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Ayodhya News: छात्रों और शिक्षकों के साथ अभिभावकों के लिए स्कूलों में होंगे मनोप्रशिक्षण सत्र
Sat, 27 Apr 2024 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 27 Apr 2024 12:18 AM IST
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अयोध्या। स्कूली छात्रों में बढ़ रहे व्यवहार विकार व भावनात्मक समस्याओं को लेकर शिक्षकों व अभिभावकों के संवेदीकरण के लिए त्रिस्तरीय मनोप्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। जूनियर, माध्यमिक व सीनियर ग्रुप में विभाजित सत्र में शिक्षक व अभिभावक शामिल होंगे। इसकी शुरुआत पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय से होगी। यह जानकारी जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डाॅ. आलोक मनदर्शन व केंद्रीय विद्यालय के प्रधानाचार्य आरसी पांडेय ने दी।
चुनिंदा संस्थाओं में चलने वाले इस ट्रेनिंग सत्र से शिक्षा गुणवत्ता व व्यक्तित्व परिपक्वता का दोहरा लाभ छात्रों को मिलेगा। वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों मे क्लास रूम प्रबंधन व भावनात्मक बुद्धिमता का विकास होगा । शिक्षकों को बिहेवियरल रिएक्शन व प्रोएक्शन के भेद को सिखाया जाएगा जिससे उनमें न केवल प्रोफेशनल बर्न आउट कम होगा बल्कि क्लास रूम प्रोडक्टिविटी में भी इजाफा होगा। अभिभावकों को भी हेल्दी पेरेंटिंग के टिप्स व ट्रिक्स सिखाए जाएंगे जिससे वे ऑटोक्रेटिक व नेगलिजेंट पैरेंट्स न होकर डेमोक्रेटिक पैरेंट्स बन सके। व्यवहार प्रबंधन ट्रेनिंग के सत्र से किशोरों में बढ़ रही आक्रामकता, अमर्यादित व्यवहार, मादक लतें, डिजिटल एडिक्शन, जेंडर बेस्ड वायलेंस, एकाग्रता की कमी, टीनएज सेक्सुअल एक्टिविटी, रिस्क बिहेवियर अवसाद, उन्माद, पलायन वादी, आत्मघाती या परघाती व्यवहार जैसी समस्याओं पर प्रमुख रूप से फोकस किया जाएगा।
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चुनिंदा संस्थाओं में चलने वाले इस ट्रेनिंग सत्र से शिक्षा गुणवत्ता व व्यक्तित्व परिपक्वता का दोहरा लाभ छात्रों को मिलेगा। वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों मे क्लास रूम प्रबंधन व भावनात्मक बुद्धिमता का विकास होगा । शिक्षकों को बिहेवियरल रिएक्शन व प्रोएक्शन के भेद को सिखाया जाएगा जिससे उनमें न केवल प्रोफेशनल बर्न आउट कम होगा बल्कि क्लास रूम प्रोडक्टिविटी में भी इजाफा होगा। अभिभावकों को भी हेल्दी पेरेंटिंग के टिप्स व ट्रिक्स सिखाए जाएंगे जिससे वे ऑटोक्रेटिक व नेगलिजेंट पैरेंट्स न होकर डेमोक्रेटिक पैरेंट्स बन सके। व्यवहार प्रबंधन ट्रेनिंग के सत्र से किशोरों में बढ़ रही आक्रामकता, अमर्यादित व्यवहार, मादक लतें, डिजिटल एडिक्शन, जेंडर बेस्ड वायलेंस, एकाग्रता की कमी, टीनएज सेक्सुअल एक्टिविटी, रिस्क बिहेवियर अवसाद, उन्माद, पलायन वादी, आत्मघाती या परघाती व्यवहार जैसी समस्याओं पर प्रमुख रूप से फोकस किया जाएगा।
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