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Ayodhya News: एफआरके के चक्कर में औंधे मुंह गिरी धान खरीद

Sun, 14 Dec 2025 08:29 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Dec 2025 08:29 PM IST
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Paddy procurement falls flat due to FRK issue
24- साधन सहकारी समिति गणेशपुर केंद्र - संवाद
अयोध्या। एफआरके (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल) की क्रय नीति में संशोधन व अधिकारियों की अदूरदर्शिता से समर्थन मूल्य पर धान की खरीद औंधे मुंह गिर गई है। मूल्य समर्थन योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद शुरू हुए डेढ़ माह बीत चुके हैं। इसके बाद भी धान खरीद की हालत खस्ता है। किसानों से धान की खरीद हो, भुगतान या फिर क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान को राइस मिलों तक भिजवाना, सब कुछ खाद्य विभाग के पोर्टल से ही संचालित होता है। ऐसे में रोजाना नेटवर्क की समस्या व अन्य खामियां आ जाने के कारण बाधा उत्पन्न हो रही है।
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फोर्टिफाइड चावल नीति में अफसरों ने इस बार बदलाव कर दिया। इसके चलते क्रय केंद्रों पर खरीदा गया धान बड़ी मात्रा में अभी भी मिलों तक पहुंचने की जगह डंप है। जब तक यह धान क्रय केंद्रों से मिलों पर पहुंचेगा नहीं, तब तक चावल तैयार होकर एफसीआई नहीं जा पाएगा और आगे की खरीद के लिए क्रय केंद्रों पर जगह भी नहीं बनेगी। एफआरके यानी पोषण संवर्धित चावल क्रय नीति में बदलाव करते हुए इस बार पूरे प्रदेश में इसकी आपूर्ति के लिए तीन फर्मों को टेंडर दे दिया गया है।
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इसमें एक फतेहपुर, दूसरी उन्नाव और तीसरी रायबरेली की तीन फर्मों पर ही पूरे प्रदेश का लोड होने के कारण एफआरके की आपूर्ति अभी तक सुचारू नहीं हो पाई है। इसके चलते अयोध्या के साथ ही अन्य जिलों के राइस मिलर इन फर्मों पर जाकर बैठे हैं और चावल मिलने का इंतजार कर रहे हैं। फोर्टिफाइड चावल देने के बदले चावल के मूल्य के साथ ही राइस मिलरों को सुविधा शुल्क भी देने की बात सामने आ रही है। इसके बाद भी फोर्टिफाइड चावल नहीं मिल पा रहा है।
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लक्ष्य की तुलना में अब तक सिर्फ 12 फीसदी हो सकी है खरीद

मूल्य समर्थन योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इस बार राज्य सरकार की तरफ से अयोध्या को 68,000 एमटी धान खरीद का लक्ष्य मिला है। इसके लिए 50 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। सारी व्यवस्था चरमरा जाने का असर यह है की डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक सिर्फ आठ हजार एमटी धान की खरीद हो पाई है, जो लक्ष्य का लगभग 12 फीसदी है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी धनंजय सिंह ने बताया कि धीरे-धीरे व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास चल रहा है।

सरकार की तरफ से किए गए हैं कुछ नीतिगत बदलाव

जिला खाद्य विपणन अधिकारी के अनुसार सरकार की तरफ से कुछ नीतिगत बदलाव किए गए हैं। इनमें पहले एफआरके को जांच के लिए प्रदेश के बाहर की लैब में भेजा जाता था। अब इसकी जांच लखनऊ में ही कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा फसल उत्पादकता को भी बढ़ाकर 125 फीसदी कर दिया गया है। जिस फोर्टिफाइड चावल को 10 एमटी के बैच में सैंपलिंग के लिए भेजा जाता था, इसे भी दोगुना कर दिया गया है। राइस मिलों के संबद्धीकरण का कुछ अधिकार जो पहले राज्य मुख्यालय से होता था, उसे आरएफसी को दिया गया है। आने वाले दिनों में धान की खरीद में सुधार होने की संभावना है।


किसानों के सत्यापन में विलंब भी अटका रहा रोड़ा


समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों की ओर से खाद्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद उसके सत्यापन में की जा रही लापरवाही भी एक बड़ी बांधा बनकर उभरी है। पिछले वर्षों में एसडीएम स्तर से सत्यापन की प्रक्रिया एक बार में ही पूरी हो जाती थी। इस बार दोहरे स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें एसडीएम के साथ लेखपाल की ओर से भी सत्यापन किया जा रहा है। एक-एक लेखपाल के पास कई-कई गांव का चार्ज होने के कारण उनकी ओर से सत्यापन में रुचि नहीं ली जा रही है।
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