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Ayodhya News: ठेलों पर पाॅलीथिन, प्रतिबंध कागजों में

Thu, 16 May 2024 05:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2024 05:04 AM IST
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Polythene on carts, ban on papers
देवकाली  में पन्नी में रखी स​​ब्जियां।
अयोध्या। पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक से शहर की स्वच्छता को बट्टा लग रहा है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के पहले से शहर को स्वच्छ बनाने के लिए चल रहे अभियान की हकीकत यहां ठेलाें और दुकानों में पॉलीथिन के ढेर में दिखती है। यही पॉलीथिन शहर की गलियों, सड़कों, नालियों और कूड़े के ढेरों पर उड़ती-उतराती नजर आती है। झाड़ू लगने के बाद भी जहां-तहां फैली नजर आती है।
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पॉलीथिन की बिक्री पर रोक न होने की वजह से यह हर दुकान पर सुलभ है। यही वजह है कि कपड़े का झोला लोगों की आदत में नहीं आ पा रहा है। शहर से गांव तक सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन का इस्तेमाल बेखौफ किया जा रहा है। ठेले-खोमचे से लेकर छोटे और बड़े दुकानदार ज्यादातर सामान पॉलीथिन के थैलों में ही देते हैं। ग्राहक भी खरीदारी करने जब बाजार निकलते हैं तो अपने साथ कपड़े का थैला ले जाने से परहेज करते हैं। वह भी इस भराेसे के साथ कि दुकानदार सभी सामान पॉलीथिन के थैलों में पैक करके दे देगा।
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इस कवायद का नहीं दिख रहा असर
अयोध्या नगर निगम क्षेत्र में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के पहले पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने के लिए चलाए गए अभियान का असर अब नहीं दिख रहा है। शुरुआत में तो इसमें सख्ती के साथ जुर्माना और अन्य कार्रवाई का भी सहारा लिया गया। नगर निगम ने कपड़े से बने थैलों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई स्थानों पर वेंडिंग मशीन लगवाई। राम मंदिर के चारों ओर दो किमी क्षेत्र को प्लास्टिक रेगुलेटेड जोन बनाया गया। इसके अंतर्गत डिपॉजिट रिफंड सिस्टम की व्यवस्था लागू की गई। अयोध्या धाम में बिकने वाली प्लास्टिक और बोतलबंद सामग्री में बार कोड लगाए गए। जोन में 20 से अधिक रिफंड सेंटर भी बनाए गए। मगर अब सख्ती के अभाव में इतनी कवायद बेअसर साबित हो रही है।
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पर्यावरण व स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है प्लास्टिक

सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। यह न तो डिकंपोज होते हैं और न इन्हें जलाया जा सकता है। इनके टुकड़े पर्यावरण में जहरीले रसायन छोड़ते हैं। जो इन्सान व जानवरों के लिए खतरनाक होते हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक का कचरा बारिश के पानी को जमीन में जाने से रोकता है। इससे ग्राउंड वाटर लेवल में कमी आती है।



सजा के साथ जुर्माने का भी है प्रावधान

सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका इस्तेमाल करने पर जुर्माना और जेल भेजने का प्रावधान है। नियम के अनुसार यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित प्लास्टिक नदी, सड़क, झील या तालाब में फेंकता है तो 1000 रुपये जुर्माना देना होता है। यहीं काम कोई संस्था करती है तो 25 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। पॉलीथिन या थर्मोकोल के प्रोडक्ट के इस्तेमाल और बेचने पर छह माह जेल या 25 हजार जुर्माना का प्रावधान है। यही गलती दोबारा होती है तो एक लाख जुर्माना और एक साल की जेल हो सकती है।
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