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Acharya Satyendra Das Died: ढांचा विध्वंस के समय रामलला को गोद में लेकर गए थे दास, बचपन में ही आ गए थे अयोध्या
Thu, 13 Feb 2025 10:07 AM IST
शाहरुख खान
नितिन मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
नितिन मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 13 Feb 2025 10:07 AM IST
सार
Satyendra Das Nidhan: आचार्य सत्येंद्र दास एक मार्च 1992 को रामलला के मुख्य पुजारी नियुक्त हुए थे। तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अशोक सिंहल की सहमति के बाद उनके मुख्य पुजारी बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ था।
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Acharya Satyendra Das Died
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Ram Mandir Chief Priest: रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ढांचा विध्वंस से राम मंदिर निर्माण तक के साक्षी रहे हैं। रामलला की 34 साल सेवा की। आचार्य सत्येंद्र दास के साथ सहायक पुजारी के रूप में कार्य करने वाले प्रेमचंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि बाबरी विध्वंस के समय रामलला समेत चारों भाइयों के विग्रह बचाने के लिए आचार्य उन्हें गोद में लेकर गए थे।
वह टेंट में रामलला के दुर्दिन देखकर रोते थे। करीब चार साल तक अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला की सेवा मुख्य पुजारी के रूप में की। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय भी उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलके थे। स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते उनके मंदिर आने-जाने पर कोई शर्त लागू नहीं थी। आचार्य सत्येंद्र दास ने साल 1975 में संस्कृत विद्यालय से आचार्य की डिग्री हासिल की।
1976 में उन्हें अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में सहायक शिक्षक की नौकरी मिली। रामलला की पूजा के लिए उनका चयन 1992 में बाबरी विध्वंस के नौ माह पहले हुआ था। उनकी उम्र 87 हो चुकी थी, लेकिन रामलला के प्रति समर्पण व सेवा भाव को देखते हुए उनके स्थान पर अन्य मुख्य पुजारी का चयन नहीं हुआ।
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आचार्य सत्येंद्र दास ने कुछ दिन पहले कहा था कि, मैंने रामलला की सेवा में लगभग तीन दशक बिता दिए हैं और आगे जब भी मौका मिलेगा तो बाकी जिंदगी भी उन्हीं की सेवा में बिताना चाहूंगा। यह रामलला के प्रति उनकी अगाध आस्था का परिचायक है।
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वह टेंट में रामलला के दुर्दिन देखकर रोते थे। करीब चार साल तक अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला की सेवा मुख्य पुजारी के रूप में की। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय भी उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलके थे। स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते उनके मंदिर आने-जाने पर कोई शर्त लागू नहीं थी। आचार्य सत्येंद्र दास ने साल 1975 में संस्कृत विद्यालय से आचार्य की डिग्री हासिल की।
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1976 में उन्हें अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में सहायक शिक्षक की नौकरी मिली। रामलला की पूजा के लिए उनका चयन 1992 में बाबरी विध्वंस के नौ माह पहले हुआ था। उनकी उम्र 87 हो चुकी थी, लेकिन रामलला के प्रति समर्पण व सेवा भाव को देखते हुए उनके स्थान पर अन्य मुख्य पुजारी का चयन नहीं हुआ।
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आचार्य सत्येंद्र दास ने कुछ दिन पहले कहा था कि, मैंने रामलला की सेवा में लगभग तीन दशक बिता दिए हैं और आगे जब भी मौका मिलेगा तो बाकी जिंदगी भी उन्हीं की सेवा में बिताना चाहूंगा। यह रामलला के प्रति उनकी अगाध आस्था का परिचायक है।
बाबरी विध्वंस के दौरान रामलला के विग्रह को किया सुरक्षित
आचार्य सत्येंद्र दास के साथ सहायक पुजारी के रूप में कार्य करने वाले प्रेमचंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि जब ढांचा विध्वंस हुआ तो आचार्य सत्येंद्र दास रामलला के विग्रह को सुरक्षित करने में लगे थे। सुबह के 11 बज रहे थे। मंच लगा हुआ था। नेताओं ने कहा पुजारी जी रामलला को भोग लगा दें और पर्दा बंद कर दें। मुख्य पुजारी ने भोग लगाकर पर्दा लगा दिया। एक दिन पहले ही कारसेवकों से कहा गया था कि आप लोग सरयू से जल ले आएं।
