{"_id":"6aaed9a4e7e99d44e00a2807","slug":"patranga-manjha-village-submerged-in-the-rivers-current-ayodhya-news-c-97-1-lu11030-159124-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: नदी की धारा में समाया पटरंगा मांझा गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: नदी की धारा में समाया पटरंगा मांझा गांव
Sun, 20 Sep 2026 12:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 20 Sep 2026 12:21 AM IST
विज्ञापन
कटान करती सरयू नदी।
रुदौली। सरयू की धारा पटरंगा माझां गांव की जमीन ही नहीं, ग्रामीणों की सालभर की मेहनत भी बहा ले गई। करीब दो माह से जारी कटान में पूरा गांव नदी की धारा में समा चुका है। घर उजड़ गए और खेतों में खड़ी धान व गन्ने की फसल बर्बाद हो गई। घर और खेती दोनों छिनने के बाद कई परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कटान शुरू होने पर ग्रामीणों को अपने घरों से सामान निकालकर खुद ही सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। दूधनाथ, शत्रोहन यादव और ननकू ने बताया कि गांव छोड़ने के दौरान प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली। किसी तरह सामान समेटकर सुरक्षित जगह पहुंचे। जिन खेतों में कुछ समय पहले तक धान और गन्ने की फसल लहलहा रही थी, वहां अब सरयू की धारा बह रही है।
नाव से नदी पार, फिर दो किमी पैदल सफर
पटरंगा मांझा पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। महंगू पुरवा से नाव के जरिये सरयू पार करनी पड़ती है। इसके बाद करीब दो किलोमीटर पैदल चलने पर गांव का क्षेत्र आता है। जलस्तर बढ़ा होने के कारण नदी पार करना भी जोखिम भरा है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से कटान की वास्तविक स्थिति देखने के लिए भी लोग कम पहुंच पा रहे हैं।
विज्ञापन
हमारी टीम शनिवार को महंगू पुरवा से नाव के जरिये सरयू पार कर पटरंगा माझां पहुंची। नदी पार करने के बाद करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर कटान प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की। मौके पर गांव के बचे-खुचे हिस्से के बजाय कई जगह नदी की धारा और कटान के निशान दिखाई दिए।
फसल का नुकसान, लेकिन सर्वे का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक धान और गन्ने की फसल नदी में समाने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। खेत ही नहीं बचे तो अगली फसल की तैयारी भी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद अब तक फसल के नुकसान का सर्वे नहीं कराया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
सर्वे कराया जाएगा
एसडीएम विनोद गुप्ता ने बताया कि पटरंगा माझां गांव में हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में सामने आने वाले नुकसान का आकलन कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
कटान शुरू होने पर ग्रामीणों को अपने घरों से सामान निकालकर खुद ही सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। दूधनाथ, शत्रोहन यादव और ननकू ने बताया कि गांव छोड़ने के दौरान प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली। किसी तरह सामान समेटकर सुरक्षित जगह पहुंचे। जिन खेतों में कुछ समय पहले तक धान और गन्ने की फसल लहलहा रही थी, वहां अब सरयू की धारा बह रही है।
विज्ञापन
नाव से नदी पार, फिर दो किमी पैदल सफर
पटरंगा मांझा पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। महंगू पुरवा से नाव के जरिये सरयू पार करनी पड़ती है। इसके बाद करीब दो किलोमीटर पैदल चलने पर गांव का क्षेत्र आता है। जलस्तर बढ़ा होने के कारण नदी पार करना भी जोखिम भरा है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से कटान की वास्तविक स्थिति देखने के लिए भी लोग कम पहुंच पा रहे हैं।
विज्ञापन
हमारी टीम शनिवार को महंगू पुरवा से नाव के जरिये सरयू पार कर पटरंगा माझां पहुंची। नदी पार करने के बाद करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर कटान प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की। मौके पर गांव के बचे-खुचे हिस्से के बजाय कई जगह नदी की धारा और कटान के निशान दिखाई दिए।
फसल का नुकसान, लेकिन सर्वे का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक धान और गन्ने की फसल नदी में समाने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। खेत ही नहीं बचे तो अगली फसल की तैयारी भी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद अब तक फसल के नुकसान का सर्वे नहीं कराया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
सर्वे कराया जाएगा
एसडीएम विनोद गुप्ता ने बताया कि पटरंगा माझां गांव में हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में सामने आने वाले नुकसान का आकलन कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।