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नवीन मंडी रुदौली : आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया
Sun, 09 Nov 2025 08:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 09 Nov 2025 08:11 PM IST
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03- जगह की कमी के चलते फुटपाथ पर रखी सब्जी - संवाद
भेलसर। रुदौली की नवीन सब्जी मंडी जगह की कमी और बदहाल के चलते अपने उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह असफल साबित हो रही है। 4 बीघा भूमि में बनी यह मंडी लगातार जाम, गंदगी और अव्यवस्था से जूझ रही है। हालत यह है कि यहां का वार्षिक खर्च करीब छह लाख रुपये पहुंच चुका है, जबकि आय मुश्किल से डेढ़ लाख रुपये हो पा रही है। मंडी समिति अब इस घाटे की भरपाई के लिए आढ़तियों पर खर्च का बोझ डालने की तैयारी कर रही है।
नेशनल हाईवे पर भेलसर के पास स्थित इस मंडी में सफाई, पेयजल, शौचालय और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। मंडी परिसर से निकलने वाला कूड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ही फेंक दिया जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैलती है। सुबह से ही यहां जाम की स्थिति बन जाती है। जगह कम होने से सब्जी लादकर लाने वाले वाहन मंडी परिसर में नहीं घुस पाते हैं। विवश होकर उन्हें राष्ट्रीय मार्ग पर ही गाड़ी खड़ी करनी पड़ती है। इससे सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मंडी में कुल 30 दुकानें हैं। इनमें ए ग्रेड की दुकानों से 778 रुपये, बी ग्रेड से 349 रुपये, सी ग्रेड से 205 रुपये शुल्क (प्लस जीएसटी) लिया जाता है। चबूतरे के लिए 100 रुपये और भूखंड के लिए 80 रुपये निर्धारित हैं। खर्च बढ़ने और आमदनी कम होने से अब फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाले आढ़तियों से भी शुल्क वसूली की जा रही है। मंडी में नियामतगंज, अलियाबाद, पटरंगा, मवई, सैदपुर, बाबा बाजार, शुजागंज, भेलसर, ईचौलिया, अख्तियारपुर, लालुवापुर, नेवरा और भक्तनगर आदि स्थानों से व्यापारी पहुंचते हैं।
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बरसात के दिनों में मंडी परिसर में जलभराव की समस्या आम बात है। व्यापारियों के लिए बने शौचालयों में गंदगी रहती है और साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।व्यापारियों का कहना है कि परिसर में बना ओवरहेड टैंक कई वर्षों से साफ नहीं कराया गया है और न ही उसमें कीटनाशक पाउडर डाला जाता है, जिससे पानी अस्वच्छ हो गया है।
कोल्ड चैंबर न होसे फल-सब्जियां हो रहीं खराब
मंडी परिसर में कोल्ड चैंबर की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इससे रखी फल-सब्जियां शाम तक खराब होने लगती हैं। केला, टमाटर, अंगूर, आम जैसी वस्तुएं एक ही दिन में सड़ने लगती हैं। इससे न केवल आढ़तियों को हजारों रुपये का नुकसान होता है, बल्कि उपभोक्ताओं तक ताजा माल नहीं पहुंच पाता है। कोल्ड चेंबर निर्माण की योजना कई साल पहले बनी थी, लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हो सका।
आढ़ती अंकित कुमार ने कहा कि मंडी में शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता। अगर कोल्ड चेंबर होता, तो माल खराब नहीं होता। आढ़ती पुत्तीलाल ने कहा कि दुकान न होने से खुले में सब्जियां रखनी पड़ती हैं। वहीं भुलई, महुवा, सहीम, मतीन और मुनव्वर का कहना है कि बढ़ती भीड़ की वजह से फुटपाथ की जगह भी घटा दी गई है, जिससे काम करना मुश्किल हो गया है। नवीन सब्जी मंडी रुदौली के सचिव शत्रोहन लाल ने कहा कि मंडी घाटे में चल रही है और व्यवस्था सुधारने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। मंडी समिति को जर्जर सड़क, जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं को लेकर भी कई बार अधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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नेशनल हाईवे पर भेलसर के पास स्थित इस मंडी में सफाई, पेयजल, शौचालय और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। मंडी परिसर से निकलने वाला कूड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ही फेंक दिया जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैलती है। सुबह से ही यहां जाम की स्थिति बन जाती है। जगह कम होने से सब्जी लादकर लाने वाले वाहन मंडी परिसर में नहीं घुस पाते हैं। विवश होकर उन्हें राष्ट्रीय मार्ग पर ही गाड़ी खड़ी करनी पड़ती है। इससे सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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मंडी में कुल 30 दुकानें हैं। इनमें ए ग्रेड की दुकानों से 778 रुपये, बी ग्रेड से 349 रुपये, सी ग्रेड से 205 रुपये शुल्क (प्लस जीएसटी) लिया जाता है। चबूतरे के लिए 100 रुपये और भूखंड के लिए 80 रुपये निर्धारित हैं। खर्च बढ़ने और आमदनी कम होने से अब फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाले आढ़तियों से भी शुल्क वसूली की जा रही है। मंडी में नियामतगंज, अलियाबाद, पटरंगा, मवई, सैदपुर, बाबा बाजार, शुजागंज, भेलसर, ईचौलिया, अख्तियारपुर, लालुवापुर, नेवरा और भक्तनगर आदि स्थानों से व्यापारी पहुंचते हैं।
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बरसात के दिनों में मंडी परिसर में जलभराव की समस्या आम बात है। व्यापारियों के लिए बने शौचालयों में गंदगी रहती है और साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।व्यापारियों का कहना है कि परिसर में बना ओवरहेड टैंक कई वर्षों से साफ नहीं कराया गया है और न ही उसमें कीटनाशक पाउडर डाला जाता है, जिससे पानी अस्वच्छ हो गया है।
कोल्ड चैंबर न होसे फल-सब्जियां हो रहीं खराब
मंडी परिसर में कोल्ड चैंबर की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इससे रखी फल-सब्जियां शाम तक खराब होने लगती हैं। केला, टमाटर, अंगूर, आम जैसी वस्तुएं एक ही दिन में सड़ने लगती हैं। इससे न केवल आढ़तियों को हजारों रुपये का नुकसान होता है, बल्कि उपभोक्ताओं तक ताजा माल नहीं पहुंच पाता है। कोल्ड चेंबर निर्माण की योजना कई साल पहले बनी थी, लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हो सका।
आढ़ती अंकित कुमार ने कहा कि मंडी में शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता। अगर कोल्ड चेंबर होता, तो माल खराब नहीं होता। आढ़ती पुत्तीलाल ने कहा कि दुकान न होने से खुले में सब्जियां रखनी पड़ती हैं। वहीं भुलई, महुवा, सहीम, मतीन और मुनव्वर का कहना है कि बढ़ती भीड़ की वजह से फुटपाथ की जगह भी घटा दी गई है, जिससे काम करना मुश्किल हो गया है। नवीन सब्जी मंडी रुदौली के सचिव शत्रोहन लाल ने कहा कि मंडी घाटे में चल रही है और व्यवस्था सुधारने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। मंडी समिति को जर्जर सड़क, जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं को लेकर भी कई बार अधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।