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Ayodhya News: साथ रहने को राजी हुए 36 जोड़े
Sat, 12 Sep 2026 11:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:00 PM IST
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राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकारियों के सामने अपनी समस्या बताते लोग।
अयोध्या। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक विवादों का सुखद अंत हुआ। पति-पत्नी के बीच मनमुटाव दूर कराकर 36 जोड़ों को फिर से साथ रहने के लिए राजी कराया गया। न्यायालय में ही इन जोड़ों की विदाई कराई गई। कई दंपती ऐसे थे, जो लंबे समय से अलग रह रहे थे और तलाक के लिए मुकदमा लड़ रहे थे।
दीवानी न्यायालय के सभागार में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने किया। पारिवारिक न्यायालय में सुलह-समझौते के लिए 143 मुकदमे प्रस्तुत किए गए। इनमें 118 मामलों का निस्तारण कराया गया। न्यायिक अधिकारियों और मध्यस्थता से जुड़े प्रयासों के बाद दंपतियों ने पुराने मतभेद भुलाकर वैवाहिक जीवन दोबारा शुरू करने पर सहमति जताई।
विनोद और पूजा के मामले में भी ऐसा ही हुआ। दोनों काफी समय से अलग रह रहे थे। उनके बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि तलाक के लिए मुकदमा दायर कर दिया गया था। लोक अदालत में दोनों पक्षों की बात सुनी गई। समझाने के बाद उनके बीच समझौता कराया गया। इसके बाद दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया। अदालत से ही उनकी विदाई की गई।
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लोक अदालत में सिर्फ पारिवारिक विवाद ही नहीं, बल्कि ऋण और श्रम संबंधी मामलों का भी निस्तारण किया गया। किसान क्रेडिट कार्ड से वर्ष 2017 में लिए गए 1.18 लाख रुपये के लोन के मामले में ऋणधारक अनिल की मृत्यु हो चुकी थी। उनकी पत्नी ने अपनी आर्थिक परिस्थितियां जिला जज के समक्ष रखीं। इसके बाद 30 हजार रुपये में समझौता कराकर लोन का निस्तारण कराया गया। राम सुरेश और हरिश्चंद्र के लोन भी सुलह-समझौते से समाधान किया गया।
श्रम विभाग से संबंधित नौ लंबित वादों का भी दोनों पक्षों की सहमति से निस्तारण हुआ। इनमें कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के पांच, एक अवार्ड और बकाया वेतन के तीन मामले शामिल रहे। कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीयूष त्रिपाठी, नोडल अधिकारी दीपक यादव, एडीजे प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण रंजिनी शुक्ला, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा और स्टेट बैंक के अधिकारी गौरव मौजूद रहे। संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय महेंद्र पासवान ने किया।
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दीवानी न्यायालय के सभागार में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने किया। पारिवारिक न्यायालय में सुलह-समझौते के लिए 143 मुकदमे प्रस्तुत किए गए। इनमें 118 मामलों का निस्तारण कराया गया। न्यायिक अधिकारियों और मध्यस्थता से जुड़े प्रयासों के बाद दंपतियों ने पुराने मतभेद भुलाकर वैवाहिक जीवन दोबारा शुरू करने पर सहमति जताई।
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विनोद और पूजा के मामले में भी ऐसा ही हुआ। दोनों काफी समय से अलग रह रहे थे। उनके बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि तलाक के लिए मुकदमा दायर कर दिया गया था। लोक अदालत में दोनों पक्षों की बात सुनी गई। समझाने के बाद उनके बीच समझौता कराया गया। इसके बाद दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया। अदालत से ही उनकी विदाई की गई।
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लोक अदालत में सिर्फ पारिवारिक विवाद ही नहीं, बल्कि ऋण और श्रम संबंधी मामलों का भी निस्तारण किया गया। किसान क्रेडिट कार्ड से वर्ष 2017 में लिए गए 1.18 लाख रुपये के लोन के मामले में ऋणधारक अनिल की मृत्यु हो चुकी थी। उनकी पत्नी ने अपनी आर्थिक परिस्थितियां जिला जज के समक्ष रखीं। इसके बाद 30 हजार रुपये में समझौता कराकर लोन का निस्तारण कराया गया। राम सुरेश और हरिश्चंद्र के लोन भी सुलह-समझौते से समाधान किया गया।
श्रम विभाग से संबंधित नौ लंबित वादों का भी दोनों पक्षों की सहमति से निस्तारण हुआ। इनमें कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के पांच, एक अवार्ड और बकाया वेतन के तीन मामले शामिल रहे। कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीयूष त्रिपाठी, नोडल अधिकारी दीपक यादव, एडीजे प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण रंजिनी शुक्ला, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा और स्टेट बैंक के अधिकारी गौरव मौजूद रहे। संचालन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय महेंद्र पासवान ने किया।

राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकारियों के सामने अपनी समस्या बताते लोग।

राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकारियों के सामने अपनी समस्या बताते लोग।

राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकारियों के सामने अपनी समस्या बताते लोग।