आचार्य सत्येंद्र दास के साथ सहायक पुजारी के रूप में कार्य करने वाले प्रेमचंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि जब ढांचा विध्वंस हुआ तो आचार्य सत्येंद्र दास रामलला के विग्रह को सुरक्षित करने में लगे थे। सुबह के 11 बज रहे थे। मंच लगा हुआ था। नेताओं ने कहा पुजारी जी रामलला को भोग लगा दें और पर्दा बंद कर दें। मुख्य पुजारी ने भोग लगाकर पर्दा लगा दिया। एक दिन पहले ही कारसेवकों से कहा गया था कि आप लोग सरयू से जल ले आएं।
वहां एक चबूतरा बनाया गया था। ऐलान किया गया कि सभी लोग चबूतरे पर पानी छोड़ें और धोएं, लेकिन जो नवयुवक थे उन्होंने कहा हम यहां पानी से धोने नही आए हैं। उसके बाद नारे लगने लगे। सारे नवयुवक उत्साहित थे। वे बैरिकेडिंग तोड़ कर विवादित ढांचे पर पहुंच गए और तोड़ना शुरू कर दिया। इस बीच मुख्य पुजारी रामलला समेत चारों भाइयों के विग्रह को उठाकर अलग चले गए। जहां उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ।
1992 में बने थे पुजारी 100 रुपये था वेतन
आचार्य सत्येंद्र दास एक मार्च 1992 को रामलला के मुख्य पुजारी नियुक्त हुए थे। तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अशोक सिंहल की सहमति के बाद उनके मुख्य पुजारी बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ था। जब वह मुख्य पुजारी बनाए गए, उन्हें 100 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उनका वेतन बढ़कर 38,500 रुपये हो गया था। राम मंदिर ट्रस्ट ने रामलला के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें आजीवन वेतन देने का एलान किया था।
आचार्य सत्येंद्र दास एक मार्च 1992 को रामलला के मुख्य पुजारी नियुक्त हुए थे। तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अशोक सिंहल की सहमति के बाद उनके मुख्य पुजारी बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ था। जब वह मुख्य पुजारी बनाए गए, उन्हें 100 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उनका वेतन बढ़कर 38,500 रुपये हो गया था। राम मंदिर ट्रस्ट ने रामलला के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें आजीवन वेतन देने का एलान किया था।
संत कबीरनगर से बचपन में ही आ गए थे अयोध्या
सत्येंद्र दास संत कबीरनगर के रहने वाले थे। वह बचपन में ही अयोध्या आ गए थे। उन्हें अपने आस-पास धार्मिक माहौल मिला था। अभिरामदास जिन्होंने 1949 में रामजन्म भूमि के गर्भगृह में मूर्तियां रखी थी, उनसे काफी प्रभावित हुए। अभिरामदास जी का सत्येंद्र दास के पिता से अच्छा संपर्क था। सत्येंद्र दास जी पर धर्म व अध्यात्म का गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने पिता के समक्ष संन्यासी बनने की इच्छा जताई। पिताजी ने भी कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उन्हें बहुत खुशी हुई।
सत्येंद्र दास संत कबीरनगर के रहने वाले थे। वह बचपन में ही अयोध्या आ गए थे। उन्हें अपने आस-पास धार्मिक माहौल मिला था। अभिरामदास जिन्होंने 1949 में रामजन्म भूमि के गर्भगृह में मूर्तियां रखी थी, उनसे काफी प्रभावित हुए। अभिरामदास जी का सत्येंद्र दास के पिता से अच्छा संपर्क था। सत्येंद्र दास जी पर धर्म व अध्यात्म का गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने पिता के समक्ष संन्यासी बनने की इच्छा जताई। पिताजी ने भी कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उन्हें बहुत खुशी हुई।
आचार्य सत्येंद्र दास का सफर
- एक मार्च 1992 को रामलला के मुख्य पुजारी बने।
- वेतन- 38, 500 रुपये।
- घर- यूपी का संत कबीरनगर
- 1958 में अयोध्या आए थे, यहीं पढ़ाई पूरी की
- 1975 में संस्कृत विद्यालय से आचार्य की डिग्री ली
- 1976 में संस्कृत डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट टीचर की नौकरी मिल गई
- 1992 में बाबरी विध्वंस के दौरान रामलला को गोद में लेकर भागे थे
- 05 अगस्त 2020 को भूमि पूजन के साक्षी रहे
- 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी रहे
- 12 फरवरी 2025 को लखनऊ के पीजीआई में निधन