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हर कदम पर आई चुनौतियां, आस्था से मिली शक्ति : नृपेंद्र मिश्र

Mon, 09 Mar 2026 08:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 09 Mar 2026 08:11 PM IST
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Challenges at every step, strength derived from faith: Nripendra Mishra
03- रामकथा संग्रहालय में मौजूद नृपेंद्र मिश्र साथ में संग्रहालय के निदेशक- संवाद
अयोध्या। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन आस्था और समर्पण की भावना ने हर कठिनाई को पार करने की शक्ति दी। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि जब उन्हें मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया था, तब उन्होंने आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी को संदेश भेजकर इस दायित्व की जानकारी दी थी। माता अमृतानंदमयी ने उन्हें जवाब में कहा था कि इस कार्य को ईश्वर की इच्छा का माध्यम मानकर पूर्ण समर्पण के साथ करें।
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नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान लगभग हर चरण में नई चुनौतियां सामने आईं। वह महीने में दो बार अयोध्या आते हैं और प्रत्येक दौरे में तकनीकी, प्रबंधन और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग के स्तर पर भी कई जटिल चुनौतियां थीं। एलएंडटी और टीसीई जैसी कंपनियों के शीर्ष इंजीनियरों की टीम यहां लगातार काम कर रही है और उनका मनोबल बनाए रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी रही। बताया कि मंदिर की नींव का निर्माण अपने आप में एक अद्वितीय इंजीनियरिंग उदाहरण है।
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पारंपरिक पाइल फाउंडेशन की जगह इंजीनियर्ड मिट्टी का प्रयोग किया गया। इसके लिए लगभग 15 मीटर गहराई तक खुदाई कर 42 परतों में कम्पैक्शन (ठोस बनाना) किया गया, जिससे जमीन पत्थर जैसी ठोस संरचना में बदल गई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में कई जिम्मेदारियां निभाने के बाद भी राम मंदिर निर्माण का यह दायित्व उनके लिए सबसे विशेष रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भगवान की कृपा से यह ऐतिहासिक निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा होगा।
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एक हजार वर्ष टिकाऊ बनाने की योजना
उन्होंने बताया कि मंदिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया गया है, क्योंकि इसे कम से कम एक हजार वर्ष तक टिकाऊ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पत्थरों की तापमान सहन क्षमता और उनकी मजबूती का वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद ही निर्माण सामग्री का चयन किया गया।

मंदिर के निर्माण के लिए राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के विशेष गुलाबी पत्थरों का उपयोग किया गया। इसके लिए राजस्थान सरकार ने विशेष अनुमति देकर खदानों से पत्थर निकालने की व्यवस्था कराई।
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