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Ayodhya News: डॉ. अरुण जायसवाल को कोर्ट से मिली बड़ी राहत
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अयोध्या। इलाज में लापरवाही और 17 लाख रुपये वसूलने के मामले में डॉ. अरुण जायसवाल को बड़ी राहत मिली है। जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने अपर सिविल जज (एसीजेएम) के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें उन्हें तलब किया गया था। मामले को अब अवर न्यायालय में फिर से सुनवाई के लिए वापस भेजा गया है।
यह आदेश डॉ. अरुण जायसवाल की ओर से अवर न्यायालय से पारित 7 जनवरी 2026 के आदेश को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर रिवीजन प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पारित किया गया। अपर सिविल जज गीतिका सिंह ने मृतक राघवेंद्र अग्रवाल के पुत्र अमर नाथ अग्रवाल की ओर से प्रस्तुत परिवाद पर डॉ. अरुण और लखनऊ के दो डॉक्टरों को तलब करने का आदेश दिया था। परिवाद के अनुसार, राघवेन्द्र अग्रवाल का हर्निया का इलाज दिव्य हॉस्पिटल में चल रहा था। हृदय संबंधी जांच के लिए उन्हें 4 सितंबर 2020 को हृदय रोग संस्थान ले जाया गया। वहां डॉ. अरुण जायसवाल ने विजय पांडेय से इलाज कराने के लिए लखनऊ जाने को कहा। सहारा अस्पताल में ऑपरेशन के नाम पर 7.50 लाख रुपये और लीवर जांच के नाम पर 7 लाख रुपये जमा कराए गए। कुल 17 लाख रुपये वसूलने और 22 दिन बाद जबरन डिस्चार्ज करने का आरोप है। राघवेन्द्र अग्रवाल की 18 अक्टूबर 2020 को मृत्यु हो गई थी।
अमर नाथ अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि इलाज के दौरान राघवेन्द्र के साथ मारपीट की गई और उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली। एसीजेएम गीतिका सिंह ने पत्रावली पर मौजूद सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर डॉ. अरुण जायसवाल और विजय पाण्डेय को तलब करने का आदेश दिया था। यह आदेश लापरवाही से मृत्यु कारित करने, आपराधिक विश्वासघात, मारपीट और धमकी देने के मामले में था। इसी आदेश के विरुद्ध जिला जज के समक्ष रिवीजन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए अवर न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया गया।
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यह आदेश डॉ. अरुण जायसवाल की ओर से अवर न्यायालय से पारित 7 जनवरी 2026 के आदेश को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर रिवीजन प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पारित किया गया। अपर सिविल जज गीतिका सिंह ने मृतक राघवेंद्र अग्रवाल के पुत्र अमर नाथ अग्रवाल की ओर से प्रस्तुत परिवाद पर डॉ. अरुण और लखनऊ के दो डॉक्टरों को तलब करने का आदेश दिया था। परिवाद के अनुसार, राघवेन्द्र अग्रवाल का हर्निया का इलाज दिव्य हॉस्पिटल में चल रहा था। हृदय संबंधी जांच के लिए उन्हें 4 सितंबर 2020 को हृदय रोग संस्थान ले जाया गया। वहां डॉ. अरुण जायसवाल ने विजय पांडेय से इलाज कराने के लिए लखनऊ जाने को कहा। सहारा अस्पताल में ऑपरेशन के नाम पर 7.50 लाख रुपये और लीवर जांच के नाम पर 7 लाख रुपये जमा कराए गए। कुल 17 लाख रुपये वसूलने और 22 दिन बाद जबरन डिस्चार्ज करने का आरोप है। राघवेन्द्र अग्रवाल की 18 अक्टूबर 2020 को मृत्यु हो गई थी।
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अमर नाथ अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि इलाज के दौरान राघवेन्द्र के साथ मारपीट की गई और उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली। एसीजेएम गीतिका सिंह ने पत्रावली पर मौजूद सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर डॉ. अरुण जायसवाल और विजय पाण्डेय को तलब करने का आदेश दिया था। यह आदेश लापरवाही से मृत्यु कारित करने, आपराधिक विश्वासघात, मारपीट और धमकी देने के मामले में था। इसी आदेश के विरुद्ध जिला जज के समक्ष रिवीजन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए अवर न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया गया।
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