस विषय पर व्यापक धार्मिक विमर्श होना चाहिए था। इसके अतिरिक्त कुछ संतों और धर्माचार्यों ने उस निर्णय पर भी सवाल उठाए थे, जिसमें वर्षों से पूजित रामलला के मूल उत्सव विग्रह के स्थान पर नवीन विग्रह को मुख्य आराध्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया।
विज्ञापन


हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़े वैदिक आचार्यों ने इन आपत्तियों से असहमति जताते हुए कहा था कि सभी धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठित वैदिक विद्वानों के मार्गदर्शन में, विधि-विधान और शास्त्रीय परामर्श के अनुसार संपन्न कराए गए। ट्रस्ट का यह भी कहना था कि प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया में विभिन्न परंपराओं के आचार्यों की सहभागिता रही और आवश्यक वैदिक अनुष्ठानों का पालन किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

निर्मोही अखाड़ा की याचिका में मूल विग्रह को लेकर आपत्ति
निर्मोही अखाड़ा की ओर से हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल की गई है उसमें रामलला के मूल विग्रह (मूर्तियों) को लेकर भी आपत्ति की गई है। याचिका में कहा गया है कि मूल श्रीरामलला विराजमान की मूर्तियां ही न्यायिक रूप से मान्य हैं। ट्रस्ट को नई मूर्ति स्थापित करने का अधिकार नहीं था। यदि मूल विग्रह को गर्भगृह में स्थापित नहीं किया जा सकता तो उन्हें निर्मोही अखाड़े को सौंपा जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed