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जिला अस्पताल : लाल खून का काला कारोबार
Mon, 16 Jun 2025 10:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 16 Jun 2025 10:28 PM IST
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अयोध्या। जिला अस्पताल में एक बार फिर से लाल खून का काला कारोबार सामने आया है। इस बार प्रसूता के परिजन से एक यूनिट खून के लिए दलाल ने सात हजार रुपये ऐंठ लिए। शिकायत पर सीएमओ पीड़ित को लेकर दलाल पकड़ने निकल पड़े। वह नहीं मिला तो सीसीटीवी फुटेज खंगलवाई और एसएसपी से जाकर मामले की शिकायत की।
मवई के बिरौली निवासी रीना का तीन दिन पहले सीएचसी रुदौली में प्रसव हुआ था। उन्हें एक यूनिट खून चढ़ाकर बेहतर इलाज के लिए जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया था। रविवार दोपहर लगभग एक बजे एक यूनिट खून की जरूरत हुई तो तीमारदार अरविंद जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे। अस्पताल परिसर में ही एक व्यक्ति उन्हें मिला और सात हजार रुपये में एक यूनिट खून आधे घंटे में दिलवा दिया। यह पैसे उसने यूपीआई के जरिए बैंक खाते में लिए।
सोमवार को चिकित्सक ने फिर से एक यूनिट खून की आवश्यकता बताई। डोनर और पैसे का अभाव होने पर उन्होंने सीएमओ से शिकायत की। सरकारी अस्पताल में दलाली पर सीएमओ नाराज हुए और डीपीएम रामप्रकाश पटेल, डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश चौधरी, डाॅ. हम्माद आदि के साथ महिला अस्पताल पहुंचे। काफी देर तक मरीज को खोजने के बाद तीसरे तल पर भर्ती रीना के पास पहुंचे और जानकारी ली।
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खून के लिए दलाली की जानकारी पर सीएमओ तीमारदार को लेकर ब्लड बैंक पहुंचे। वहां घूम-घूमकर उन्होंने एक-एक कर्मचारी की पहचान कराई और कहा पहचानो इनमें से रुपये लेने वाला कौन है? उनमें कोई न मिलने पर हेल्प डेस्क मैनेजर राजेंद्र तिवारी के पास गए और सीसीटीवी फुटेज खंगलवाया। अरविंद ने यूपीआई से भुगतान की जानकारी दी तो पैसे लेने वाले की फोटो व्हाट्सअप से निकालकर सर्कुलेट कराई। लगभग दो घंटे तक चली इस कार्रवाई में जिला महिला अस्पताल व जिला अस्पताल में हलचल मची रही।
सीएमओ प्रमुख अधीक्षक कार्यालय में ब्लड बैंक का रजिस्टर मंगवाया तो पता चला कि हरी प्रसाद नामक व्यक्ति ने रीना के लिए खून दिया था। सारा विवरण लेकर सीएमओ दोपहर में ही एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर से मिले और केस दर्ज करने की मांग की।
जांच के दौरान महिला अस्पताल से धन उगाही की पुष्टि न होने पर सीएमएस डॉ. विभा कुमारी नाराज हो गईं। उन्होंने सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बनियान से कहा कि महिला अस्पताल में किसी ने पैसा नहीं लिया है, इस तरह सनसनी न फैलाया कीजिए। यह एकदम गलत बात है।
फरवरी, 2023 में भी खून की काला बाजारी का मामला सामने आया था। सदर बाजार के लालकुर्ती निवासी जितेंद्र कुमार ने रुपयों के लालच में तीन माह में सात बार रक्तदान किया था। जांच में उसने बताया कि हर बार उसे खून देने पर एक हजार रुपये मिलते थे। यह खून छह से आठ हजार में बेचा जाता था। अस्पताल प्रशासन में निगरानी में लापरवाही मिलने पर उस समय नौ कर्मचारियों का पटल बदला, लेकिन बाद में उन्हें फिर से वापस ले लिया गया।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बनियान ने बताया कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। यदि इसमें ब्लडबैंक का कर्मचारी भी मिला होगा तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
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मवई के बिरौली निवासी रीना का तीन दिन पहले सीएचसी रुदौली में प्रसव हुआ था। उन्हें एक यूनिट खून चढ़ाकर बेहतर इलाज के लिए जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया था। रविवार दोपहर लगभग एक बजे एक यूनिट खून की जरूरत हुई तो तीमारदार अरविंद जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे। अस्पताल परिसर में ही एक व्यक्ति उन्हें मिला और सात हजार रुपये में एक यूनिट खून आधे घंटे में दिलवा दिया। यह पैसे उसने यूपीआई के जरिए बैंक खाते में लिए।
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सोमवार को चिकित्सक ने फिर से एक यूनिट खून की आवश्यकता बताई। डोनर और पैसे का अभाव होने पर उन्होंने सीएमओ से शिकायत की। सरकारी अस्पताल में दलाली पर सीएमओ नाराज हुए और डीपीएम रामप्रकाश पटेल, डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश चौधरी, डाॅ. हम्माद आदि के साथ महिला अस्पताल पहुंचे। काफी देर तक मरीज को खोजने के बाद तीसरे तल पर भर्ती रीना के पास पहुंचे और जानकारी ली।
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खून के लिए दलाली की जानकारी पर सीएमओ तीमारदार को लेकर ब्लड बैंक पहुंचे। वहां घूम-घूमकर उन्होंने एक-एक कर्मचारी की पहचान कराई और कहा पहचानो इनमें से रुपये लेने वाला कौन है? उनमें कोई न मिलने पर हेल्प डेस्क मैनेजर राजेंद्र तिवारी के पास गए और सीसीटीवी फुटेज खंगलवाया। अरविंद ने यूपीआई से भुगतान की जानकारी दी तो पैसे लेने वाले की फोटो व्हाट्सअप से निकालकर सर्कुलेट कराई। लगभग दो घंटे तक चली इस कार्रवाई में जिला महिला अस्पताल व जिला अस्पताल में हलचल मची रही।
सीएमओ प्रमुख अधीक्षक कार्यालय में ब्लड बैंक का रजिस्टर मंगवाया तो पता चला कि हरी प्रसाद नामक व्यक्ति ने रीना के लिए खून दिया था। सारा विवरण लेकर सीएमओ दोपहर में ही एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर से मिले और केस दर्ज करने की मांग की।
जांच के दौरान महिला अस्पताल से धन उगाही की पुष्टि न होने पर सीएमएस डॉ. विभा कुमारी नाराज हो गईं। उन्होंने सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बनियान से कहा कि महिला अस्पताल में किसी ने पैसा नहीं लिया है, इस तरह सनसनी न फैलाया कीजिए। यह एकदम गलत बात है।
फरवरी, 2023 में भी खून की काला बाजारी का मामला सामने आया था। सदर बाजार के लालकुर्ती निवासी जितेंद्र कुमार ने रुपयों के लालच में तीन माह में सात बार रक्तदान किया था। जांच में उसने बताया कि हर बार उसे खून देने पर एक हजार रुपये मिलते थे। यह खून छह से आठ हजार में बेचा जाता था। अस्पताल प्रशासन में निगरानी में लापरवाही मिलने पर उस समय नौ कर्मचारियों का पटल बदला, लेकिन बाद में उन्हें फिर से वापस ले लिया गया।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बनियान ने बताया कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। यदि इसमें ब्लडबैंक का कर्मचारी भी मिला होगा तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।